नई दिल्ली. क्रिकेट इतिहास में कभी-कभार ही ऐसे लम्हे आते हैं जब कोई मुकाबला शुरू होने से पहले ही इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाता है. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ डरबन के किंग्समीड मैदान पर जारी पहले टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने कुछ ऐसा ही अनोखा कारनामा कर दिखाया. कंगारू टीम ने जब इस मुकाबले के लिए मैदान पर कदम रखा, तो उसकी प्लेइंग इलेवन ने एक नया इतिहास रच दिया. ऑस्ट्रेलिया की इस टेस्ट एकादश में शामिल सभी ग्यारह खिलाड़ियों की उम्र 30 वर्ष या उससे अधिक थी. करीब एक सदी यानी लगभग सौ साल में यह पहला मौका था जब ऑस्ट्रेलिया ने अपनी सबसे उम्रदराज टेस्ट टीम मैदान पर उतारी हो. इस पूरी प्लेइंग इलेवन की औसत आयु 34.59 वर्ष दर्ज की गई, जो मेंस टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में किसी भी टीम की सातवीं सबसे उम्रदराज प्लेइंग इलेवन है.
मैच की शुरुआत में कप्तान पैट कमिंस (Pat Cummins) ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया. हालांकि, डरबन की पिच पर दक्षिण अफ्रीका के खतरनाक तेज आक्रमण के आगे ऑस्ट्रेलियाई रणनीति शुरुआती ओवरों में लड़खड़ाती नजर आई. मेहमान टीम ने पहले 12 ओवरों के खेल में मात्र 28 रन के स्कोर पर अपने दो शुरुआती विकेट गंवा दिए. इस मुश्किल परिस्थिति में मैदान पर उतरे निक मैडिसन (Nic Maddinson) लगभग एक दशक यानी करीब दस साल बाद टेस्ट क्रिकेट में वापसी कर रहे थे, लेकिन उनकी यह वापसी किसी बुरे सपने जैसी साबित हुई. मैडिंसन बिना खाता खोले शून्य पर आउट हो गए.
एक सदी बाद उतरी सबसे उम्रदराज कंगारू टीम
ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट इतिहास में यह पहला अवसर था जब प्लेइंग इलेवन का हर एक खिलाड़ी तीस पार था. इस अनुभवी टीम के सबसे युवा खिलाड़ी मैथ्यू रेनशॉ थे, जिनकी उम्र 30 वर्ष है और उन्होंने अपना टेस्ट डेब्यू साल 2016 में किया था. गौर करने वाली बात यह है कि पुरुष टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में इससे पहले जितनी भी छह सबसे उम्रदराज टीमें उतरी हैं, वे सभी 1920 के दशक के मध्य से लेकर अंत के बीच मैदान पर उतरी थीं.
दिग्गजों की इस खास फेहरिस्त में शामिल हुआ ऑस्ट्रेलिया
इस अनोखे रिकॉर्ड की शुरुआत सबसे पहले इंग्लैंड ने की थी, जिसने 1921 में लीड्स के मैदान पर चिर-प्रतिद्वंद्वी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऐसी टीम उतारी थी. इसके बाद लंबे समय तक यह नजारा देखने को नहीं मिला, लेकिन हाल के वर्षों में न्यूजीलैंड ने इस फेहरिस्त में कई बार अपना नाम दर्ज कराया. कीवी टीम ने 2022 और 2023 में कराची के मैदान पर पाकिस्तान के खिलाफ और 2023 में वेलिंगटन में इंग्लैंड के खिलाफ सभी तीस-प्लस खिलाड़ियों वाली एकादश मैदान पर उतारी थी. अब डरबन के मैदान पर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उतरी यह ऑस्ट्रेलियाई टीम इस विशिष्ट लिस्ट में शामिल होने वाली नवीनतम टीम बन गई है.
निक मैडिंसन का अनचाहा और ऐतिहासिक रिकॉर्ड
मैदान पर सिर्फ टीम की उम्र ही चर्चा का विषय नहीं रही, बल्कि निक मैडिंसन की वह अजीबोगरीब पारी भी इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई. मैडिंसन ने अपनी पारी में 33 गेंदों का सामना किया लेकिन वे अपना खाता खोलने में नाकामयाब रहे. मेंस टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में किसी ओपनिंग बल्लेबाज द्वारा बिना खाता खोले खेली गई यह तीसरी सबसे लंबी पारी है. इस मामले में उनसे आगे सिर्फ न्यूजीलैंड के डेरिन मरे हैं, जिन्होंने 1995 में श्रीलंका के खिलाफ 33 नहीं बल्कि 39 गेंदों का सामना किया था, और जिम्बाब्वे के ट्रेवर ग्रिपर हैं, जिन्होंने 2000 में वेस्टइंडीज के खिलाफ 36 गेंदें खेली थीं.
माइक व्हाइटनी के खास क्लब के करीब पहुंचे मैडिंसन
अगर सभी बल्लेबाजी क्रमों को मिलाकर बात की जाए तो ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों के इतिहास में केवल माइक व्हिटनी ही ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने खाता खोलने से पहले मैडिंसन से अधिक गेंदें खेली थीं. व्हिटनी ने 1981 में मैनचेस्टर में इंग्लैंड के खिलाफ 42 गेंदों का सामना करने के बाद शून्य पर अपना विकेट गंवाया था.
नौ साल से ज्यादा के लंबे अंतराल के बाद हुई वापसी
पैंतीस साल के निक मैडिंसन के लिए यह वापसी निजी तौर पर बेहद भावुक और संघर्षपूर्ण रही. नौ साल और 283 दिन के लंबे अंतराल के बाद उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में वापसी की है. ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट इतिहास में टेस्ट मैचों के बीच यह दूसरा सबसे लंबा गैप है. इस सूची में सबसे ऊपर बॉब सिम्पसन का नाम आता है, जिन्होंने नौ साल और 305 दिन का लंबा इंतजार किया था, जबकि एर्नी मेने नौ साल और 104 दिन के गैप के साथ तीसरे स्थान पर काबिज हैं.
कैंसर को मात देकर मैदान पर लौटे मैडिसन
इस वापसी के सफर में मैडिंसन ने एक और बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया. उन्होंने दो टेस्ट मैचों के बीच 88 लगातार टेस्ट मैच मिस किए. इस मामले में उन्होंने ब्रैड हॉग और टिम पेन को पीछे छोड़ दिया है, जिन्होंने अपने करियर के दौरान 78-78 टेस्ट मैच छोड़े थे. मैडिंसन के लिए यह लंबा अंतराल केवल चयनकर्ताओं की नजरअंदाजगी का नतीजा नहीं था, बल्कि उन्होंने अपने जीवन की सबसे बड़ी जंग लड़ी है. उन्होंने टेस्ट टीम में वापसी से पहले शेफील्ड शील्ड का पिछला पूरा सीजन कैंसर (testicular cancer) के इलाज के कारण बाहर रहकर बिताया था.
579 दिनों के लंबे ब्रेक के बाद प्रथम श्रेणी क्रिकेट में वापसी
बीमारी और लंबे इलाज के बाद उनका यह कमबैक आसान नहीं था. प्रथम श्रेणी क्रिकेट में वापसी करने से पहले उनका यह ब्रेक 579 दिनों का रहा. 1900 से 1901 के बीच जो डार्लिंग के 676 दिनों के लंबे अंतराल के बाद, किसी ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी द्वारा मेन्स टेस्ट खेलने से पहले का यह सबसे लंबा ब्रेक है. डेविड वार्नर और स्टीव स्मिथ का पिछला सबसे लंबा साझा अंतराल 494 दिनों का रहा था. डरबन के मैदान पर उतरी यह ऑस्ट्रेलियाई टीम और निक मैडिंसन का यह संघर्ष भरा सफर क्रिकेट प्रेमियों के लिए हमेशा याद रखा जाएगा.