गंगा की लहरों में डॉल्फिन का जलवा, सुल्तानगंज से बटेश्वर स्थान तक रोमांचक नजारा, संरक्षण के लिए नई पहल

गंगा की लहरों में डॉल्फिन का जलवा, सुल्तानगंज से बटेश्वर स्थान तक रोमांचक नजारा, संरक्षण के लिए नई पहल


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Bhagalpur Dolphin Sanctuary: भागलपुर के सुल्तानगंज से बटेश्वर स्थान तक गंगा में डॉल्फिन की अठखेलियां लोगों को आकर्षित कर रही हैं. यहाँ इनकी संख्या 210 है. इनके संरक्षण के लिए नावों में बजर यंत्र लगाने और वाचिंग सेंटर का प्रस्ताव भेजा गया है, जिससे इन्हें सुरक्षित रखा जा सके.

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भागलपुर: भागलपुर डॉल्फिन अभ्यारण क्षेत्र माना जाता है. यहां पर डॉल्फिन को अठखेलियां करते आप आसानी से देख सकते हैं. सुल्तानगंज से लेकर बटेश्वर स्थान तक डॉल्फिन की अठखेलियां आपको नजर आ जाएंगी. डॉल्फिन एक विलुप्त प्राय की जीव मानी जाती है. इसे संरक्षित करने के लिए सरकार भी प्रयास करती है. लोगों को इन जलीय जीवों के प्रति जागरूक करने का भी प्रयास किया जाता है. अभी की बात करें तो गंगा का जलस्तर बढ़ते ही गंगा में डॉल्फिन की अठखेलियां लोगों को खूब भा रही है. लोग आस लगाए बैठे रहते हैं कि कब डॉल्फिन ऊपर आएगी. इसका झलक देख पाएंगे. अभी कई घाटों पर डॉल्फिन की अठखेलियां आप देख पाएंगे.

कहां-कहां देख सकते हैं डॉल्फिन
आपको बता दें कि डॉल्फिन की अठखेलियां देखना सबको पसंद होता है. ऐसे में यहां के कई ऐसे घाट हैं, जहां से आप डॉल्फिन की अठखेलियां देख सकते हैं. आप इसे सूर्योदय के समय से लेकर 10 बजे और शाम में 3 बजे के बाद अधिक देख पाएंगे. डॉल्फिन की अठखेलियां सुल्तानगंज, तिलकपुर, बूढ़ानाथ, आदमपुर, सीढ़ी घाट, बरारी घाट, बाबूपुर घाट और बटेश्वर घाट पर डॉल्फिन की अठखेलियों का आनंद ले सकते हैं. सबसे अधिक इसी जगह पर डॉल्फिन देखने को मिलती हैं.

नाव में बजर नामक एक यंत्र लगाया जाएगा
डॉल्फिन संरक्षण के लिए कई तरह के कार्य किये जा रहे हैं. जब इस बारे में वन पदाधिकारी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि डॉल्फिन के संरक्षण के लिए हम लोग एक अलग तरीके का कार्य कर रहे हैं, जो कार्य अब तक भागलपुर में नहीं हुआ था. हम लोगों ने इसे लेकर प्रस्ताव भी विभाग को भेजा है. गंगा में चलने वाले नाव में बजर नामक एक यंत्र लगाया जाएगा. इससे डॉल्फिन के पास जैसे ही नाव पहुंचेगी वह अपने सेंसर के जरिए उसकी पहचान कर लेगा और आवाज करने लगेगा. इससे नाविक को पता चल जाएगा कि यहां डॉल्फिन है. इससे नाविक भी सचेत हो जाएगा और अपने नाव की धारा को बदल लेगा या फिर वहां से नाव को धीरे-धीरे निकाला जाएगा. इससे डॉलफिन सुरक्षित रहेंगी. उन्हें किसी तरह की हानि नहीं होगी.

210 की संख्या हैं डॉल्फिन
यहां 210 के आसपास डॉल्फिन हैं. 2022 की गणना के अनुसार गंगा में 210 की संख्या में डॉल्फिन और उसके बच्चे पाए गए हैं. 2018 में इसकी संख्या करीब 178 थी. जिसके बाद बढ़कर 210 हो गई. इसके संरक्षण के दिशा में अच्छी पहल के बाद यह सम्भव हो पाया है. आपको बता दें कि भारत का दूसरा गंगा अभ्यारण क्षेत्र भागलपुर है. ऐसे में जलीय जीवों का संरक्षण सबसे ज्यादा जरूरी है. अगर आपको भी घायल अवस्था में डॉल्फिन या कोई भी जीव नजर आएं तो आप उसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दें. जिससे उसका उपचार तुरंत सम्भव हो सके. इससे उसकी जान भी बच सकती है.

बनेगा डॉल्फिन वाचिंग सेंटर
डीएफओ आशुतोष राज ने बताया कि हमलोगों ने डॉल्फिन वाचिंग सेंटर को लेकर प्रस्ताव भेजा है. इसको बनने से यहां पर लोग आसानी से इसको देख पाएंगे. इसकी अठखेलियां लोगों के मन को खूब भाता है. 2 से 5 मिनट के अंतराल पर यह एक बार ऊपर आती है. अभी ताजा सर्वे फरवरी में हुआ है हालांकि उसकी रिपोर्ट नहीं आयी है अभी तक इसके आने के बाद नया आंकड़ा पता चल पाएगा. लेकिन वर्तमान में काफ(डॉलफिन का बच्चा) की संख्या में वृद्धि हुई है.



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