US Green Card Rules for Indians 2026 Explainer: अमेरिका में नौकरी करने वाले भारतीयों को झटका, ग्रीन कार्ड क्या है, क्या फायदा मिलता है?

US Green Card Rules for Indians 2026 Explainer: अमेरिका में नौकरी करने वाले भारतीयों को झटका, ग्रीन कार्ड क्या है, क्या फायदा मिलता है?


US Green Card Rules for Indians 2026: अमेरिका में अच्छी नौकरी पाने का सपना देखने वाले भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए ग्रीन कार्ड लंबे समय से एक बड़ा लक्ष्य रहा है. इसकी वजह सिर्फ अच्छी कमाई नहीं, बल्कि अमेरिका में स्थायी रूप से रहने, नौकरी करने और परिवार के भविष्य की बेहतर योजना बनाने की सुविधा भी है लेकिन अब इस रास्ते में एक नई अड़चन सामने आई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने आठ बड़ी टेक्नोलॉजी और आईटी कंपनियों को रोजगार के आधार पर ग्रीन कार्ड दिलाने की प्रक्रिया के एक अहम चरण से निलंबित कर दिया है. इनमें भारत की टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो और एचसीएल के साथ कॉग्निजेंट, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी शामिल हैं. अमेरिकी श्रम विभाग के इस फैसले के बाद इन कंपनियों के नए और पहले से लंबित पर्म आवेदनों की प्रक्रिया रोक दी गई है.

इस फैसले से उन भारतीय कर्मचारियों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है, जो एच-1बी वीजा पर अमेरिका में काम कर रहे हैं और आगे चलकर वहीं स्थायी रूप से बसना चाहते हैं. हालांकि, इस खबर का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका में काम करने वाले सभी भारतीयों के वीजा रद्द कर दिए गए हैं या ग्रीन कार्ड पाने के सभी रास्ते बंद हो गए हैं. कार्रवाई का केंद्र पर्म (PERM) यानी रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है. इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कर्मचारी किस कंपनी में काम करता है, उसका आवेदन किस चरण में है और वह किस श्रेणी के तहत स्थायी निवास पाने की कोशिश कर रहा है.

क्या होता है अमेरिकी ग्रीन कार्ड?

ग्रीन कार्ड का आधिकारिक नाम परमानेंट रेजिडेंट कार्ड (Permanent Resident Card) है. यह अमेरिका में किसी विदेशी नागरिक के स्थायी निवासी होने का प्रमाण होता है. इसे पाने वाला व्यक्ति अमेरिकी कानूनों और संबंधित नियमों के तहत अमेरिका में स्थायी रूप से रह सकता है और काम कर सकता है.ग्रीन कार्ड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सामान्य अस्थायी वर्क वीजा की तरह केवल कुछ समय के लिए नौकरी करने की अनुमति नहीं देता, बल्कि स्थायी निवास का दर्जा प्रदान करता है. यही वजह है कि अमेरिका में लंबे समय से काम कर रहे भारतीय पेशेवर इसे अपने करियर और परिवार के भविष्य से जोड़कर देखते हैं.

ग्रीन कार्ड मिलने के बाद व्यक्ति को हर बार अमेरिका में काम करने के लिए उसी तरह अस्थायी वीजा पर निर्भर नहीं रहना पड़ता. वह अपने करियर और रहने की योजना को अधिक स्थिर तरीके से आगे बढ़ा सकता है हालांकि ग्रीन कार्ड रखने वालों को भी अमेरिकी कानूनों का पालन करना होता है और स्थायी निवासी के दर्जे के साथ कुछ जिम्मेदारियां जुड़ी होती हैं. यहां एक बात समझना जरूरी है कि ग्रीन कार्ड मिलने का मतलब अमेरिकी नागरिक बन जाना नहीं है. स्थायी निवासी और अमेरिकी नागरिक के अधिकार अलग-अलग हैं. उदाहरण के लिए संघीय चुनावों में मतदान का अधिकार सामान्य रूप से अमेरिकी नागरिकों के पास होता है. ग्रीन कार्ड धारक को स्थायी निवास और काम करने का अधिकार मिलता है, लेकिन नागरिकता से जुड़े सभी अधिकार नहीं मिलते.

भारतीयों को ग्रीन कार्ड मिलने से क्या फायदा होता है?

अमेरिका में नौकरी करने वाले भारतीयों के लिए ग्रीन कार्ड का महत्व कई वजहों से है. सबसे पहले इससे उन्हें वहां स्थायी रूप से रहने और काम करने का अधिकार मिलता है. एच-1बी जैसे अस्थायी वीजा पर काम करने वाले कर्मचारियों को अपनी वीजा स्थिति और उसकी अवधि का ध्यान रखना पड़ता है. ग्रीन कार्ड मिलने के बाद स्थायी निवासी के रूप में उनका दर्जा बदल जाता है.

दूसरा फायदा नौकरी और करियर से जुड़ा है. ग्रीन कार्ड धारक सामान्य रूप से किसी एक कंपनी के साथ उसी तरह बंधे नहीं रहते जिस तरह रोजगार से जुड़े अस्थायी वीजा पर काम करने वाले कुछ कर्मचारियों को रहना पड़ सकता है हालांकि यदि किसी व्यक्ति का ग्रीन कार्ड आवेदन अभी लंबित है तो नौकरी बदलने से उसकी प्रक्रिया पर क्या असर पड़ेगा, यह उसके मामले और लागू नियमों पर निर्भर करता है.

तीसरा फायदा परिवार की योजना से जुड़ा है. अमेरिका में स्थायी रूप से रहने का अधिकार मिलने से लोग बच्चों की पढ़ाई, घर और लंबे समय की आर्थिक योजना के बारे में अधिक स्थिरता के साथ सोच सकते हैं. पात्रता और संबंधित नियमों के अनुसार कुछ परिवार के सदस्य भी ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं लेकिन परिवार के हर सदस्य को अपने आप ग्रीन कार्ड नहीं मिल जाता.इसके लिए अलग पात्रता और प्रक्रिया लागू होती है.

ग्रीन कार्ड धारकों को अमेरिका से बाहर यात्रा करने और वापस लौटने के मामले में भी निर्धारित नियमों का पालन करना होता है. लंबे समय तक अमेरिका से बाहर रहने पर उनके स्थायी निवासी के दर्जे पर सवाल उठ सकते हैं इसलिए ग्रीन कार्ड मिलने के बाद भी यात्रा दस्तावेजों, कार्ड की वैधता और स्थायी निवास से जुड़ी जिम्मेदारियों को समझना जरूरी है.

अमेरिका में ग्रीन कार्ड पाने के कौन-कौन से रास्ते हैं?

अमेरिका में ग्रीन कार्ड पाने के लिए एक ही रास्ता नहीं है. आवेदक की पात्रता के अनुसार परिवार के रिश्ते, रोजगार, शरणार्थी या शरण से जुड़ी श्रेणियों और कुछ विशेष प्रवासी श्रेणियों के जरिए आवेदन किया जा सकता है. कुछ मामलों में निवेश या अन्य विशेष पात्रता के आधार पर भी ग्रीन कार्ड पाने का रास्ता उपलब्ध होता है.भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड खास महत्व रखता है.

इस प्रक्रिया में कई मामलों में अमेरिकी कंपनी अपने कर्मचारी को स्थायी पद पर रखने के लिए आवेदन करती है. कंपनी को यह साबित करना पड़ सकता है कि संबंधित नौकरी के लिए पर्याप्त योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं और विदेशी कर्मचारी को नियुक्त करने से स्थानीय कर्मचारियों के वेतन या काम की परिस्थितियों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा.रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया में पर्म, नियोक्ता की इमिग्रेंट याचिका और वीजा उपलब्ध होने पर स्थायी निवास का आवेदन जैसे चरण शामिल हो सकते हैं हालांकि रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की हर श्रेणी में पर्म जरूरी नहीं होता. इसलिए पर्म प्रक्रिया पर रोक लगने का अर्थ यह नहीं है कि ग्रीन कार्ड पाने के सभी रास्ते बंद हो गए हैं.

पर्म (PERM) क्या है और ग्रीन कार्ड से इसका क्या संबंध है?

पर्म का पूरा नाम परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (Permanent Labor Certification) है. यह अमेरिकी श्रम विभाग की एक प्रक्रिया है जिसके जरिए रोजगार के आधार पर ग्रीन कार्ड के लिए कर्मचारी को प्रायोजित करने वाली कंपनी को यह साबित करना होता है कि वह अमेरिकी श्रमिकों के हितों को नुकसान पहुंचाए बिना विदेशी कर्मचारी को स्थायी पद पर नियुक्त करना चाहती है.पर्म प्रक्रिया के तहत कंपनी को आम तौर पर यह दिखाना होता है कि संबंधित नौकरी के लिए जरूरी योग्यता रखने वाला पर्याप्त अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं है. साथ ही विदेशी कर्मचारी को नौकरी देने से अमेरिका में काम करने वाले कर्मचारियों के वेतन और काम की परिस्थितियों पर बुरा असर नहीं पड़ना चाहिए.

इसे आसान भाषा में समझें तो पर्म अमेरिकी सरकार की ओर से यह जांचने का एक तरीका है कि कंपनी किसी विदेशी कर्मचारी को स्थायी नौकरी देने के लिए जरूरी शर्तें पूरी कर रही है या नहीं.पर्म की मंजूरी मिलने के बाद भी ग्रीन कार्ड तुरंत नहीं मिल जाता. रोजगार आधारित कई मामलों में इसके बाद कंपनी को अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा यानी यूएससीआईएस के पास कर्मचारी के लिए इमिग्रेंट याचिका दाखिल करनी होती है. आगे की प्रक्रिया आवेदन की श्रेणी, प्राथमिकता तारीख और वीजा की उपलब्धता पर निर्भर करती है.

एच-1बी वीजा, पर्म और ग्रीन कार्ड में क्या अंतर है?

इन तीनों को लेकर अक्सर भ्रम होता है जबकि इनकी भूमिका अलग-अलग है.एच-1बी वीजा अमेरिका में कुछ विशेष पेशों में काम करने के लिए दिया जाने वाला अस्थायी वीजा है. इसके जरिए योग्य विदेशी पेशेवर अमेरिकी कंपनी में नौकरी कर सकते हैं. इसकी अवधि और विस्तार के लिए अलग नियम हैं.पर्म रोजगार के आधार पर ग्रीन कार्ड पाने की प्रोसेस का एक स्‍टेप है. इसमें कंपनी को यह साबित करना होता है कि विदेशी कर्मचारी को स्थायी पद पर रखने के लिए निर्धारित श्रम संबंधी शर्तें पूरी होती हैं.

ग्रीन कार्ड अमेरिका में स्थायी निवासी का दर्जा देता है. इसके मिलने के बाद व्यक्ति अमेरिकी कानूनों के तहत वहां स्थायी रूप से रह सकता है और काम कर सकता है.इसका मतलब है कि एच-1बी वीजा पर अमेरिका में नौकरी करने वाला हर व्यक्ति ग्रीन कार्ड धारक नहीं होता. इसी तरह पर्म आवेदन दाखिल करने या उसकी मंजूरी मिलने का अर्थ भी यह नहीं है कि ग्रीन कार्ड मिल गया है.

ट्रंप प्रशासन ने आठ आईटी कंपनियों पर क्या कार्रवाई की?

अमेरिकी प्रशासन ने 8 अक्टूबर 2026 को आठ बड़ी टेक्नोलॉजी और आईटी कंपनियों को पर्म कार्यक्रम से निलंबित करने की घोषणा की. इस सूची में माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी, कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा यानी टीसीएस, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी शामिल हैं.अमेरिकी श्रम विभाग के मुताबिक इन कंपनियों से जुड़े पर्म के नए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे और पहले से लंबित आवेदनों की प्रक्रिया भी रोक दी जाएगी. यह कार्रवाई संघीय जांचों और नियमों के कथित उल्लंघन से जुड़ी है.

इस फैसले का सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है जो इन कंपनियों के जरिए रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया में हैं या जिनके लिए कंपनी को पर्म आवेदन दाखिल करना था हालांकि इस कार्रवाई को सभी तरह के वीजा पर प्रतिबंध समझना गलत होगा. इसका घोषित दायरा पर्म प्रक्रिया है. इन कंपनियों में काम करने वाले सभी विदेशी कर्मचारियों के एच-1बी वीजा अपने आप रद्द नहीं हुए हैं और न ही जिन लोगों के पास पहले से ग्रीन कार्ड है, उनका स्थायी निवासी का दर्जा इस फैसले से अपने आप खत्म होता है.

अमेरिका ने इन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों की?

अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि कुछ कंपनियां विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए इमिग्रेशन कार्यक्रमों का गलत इस्तेमाल कर रही हैं. सरकार का कहना है कि अमेरिकी नागरिकों के लिए उपलब्ध नौकरियों में विदेशी कर्मचारियों को प्राथमिकता दिए जाने से स्थानीय कर्मचारियों के रोजगार के अवसर प्रभावित हो सकते हैं.अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग ने कहा कि इन कंपनियों के मामलों में जांच चल रही है. प्रशासन का तर्क है कि कंपनियों को अमेरिकी कर्मचारियों के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए और विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति के दौरान लागू नियमों का पालन करना चाहिए.

जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट पर क्या आरोप लगाया?

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट को लेकर सवाल उठाए. उनके मुताबिक कंपनी ने पिछले साल करीब 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से हटाया, जबकि कंपनी को लगभग 6,300 एच-1बी वीजा और करीब 3,000 ग्रीन कार्ड मिले.वेंस ने इन आंकड़ों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कुछ कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी कर्मचारियों को रखने के लिए आव्रजन कार्यक्रमों का इस्तेमाल कर रही हैं. प्रशासन का कहना है कि कंपनियों को अमेरिकी श्रमिकों के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए.दूसरी ओर माइक्रोसॉफ्ट ने इन आरोपों के जवाब में कहा कि उसके एच-1बी आवेदन का बड़ा हिस्सा पहले से कंपनी में काम कर रहे कर्मचारियों के वीजा की अवधि बढ़ाने या उनकी स्थिति में बदलाव से जुड़ा था.कंपनी के मुताबिक सभी आवेदन नए विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए नहीं थे.

इन 8 कंपनियों से जुड़े कितने आवेदन हुए?

अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग के हवाले से सामने आए आंकड़ों के मुताबिक इन आठ कंपनियों ने 2009 से अब तक करीब 30 लाख विदेशी कर्मचारियों को अमेरिका में स्थायी रूप से बसाने के लिए अनुरोध किए. इसी अवधि में इन कंपनियों को 2 लाख 30 हजार से अधिक एच-1बी वीजा मंजूर हुए और 1 लाख से ज्यादा पर्म लेबर सर्टिफिकेशन को मंजूरी मिली.इन आंकड़ों का यह मतलब नहीं है कि इन कंपनियों ने 30 लाख लोगों को ग्रीन कार्ड दिला दिया था. आवेदन या अनुरोध, एच-1बी वीजा, पर्म की मंजूरी और अंततः ग्रीन कार्ड मिलना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं.

ग्रीन कार्ड के लिए 12 से 15 साल तक इंतजार क्यों ?

भारतीय नागरिकों के लिए रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा पहले से ही लंबी रही है. इसकी एक बड़ी वजह यह है कि कुछ श्रेणियों में हर साल सीमित संख्या में वीजा उपलब्ध होते हैं. साथ ही अलग-अलग देशों के आवेदकों के लिए लागू सीमा और भारत से आने वाले आवेदनों की बड़ी संख्या के कारण भारतीयों की कतार लंबी हो जाती है.



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