केरल के पूर्व CM पिनाराई विजयन पर होगी FIR, HC ने दिया आदेश, क्या है मामला?
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केरल हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के साथ उनकी बेटी वीणा और दामाद मोहम्मद रियास के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया है. मामला कथित वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है. ED ने दावा किया था कि जांच में करोड़ों रुपए के हवाला लेन-देन से जुड़े सबूत मिले हैं. एजेंसी ने 7 सितंबर को केरल के DGP को पत्र लिखकर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज करने की मांग की थी. राज्य सरकार ने पहले शुरुआती जांच के लिए विशेष टीम बनाई थी. अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद आगे की जांच पर नजर रहेगी.
केरल हाईकोर्ट ने पूर्व CM पिनाराई विजयन, उनकी बेटी वीणा और दामाद मोहम्मद रियास के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया. (फाइल फोटो)
न्यूज18 मलयालम
केरल की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. केरल हाईकोर्ट ने विजयन के साथ उनकी बेटी वीणा और दामाद मोहम्मद रियास के खिलाफ भी FIR दर्ज करने का आदेश दिया है. यह मामला कथित वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है. प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने इस मामले में करोड़ों रुपए के हवाला लेन-देन से जुड़े सबूत मिलने का दावा किया था. अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य में इस मामले को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो सकती है.
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह था कि जब ED ने राज्य पुलिस को कथित अपराधों की जानकारी दी तो क्या पुलिस को सीधे FIR दर्ज करनी चाहिए थी या पहले शुरुआती जांच कराई जा सकती थी. हाईकोर्ट ने इसी कानूनी सवाल पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनी थीं. ED और याचिकाकर्ता का तर्क था कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर तुरंत FIR दर्ज की जानी चाहिए थी. दूसरी तरफ राज्य सरकार ने मामले की शुरुआती जांच के लिए विशेष जांच टीम बनाने का रास्ता अपनाया था. अब हाईकोर्ट के आदेश से जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हुआ है.
BJP की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य पीके कृष्णदास ने कहा कि हाईकोर्ट का फैसला पिनराई विजयन और CPI(M) के लिए बड़ा झटका है.
BJP बोली- विधानसभा सत्र से पहले पद छोड़ें
केरल में पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के खिलाफ हाईकोर्ट के फैसले के बाद BJP ने उनके इस्तीफे की मांग की है. BJP की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य पीके कृष्णदास ने कहा कि हाईकोर्ट का फैसला पिनराई विजयन और CPI(M) के लिए बड़ा झटका है. उन्होंने UDF पर भी विजयन को बचाने की कोशिश करने का आरोप लगाया. कृष्णदास ने मांग की कि पिनराई विजयन विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले नेता प्रतिपक्ष के पद से इस्तीफा दें. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर विजयन इस्तीफा नहीं देते हैं तो BJP विधानसभा सत्र के पहले दिन से सार्वजनिक प्रदर्शन शुरू करेगी.
पिनाराई विजयन और परिवार पर क्या हैं आरोप?
- इस मामले में पिनाराई विजयन के अलावा उनकी बेटी वीणा और दामाद मोहम्मद रियास के नाम भी शामिल हैं. ED ने दावा किया था कि जांच के दौरान करोड़ों रुपए के हवाला लेन-देन से जुड़े सबूत मिले हैं. एजेंसी ने आरोप लगाया कि मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी PMLA के तहत अपराध से जुड़ी जानकारी सामने आई है.
- याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की थी कि आरोपों की जांच के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम यानी PC Act के तहत FIR दर्ज की जाए. हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब इस मामले में आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी. आरोपियों की जिम्मेदारी और कथित लेन-देन की प्रकृति जांच के नतीजों से ही स्पष्ट होगी.
ED ने केरल के DGP को क्यों लिखी थी चिट्ठी?
ED ने 19 अगस्त को जारी प्रेस रिलीज में कहा था कि उसने मामले में करोड़ों रुपए के हवाला लेन-देन से जुड़े सबूत जुटाए हैं. इसके बाद 7 सितंबर को एजेंसी ने केरल के पुलिस महानिदेशक यानी DGP को पत्र भेजा. इसमें पिनाराई विजयन और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज करने का अनुरोध किया गया था. ED और याचिकाकर्ता का कहना था कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर पुलिस को बिना देरी के मामला दर्ज करना चाहिए था. उनका तर्क था कि शुरुआती जांच की जरूरत नहीं थी. इस मुद्दे पर अदालत में कानूनी बहस हुई और फिर फैसला सुरक्षित रख लिया गया था.
राज्य सरकार ने शुरुआती जांच का रास्ता क्यों चुना?
- ED के पत्र के बाद राज्य के गृह सचिव ने DGP को मामला क्राइम ब्रांच को सौंपने और शुरुआती जांच के लिए विशेष जांच टीम बनाने का निर्देश दिया था. याचिका में इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए. याचिकाकर्ता ने कहा कि सरकार ने एडवोकेट जनरल, एडिशनल एडवोकेट जनरल और डायरेक्टर जनरल ऑफ प्रॉसिक्यूशन से कानूनी राय मांगी थी. याचिका के मुताबिक इन अधिकारियों ने तुरंत FIR दर्ज करने की सलाह दी थी. इसके बावजूद सरकार ने शुरुआती जांच का आदेश दिया.
- याचिकाकर्ता ने विशेष जांच टीम के गठन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए. उसका दावा था कि टीम में विजिलेंस विभाग का कोई सदस्य शामिल नहीं था और इसके गठन के लिए जरूरी सरकारी प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ.
- हाईकोर्ट के आदेश के बाद FIR दर्ज करने और जांच आगे बढ़ाने की प्रक्रिया अहम होगी. जांच एजेंसियों को आरोपों से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों की पड़ताल करनी होगी. इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन लोगों की क्या भूमिका थी और क्या किसी कानून का उल्लंघन हुआ है.
- इस मामले का राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है क्योंकि पिनाराई विजयन केरल के पूर्व मुख्यमंत्री हैं और राज्य की राजनीति में उनका अहम स्थान है. लेकिन फिलहाल कानूनी तौर पर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आरोपों की जांच निष्पक्ष तरीके से हो और आगे की कार्रवाई सबूतों के आधार पर की जाए.