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Harish Rawat News : चुनाव नजदीक हैं और हरीश रावत चर्चा के केंद्र में हैं. बीजेपी मानती है कि कांग्रेस में हरीश रावत की सक्रियता बनी रहनी चाहिए. मगर, क्यों? आइए इस सवाल का जवाब समझने की कोशिश करते हैं.
हरीश रावत.
देहरादून : कांग्रेस चाहे या न चाहे, लेकिन बीजेपी जरूर चाहती है कि हरीश रावत कांग्रेस की सियासत के केंद्र में बने रहें. सवाल है कि आखिर बीजेपी की इस चाहत की वजह क्या है? दरअसल, इसके पीछे कांग्रेस का अतीत और बीजेपी का चुनावी नैरेटिव, दोनों जुड़े हैं. पढ़िए ये खास रिपोर्ट.
उत्तराखंड में बीजेपी पिछले 10 साल से लगातार सत्ता में है. कांग्रेस भी 10 साल सत्ता में रही, लेकिन आज उसके पुराने शासन का सबसे बड़ा चेहरा हरीश रावत ही हैं. पूर्व सीएम नारायण दत्त तिवारी अब नहीं रहे और विजय बहुगुणा बीजेपी में चले गए. लिहाजा कांग्रेस के पिछले कार्यकाल को चुनावी मुद्दा बनाने के लिए बीजेपी के पास हरीश रावत ही सबसे बड़ा सियासी संदर्भ हैं. उनके मुख्यमंत्री रहते ढाई साल के कार्यकाल के फैसले, विवाद और आरोप बीजेपी को कांग्रेस के खिलाफ नैरेटिव गढ़ने का मौका देते हैं. लिहाजा, हरीश रावत जितने सक्रिय होंगे, बीजेपी के पास कांग्रेस के अतीत को मौजूदा चुनाव से जोड़ने का उतना ही बड़ा मौका होगा.
2022 का चुनाव भी इसकी मिसाल है. मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मुद्दे पर बीजेपी ने हरीश रावत को जिस तरह निशाने पर लिया, उसने चुनावी नैरेटिव को कांग्रेस के खिलाफ मोड़ने में अहम भूमिका निभाई. कांग्रेस भी इस सियासी गणित को समझती है. उसका तर्क है कि हरीश रावत मास लीडर हैं और बीजेपी उनसे राजनीतिक तौर पर असहज है, इसलिए चुनाव आते ही उन्हें निशाना बनाया जाता है.
एक बार फिर चुनाव नजदीक हैं और हरीश रावत चर्चा के केंद्र में हैं. बीजेपी मानती है कि कांग्रेस में हरीश रावत की सक्रियता जितनी चर्चा में रहेगी, उसके पास कांग्रेस के 10 साल पुराने शासन को चुनावी मुद्दा बनाने का उतना ही बैकअप रहेगा. इसलिए चुनावी साल में सवाल सिर्फ ये नहीं कि कांग्रेस हरीश रावत को कितना महत्व देती है… सवाल ये भी है कि बीजेपी उन्हें कितना महत्व देना चाहती है.