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रेड लेडी पपीते की खेती से किसान तगड़ा मुनाफा कमा रहे हैं. एक पौधे को लगाने में करीब ₹150 की लागत आती है. इससे किसानों को सालाना ₹700 तक का शुद्ध फायदा हो रहा है. कम लागत और बेहतर कमाई के कारण यह खेती किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रही है.
सीतामढ़ीः कृषि क्षेत्र में नए प्रयोग और उन्नत किस्मों की फसलों ने किसानों के लिए कमाई के नए रास्ते खोल दिए हैं. ऐसी ही एक किस्म ‘रेड लेडी’ पपीते की है, जिसकी बाजार में काफी मांग है. इस वैरायटी का फल अंदर से लाल, बेहद मीठा और खाने में बेहद स्वादिष्ट होता है. बाजार में मिलने वाले बड़े आकार के पपीते इसी प्रजाति के होते हैं. इस किस्म के एक ही फल का वजन लगभग दो से तीन किलोग्राम तक होता है, जो इसे व्यावसायिक दृष्टि से बेहद फायदेमंद बनाता है.
लागत, समय और कमाई का गणित
पपीते की इस खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पौधा लगाने के महज 5 से 6 महीने बाद ही फल आने शुरू हो जाते हैं. एक बार लगाया गया पौधा लगभग दो वर्षों तक लगातार फल देता रहता है. अगर आर्थिक लागत की बात करें तो एक पौधे को तैयार करने और उसकी देखरेख में करीब 150 रुपये का खर्च आता है. वहीं, एक पेड़ से साल में तीन से चार बार फल की तुड़ाई करके किसान 600 से 700 रुपये तक की आसानी से कमाई कर सकते हैं.
खेती का तरीका और पौधों की दूरी
इस प्रजाति के पपीते की खेती के लिए खेतों में खास तौर पर बेड तैयार किए जाते हैं. पौधों के सही विकास के लिए लाइन से लाइन की दूरी लगभग 8 फीट रखी जाती है, जबकि एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच की दूरी 7 फीट रखी जाती है. सही दूरी और सही तकनीक से फसल का उत्पादन बेहतर होता है. हालांकि, पारंपरिक फसलों की तुलना में इस पपीते की खेती में थोड़ा अधिक ध्यान देने और देखभाल करने की आवश्यकता होती है.
खाद, सिंचाई और कीट प्रबंधन
रेड लेडी पपीते की अच्छी पैदावार के लिए समय-समय पर एनपीके (NPK) खाद देना बहुत जरूरी होता है. इस किस्म पर मुख्य रूप से वायरस (विषाणु) का हमला होने का खतरा काफी ज्यादा बना रहता है. इसलिए फसल को बीमारियों से बचाने के लिए नियमित रूप से नीम के तेल (Neem Oil) या उपयुक्त कीटनाशकों का छिड़काव करना पड़ता है. सही देखरेख और सही प्रबंधन से किसान पपीते की इस खेती से बेहद शानदार मुनाफा कमा सकते हैं.