SIR को सही ठहराने वाला फैसला वापस ले सुप्रीम कोर्ट; SC के पूर्व जज की डिमांड
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Supreme Court SIR Row: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश वी. गोपाल गौड़ा ने एसआईआर की संवैधानिक वैधता बरकरार रखने वाले शीर्ष अदालत के 27 मई के फैसले को रद्द करने की मांग की है. उन्होंने इस फैसले को गैर-कानूनी, गैर-संवैधानिक और अलोकतांत्रिक बताया. साथ ही निर्वाचन आयोग से संबंधित दस्तावेज मंगाकर यह जांचने की मांग की कि एसआईआर का फैसला दोनों निर्वाचन आयुक्तों की सहमति से लिया गया था या नहीं. उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब एसआईआर को लेकर विपक्ष और न्यायपालिका में बहस जारी है.
एसआईआर पर सियासी घमासान के बीच पूर्व जज की एंट्री, सुप्रीम कोर्ट से की फैसले को पलटने की मांग
Supreme Court SIR Row: एसआईआर विवाद को लेकर सियासी संग्राम है. सड़क से सुप्रीम कोर्ट तक एसआईआर विवाद की गूंज है. सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर हैं, जिसमें एसआईआर को रद्द करने की मांग की जा रही है. इस बीच सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने भी बड़ी मांग कर दी है. पूर्व जज वी. गोपाल गौड़ा ने मांग रखी है कि सुप्रीम कोर्ट एसआईआर के फैसले को वापस ले. उनका मानना है कि यह गैर कानूनी और असंवैधानिक है.
जी हां, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश वी. गोपाल गौड़ा ने बृहस्पतिवार 8 अक्टूबर 2026 को कहा कि निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखने वाले शीर्ष अदालत के फैसले को रद्द किया जाना चाहिए, क्योंकि यह ‘गैर-कानूनी, गैर-संवैधानिक और अलोकतांत्रिक’ है.
पूर्व जज की क्या डिमांड
पूर्व जज गोपाल गौड़ा ने यह भी कहा कि शीर्ष अदालत को निर्वाचन आयोग से सभी दस्तावेज मंगाने चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि एसआईआर का निर्णय दोनों निर्वाचन आयुक्तों की सहमति और मंजूरी से लिया गया था या नहीं.
क्यों अहम यह टिप्पणी
उनकी यह टिप्पणी उसी दिन आई, जब 42 सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के एक समूह ने एसआईआर का बचाव करते हुए इसे ‘कानूनी प्रक्रिया’ बताया था. बता दें कि विपक्ष भी एसईआर को लेकर बवाल काट रहा है. कांग्रेस की अगुवाई में विपक्ष तो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा भी मांग रहा है. इसे लेकर भी सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर हैं.
’27 मई का फैसला गैर कानूनी’
पूर्व जज गौड़ा ने बेंगलुरु में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) द्वारा मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने के विरोध में आयोजित प्रदर्शन में कहा, ‘एसआईआर की संवैधानिक वैधता को सही ठहराने वाला उच्चतम न्यायालय का 27 मई का फैसला गैर-कानूनी और अलोकतांत्रिक है, जिसे तुरंत रद्द किया जाना चाहिए.’
जस्टिस भुइयां की टिप्पणी का समर्थन
उच्चतम न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश उज्जल भुइयां की हालिया टिप्पणी का समर्थन करते हुए न्यायमूर्ति गौड़ा ने कहा कि मतदाताओं को बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित करने के खिलाफ आवाज उठाकर उन्होंने कोई न्यायिक मर्यादा नहीं तोड़ी है. न्यायमूर्ति भुइयां ने रविवार को कहा था कि लाखों नागरिकों को मताधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है.