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success story of Laurent Simons: जिस उम्र में ज्यादातर बच्चे स्कूल की पढ़ाई और परीक्षाओं में व्यस्त होते हैं उस उम्र में बेल्जियम के लॉरेंट सिमंस क्वांटम फिजिक्स में पीएचडी पूरी कर चुके हैं. 15 साल की उम्र में एंटवर्प यूनिवर्सिटी में डॉक्टोरल थीसिस डिफेंड करने के बाद अब 16 साल के लॉरेंट ने अपनी रिसर्च का रुख मेडिकल साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तरफ कर लिया है. आइए जानते हैं कि लॉरेंट कौन हैं?
Success Story, Laurent Simons: लॉरेंट सिमंस क्वांटम फिजिक्स में पीएचडी पूरी कर चुके हैं.
Success Story of Laurent Simons: जिस उम्र में ज्यादातर बच्चे स्कूल की पढ़ाई और परीक्षाओं की तैयारी में लगे होते हैं उस उम्र में बेल्जियम के लॉरेंट सिमंस ने क्वांटम फिजिक्स में डॉक्टरेट की थीसिस पूरी कर ली. महज 15 साल की उम्र में उन्होंने एंटवर्प यूनिवर्सिटी में अपनी पीएचडी थीसिस डिफेंड की. अब 16 साल की उम्र में वह मेडिकल साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मानव शरीर से जुड़े सवालों पर दूसरी डॉक्टरेट की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. उनकी कहानी सिर्फ कम उम्र में डिग्रियां हासिल करने की नहीं, बल्कि अलग-अलग विज्ञान के क्षेत्रों को जोड़कर बड़े सवालों के जवाब तलाशने की है.
चार साल की उम्र में शुरू हुई पढ़ाई
लॉरेंट सिमंस बेल्जियम के रहने वाले हैं और बचपन से ही उनकी सीखने की क्षमता ने लोगों का ध्यान खींचा. उन्होंने सामान्य उम्र से काफी पहले स्कूली शिक्षा पूरी की.एजुकेशन टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक करीब 8 साल की उम्र में उन्होंने हाई स्कूल स्तर की पढ़ाई पूरी कर ली थी. इसके बाद उनका रुझान खास तौर पर फिजिक्स और विज्ञान की तरफ बढ़ता गया. उनकी पढ़ाई की रफ्तार का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने एंटवर्प यूनिवर्सिटी से फिजिक्स में बैचलर डिग्री करीब 11 साल की उम्र में पूरी कर ली थी. इसके बाद 12 साल की उम्र में उन्होंने क्वांटम फिजिक्स में मास्टर डिग्री पूरी की. कुछ रिपोर्टों के मुताबिक तीन साल के बैचलर कोर्स को उन्होंने सामान्य समय से काफी कम करीब 18 महीने में पूरा किया था.
15 साल की उम्र में क्वांटम फिजिक्स में PhD
लॉरेंट की सबसे ज्यादा चर्चा उनकी पीएचडी को लेकर हुई. 17 नवंबर 2025 को उन्होंने एंटवर्प यूनिवर्सिटी में अपनी डॉक्टोरल थीसिस डिफेंड की. उस समय उनकी उम्र सिर्फ 15 साल थी. यूनिवर्सिटी ऑफ एंटवर्प के आधिकारिक रिकॉर्ड में उनकी थीसिस का विषय ‘बोस पोलारॉन्स इन सुपरफ्लुइड्स एंड सुपरसॉलिड्स’दर्ज है. उनके सुपरवाइजर जैक्स टेम्पेरे और मिचियल वाउटर्स थे. इसमें बेहद कम तापमान वाले क्वांटम सिस्टम, बोस-आइंस्टीन कंडेनसेट और पोलारॉन्स जैसे विषयों का अध्ययन किया जाता है. आसान भाषा में कहें तो लॉरेंट का शोध उन स्थितियों को समझने की कोशिश से जुड़ा था जहां पदार्थ बेहद कम तापमान पर सामान्य दुनिया से बिल्कुल अलग तरह का व्यवहार करता है. उनके शोध से जुड़े काम का एक हिस्सा ‘पोलारॉन्स इन सुपरसॉलिड्स’ पर प्रकाशित वैज्ञानिक शोध में भी सामने आया है जिसमें अल्ट्राकोल्ड क्वांटम सिस्टम और डिपोलर सुपरसॉलिड से जुड़े सवालों का अध्ययन किया गया है.