नेहा बोरा को रोककर ट्रोल हुईं नीतू, फटी वर्दी-जख्मों की कहानी अब आई सामने
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Neha Bora Beat Delhi Police Woman Constable: नई दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान नेहा बोरा और महिला कांस्टेबल नीतू के बीच हुई झड़प की वायरल तस्वीर ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. नीतू का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने उनकी वर्दी फाड़ी और उन पर शारीरिक हमला किया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं. सोशल मीडिया पर बिना सच्चाई जाने उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा है और गालियां दी जा रही हैं, जिससे ड्यूटी पर तैनात महिला पुलिसकर्मियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
दिल्ली पुलिस की सिपाही ने अपना दर्द बयां किया.
नई दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड्स पर चढ़ीं नेहा बोरा और उन्हें रोकने की कोशिश कर रही महिला कांस्टेबल नीतू के बीच वह खौफनाक भिड़ंत शुरू हुई, जिसने सोशल मीडिया पर आते ही सनसनी फैला दी. एक तरफ जहां इंटरनेट पर बिना सच जाने गालियों और ट्रोलिंग का सैलाब उमड़ पड़ा, वहीं दूसरी तरफ वर्दी के पीछे छिपी उस खाकीधारी महिला के जिस्म पर पड़े जख्म और चीखें किसी को नहीं दिखीं. नाखूनों के वार से लहूलुहान नीतू का वह दर्दनाक मंजर यह सवाल खड़े कर गया कि आखिर ड्यूटी पर तैनात एक महिला सुरक्षाकर्मी की इज्जत और सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा? न्यूज18 इंडिया की टीम ने कांस्टेबल नीतू से बात की.
सिपाही के दर्द भरी दास्तान किसी ने नहीं सुनी
नई दिल्ली इलाके में एक प्रोटेस्ट के दौरान आउटर दिल्ली के नांगलोई में तैनात महिला कॉन्स्टेबल नीतू की ड्यूटी लगाई गई थी. प्रोटेस्ट के दौरान जब नेहा बोरा अचानक बेरिकेड्स पर चढ़ गईं, तो हालात को कंट्रोल करने और उन्हें नीचे उतारने के लिए कॉन्स्टेबल नीतू भी ऊपर चढ़ीं. बस फिर क्या था, नेहा बोरा ने नीतू की वर्दी का कॉलर पकड़ लिया और सरेआम वर्दी फाड़ डाली. इतना ही नहीं, नाखूनों से भी हमला किया गया, जिससे नीतू के हाथ और पैरों में गंभीर चोटें आईं. घटना के बाद कॉन्स्टेबल नीतू का मेडिकल भी कराया गया, जो इस बात का पक्का सबूत है कि वहां असल में क्या हुआ था.
“क्या हम महिला पुलिसकर्मी इंसान नहीं हैं?”
सोशल मीडिया पर इस वायरल फोटो को आधार बनाकर लगातार कॉन्स्टेबल नीतू को निशाना बनाया जा रहा है और ऑनलाइन ट्रोलिंग का शिकार होना पड़ रहा है. इस पर नीतू का दर्द छलकता है. उनका साफ कहना है कि “अगर प्रोटेस्ट में शामिल होने वाली महिलाएं हैं, तो क्या हम पुलिसकर्मी महिलाएं इंसान नहीं हैं?” ड्यूटी पर तैनात महिला पुलिसकर्मियों को सरेआम गालियां दी जा रही हैं और उनके साथ मारपीट की जा रही है. प्रदर्शनकारियों से उनकी कोई पर्सनल दुश्मनी नहीं है; वे आराम से अपना प्रोटेस्ट करें, इसमें किसी को ऐतराज नहीं है, लेकिन कम से कम खाकी पहनकर अपनी ड्यूटी कर रहे कर्मचारियों को तो चैन से काम करने दिया जाए.
“खाकी का कसूर क्या है?”
रोजाना सोशल मीडिया पर पुलिस के व्यवहार को लेकर बड़े-बड़े ज्ञान बांटे जाते हैं और सारे आरोप पुलिस पर मढ़ दिए जाते हैं. लेकिन सवाल यह उठता है कि जो बदतमीज़ी और हिंसा इन महिला कर्मियों के साथ ऑन-ड्यूटी हो रही है, क्या वो सही है? एक तरफ जहां लोग बिना सोचे-समझे एकतरफा नैरेटिव सेट कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वर्दी के पीछे छिपी एक महिला अपना हक और सम्मान बचाने के लिए संघर्ष कर रही है. जरूरत इस बात की है कि लोग सोशल मीडिया के बहकावे में आकर किसी को जज करने से पहले सच जानें.