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CM Yogi Big Plan for Lucknow : लखनऊ में गोमती नदी के किनारे सुरक्षा बांध बनाने की तैयारी तेज हो गई है. करीब 115 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट को चरणबद्ध तरीके से पूरा करने की योजना है. इससे फैजुल्लागंज, घैला समेत निचले इलाकों को बाढ़ से राहत मिलने की उम्मीद है. परियोजना के पहले चरण में ग्रीन कॉरिडोर से पक्का पुल तक काम होगा, जिस पर करीब 182 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.
लखनऊ को बाढ़ से बचाएंगे सीएम योगी.
लखनऊ : हर किसी को पता है कि इस समय यूपी की राजधानी पानी-पानी हो चुका है. गोमती नदी में आई बाढ़ की वजह से लखनऊ को भारी परेशानी से जूझना पड़ रहा है. फेमल मॉल की बात करें या चाहें इकाना स्टेडियम… इन सब इमारतों के बाहर पानी भर गया है. लोगों के वाहन तक खराब हो जा रहे हैं. ऐसे में योगी सरकार ने अब कमर कस ली है. विनाशकारी बाढ़ से राहत दिलाने के लिए एक विस्तृत सुरक्षा कार्ययोजना तैयार की है. इसके तहत फैजुल्लागंज से लेकर धार्मिक तीर्थस्थल नैमिषारण्य तक करीब 115 किलोमीटर लंबा बाढ़ सुरक्षा तटबंध बनाया जाएगा.
दरअसल, बुधवार को लखनऊ के हाल बेहाल नजर आए. ऐसे में सरकार को जल्द से जल्द राहत दिलाने के लिए कदम उठाने का फैसला लेना ही था. सुरक्षा बांध बनाने में करीब 2 हजार करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च होगी. सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए LDA और सिंचाई विभाग को संयुक्त जिम्मेदारी सौंपी है. दोनों विभागों के इंजीनियरों की टीम मिलकर परियोजना की DPR तैयार करेगी. फिर काम शुरू होगा.
LDA को मुख्य एजेंसी बनाने की योजना
लखनऊ में गोमती नदी के किनारे सुरक्षा बांध बनाने की योजना पर काम तेज करने की तैयारी है. इस परियोजना को स्टेट कैपिटल रीजन (SCR) योजना में शामिल कर चरणबद्ध तरीके से पूरा करने पर विचार किया जा रहा है. पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी और काम में तालमेल के लिए LDA को मुख्य एजेंसी बनाने की योजना है. बजट की शुरुआती रकम और सिंगल-विंडो मंजूरी मिलते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी.
परियोजना को दो हिस्सों में बांटा गया है. पहले चरण में ग्रीन कॉरिडोर से पक्का पुल तक बांध बनाया जाएगा. इसका काम लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) करेगा. इस हिस्से पर करीब 182 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. दूसरे चरण में IIM रोड के पास ग्रीन कॉरिडोर से नैमिषारण्य तक करीब 115 किलोमीटर लंबे नदी किनारे के हिस्से पर काम होगा. इसकी जिम्मेदारी फिलहाल सिंचाई विभाग को दी गई है. विभाग जल्द ही गोमती नदी के बहाव वाले इलाके और जमीन की स्थिति का सर्वे करेगा.
बाढ़ से निचले इलाकों को मिलेगी राहत
सुरक्षा बांध बनने से फैजुल्लागंज, घैला और आसपास के निचले इलाकों को गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर से सुरक्षा मिलने की उम्मीद है. हर साल बाढ़ के दौरान घरों में पानी भरने और लोगों के विस्थापन की समस्या भी कम हो सकती है. बांध के ऊपर 4 से 6 लेन की सड़क बनाने का भी प्रस्ताव है. इसे ग्रीन कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा. इससे IIM रोड, फैजुल्लागंज, पक्का पुल और नैमिषारण्य के बीच आवागमन आसान होगा. इससे धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
जमीन अधिग्रहण और पर्यावरण मंजूरी बड़ी चुनौती
करीब 115 किलोमीटर के इस बड़े प्रोजेक्ट में कई चुनौतियां भी हैं. रास्ते में किसानों की जमीन और आबादी आने पर जमीन अधिग्रहण करना होगा. प्रभावित लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था भी करनी होगी. इसके अलावा नदी के फ्लड-प्लेन में बदलाव और पेड़ों की कटाई की स्थिति में वन और पर्यावरण विभाग से जरूरी मंजूरी लेनी होगी. बांध बनने के बाद उसके रखरखाव और सुरक्षा के लिए लगातार बजट की भी जरूरत होगी. साथ ही नदी के दूसरे किनारे पर भी बांध बनाने की मांग उठ सकती है, जिसे लेकर सरकार को आगे की योजना तैयार करनी होगी.