नॉमिनी की मृत्यु खाताधारक से पहले हो गई तो क्या होगा, बैंक के इस नियम को जान लें, वरना होगी मुसीबत

नॉमिनी की मृत्यु खाताधारक से पहले हो गई तो क्या होगा, बैंक के इस नियम को जान लें, वरना होगी मुसीबत


बैंक अकाउंट में नॉमिनी का नाम दर्ज करते समय ज्यादातर लोग सिर्फ यह सोचते हैं कि उनके बाद पैसा किसे मिलेगा. लेकिन असली परेशानी तब सामने आ सकती है, जब जिस व्यक्ति को नॉमिनी बनाया गया है, उसकी मौत खाताधारक से पहले ही हो जाए. ऐसे में नॉमिनी का नाम सिर्फ रिकॉर्ड में रहने से काम नहीं चलता है. पैसा किसे मिलेंगे, यह इस बात पर निर्भर करता है कि नॉमिनेशन किस तरीके से किया गया था. नवंबर 2025 से लागू किए नए नियमों ने इस व्यवस्था में कई बदलाव किए हैं.

अब खाताधारक एक बैंक डिपॉजिट के लिए मैक्सिमम चार लोगों को नॉमिनी बना सकता है. वह सभी को हिस्सेदारी दे सकता है या फिर एक तय क्रम (Serial No.) भी रख सकता है. ऐसे में नॉमिनी की मौत होने पर दोनों स्थितियों में पैसे देने का तरीका अलग होगा. इसलिए सिर्फ नॉमिनी बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि वह नॉमिनी आपके बाद मौजूद न हो तो बैंक खाते की रकम पर क्या असर पड़ेगा.

चार नॉमिनी बनाने की सुविधा

नियमों के तहत बैंक डिपॉजिट में अधिकतम चार नॉमिनी बनाए जा सकते हैं. खाताधारक इन्हें दो तरीकों से जोड़ सकता है. पहला तरीका है कि सभी नॉमिनी को एक साथ तय प्रतिशत में हिस्सा दिया जाए. दूसरा तरीका है कि नॉमिनियों का एक क्रम तय किया जाए. यानी पहला नॉमिनी उपलब्ध न होने पर दूसरा और उसके बाद तीसरा व्यक्ति प्रभावी हो. इससे खाताधारक को अपने परिवार के लिए बेहतर तरीके से नॉमिनेशन तय करने का ऑप्शन मिलता है.
लग-अलग हिस्सेदारी वाले नॉमिनेशन में मृत नॉमिनी का हिस्सा बिना प्रभावी नॉमिनी वाला माना जाता है.

नॉमिनी की मृत्यु पहले ही हो जाए तो क्या होगा?

मान लीजिए, आपने नॉमिनी के तौर पर A, B और C के नाम इसी क्रम में दिए हैं. अगर A की मौत खाताधारक से पहले हो जाती है तो B अगला प्रभावी नॉमिनी बन जाएगा. इसके लिए सिर्फ पहले नॉमिनी की मौत के कारण नया नॉमिनेशन करना जरूरी नहीं होगा. बैंक तय किए गए क्रम के आधार पर आगे बढ़ेगा.

लेकिन अगर सभी नॉमिनी को एक साथ अलग-अलग प्रतिशत दिया गया है, तो नियम अलग होंगे. किसी एक नॉमिनी की खाताधारक से पहले मौत होने पर उस व्यक्ति का नॉमिनेशन खत्म हो जाएगा. उसका हिस्सा बाकी नॉमिनियों में अपने आप नहीं जुड़ता. उस हिस्से को ऐसा माना जाएगा, जैसे उसके लिए कोई नॉमिनी मौजूद ही नहीं है.

मृत्य नॉमिनी के परिवार को नहीं मिलता हिस्सा

यह बात समझना सबसे जरूरी है कि अगर नॉमिनी की मौत खाताधारक से पहले हो गई है, तो उस नॉमिनी का हिस्सा सीधे उसके बच्चों, पति-पत्नी या दूसरे कानूनी वारिसों को नहीं मिल जाता. उस हिस्से के लिए बैंक की क्लेम सेटलमेंट प्रोसेस लागू होगा.

अगर कोई प्रभावी नॉमिनी नहीं है, तो खाताधारक की मौत के बाद उसके कानूनी वारिसों को बैंक में जरूरी डॉक्यूमेंट जमा करने पड़ सकते हैं. रकम और मामले की स्थिति के आधार पर बैंक प्रोसेस अलग हो सकता है. विवाद होने पर उत्तराधिकार प्रमाण पत्र, प्रोबेट या कोर्ट के आदेश जैसे डॉक्यूमेंट्स भी मांगे जा सकते हैं.

नॉमिनी का मतलब मालिक होना नहीं

नॉमिनी का काम बैंक से रकम लेने के प्रोसेस को आसान बनाना है. सिर्फ नॉमिनी दर्ज होने से वह जमा पैसे का अंतिम मालिक नहीं बन जाता. रकम पर अंतिम अधिकार किसका होगा, यह लागू उत्तराधिकार कानून और परिवार की कानूनी स्थिति पर निर्भर कर सकता है.

इसलिए नॉमिनी की जानकारी को सिर्फ एक बार भरकर छोड़ना सही नहीं है. परिवार में शादी, मृत्यु या किसी बड़े बदलाव के बाद बैंक अकाउंट का नॉमिनेशन जरूर चेक करें. अगर कोई नॉमिनी पहले ही नहीं रहा है, तो उसका नाम हटाकर नया नॉमिनी जोड़ना बेहतर है. समय पर किया गया यह छोटा बदलाव भविष्य में परिवार को क्लेम से जुड़ी परेशानी और देरी से बचा सकता है.



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