‘बिहार से आकर तेलंगाना को लूट लिया’, CM रेवंत रेड्डी ने KCR को फिर बताया बिहारी, 2023 में भी हुआ था DNA विवाद

‘बिहार से आकर तेलंगाना को लूट लिया’, CM रेवंत रेड्डी ने KCR को फिर बताया बिहारी, 2023 में भी हुआ था DNA विवाद


तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति यानी बीआरएस (BRS) प्रमुख के चंद्रशेखर राव यानी केसीआर (KCR) पर एक बार फिर बिहार का नाम लेकर निशाना साधा है. विधानसभा में बोलते हुए रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया कि केसीआर बिहार से आकर तेलंगाना को लूटने की कोशिश करते रहे. बता दें कि रेवंत रेड्डी का यह बयान ऐसे समय आया है जब उनकी सरकार ने केसीआर के एर्रावली स्थित फार्महाउस से जुड़ी जमीन की जांच शुरू कराई है. करीब 700 एकड़ जमीन के रिकॉर्ड और सरकारी जमीन से जुड़े दावों की पड़ताल के लिए अधिकारियों को 30 दिन का समय दिया गया है.

2023 का ‘बिहारी DNA’ विवाद फिर सामने

रेवंत रेड्डी का केसीआर को बिहार से जोड़ने वाला बयान नया नहीं है. 2023 में विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कहा था कि उनका डीएनए तेलंगाना का है, जबकि केसीआर का डीएनए बिहार का है. उन्होंने केसीआर के पूर्वजों के बिहार से तेलंगाना आने का दावा भी किया था और तेलंगाना डीएनए को बेहतर बताया था. इस बयान के बाद बिहार में भी राजनीतिक विवाद हुआ था और बीजेपी, जेडीयू समेत कई नेताओं ने रेवंत रेड्डी की आलोचना की थी.

अब DNA के साथ जमीन का मुद्दा

अब इस बार रेवंत रेड्डी ने अपने हमले को जमीन के आरोपों से जोड़ दिया है. मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा कि एर्रावली स्थित केसीआर के फार्महाउस से जुड़ी करीब 700 एकड़ जमीन की जांच होनी चाहिए. उनका दावा है कि इसमें 388 एकड़ सरकारी जमीन है. उन्होंने राजस्व विभाग और जिला कलेक्टर को नोटिस जारी कर जमीन की वास्तविक खरीद, कब्जे और रिकॉर्ड की जांच करने को कहा है. रेवंत ने आरोप लगाया कि केसीआर ने बिहार से आकर तेलंगाना को लूट लिया.

1 लाख करोड़ के आरोप पर सियासी टकराव

रेवंत रेड्डी ने बीआरएस नेतृत्व, उसके समर्थकों और रिश्तेदारों पर करीब 1 लाख करोड़ रुपये की जमीन कथित तौर पर हड़पने का आरोप भी लगाया है. उन्होंने कहा कि जांच के बाद सच्चाई सामने आएगी. हालांकि, इस मुद्दे पर बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटीआर ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर आरोप सही साबित होते हैं तो उनकी तरफ से संपत्ति देने की बात कही जा सकती है और उन्होंने दोनों परिवारों की संपत्ति की न्यायिक जांच की चुनौती दी है.

BRS का पलटवार और बिहार कनेक्शन

वहीं बीआरएस के नेता रेवंत के इस बयान को तेलंगाना अस्मिता के नाम पर ध्यान भटकाने वाला बता रहे हैं. केसीआर के पूर्वजों का बिहार कनेक्शन पुराना आरोप है. बीआरएस कह रही है कि केसीआर का परिवार कई पीढ़ियों से तेलंगाना में है और यह सब इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है. दूसरी तरफ बीजेपी इस मुद्दे पर मध्यम मार्ग वाली राजनीति कर रही है. दूसरी ओर तेलंगाना में उसे बीआरएस को हराना है तो बिहार में उसे बिहारी स्वाभिमान की रक्षा भी करनी है.

KCR परिवार की जमीन पर अब सरकारी सर्वे

रेवेन्यू अधिकारियों ने एर्रावली में केसीआर के फार्महाउस के आसपास की जमीन का सर्वे शुरू कर दिया है. सरकार का कहना है कि अगर जांच में सरकारी जमीन पर कब्जे की पुष्टि होती है तो उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत वापस लिया जाएगा. रेवंत रेड्डी ने ऐसी जमीन को गरीब परिवारों, खासकर दलितों को देने की बात भी कही है.

सवाल अब बयान से ज्यादा जांच पर

बहरहाल, रेवंत रेड्डी के ‘बिहारी’ वाले हमले ने पुराने विवाद को जरूर फिर जिंदा कर दिया है, लेकिन इस बार राजनीतिक लड़ाई का केंद्र जमीन के रिकॉर्ड हैं. सरकार के आरोप जांच के बाद कितने सही साबित होते हैं और केसीआर परिवार की ओर से इन आरोपों का कानूनी जवाब क्या आता है, यह आगे महत्वपूर्ण होगा. बीआरएस ने फिलहाल आरोपों को खारिज करते हुए निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग रखी है.

क्या है सियासी मतलब?

राजनीति के जानकारों के अनुसार, रेवंत रेड्डी का यह दांव दो तरफा है. एक तरफ वे केसीआर को बाहरी बताकर तेलंगाना सेंटीमेंट को भुनाना चाहते हैं. दूसरी तरफ वे जमीन घोटाले की जांच का डर दिखाकर बीआरएस के आर्थिक साम्राज्य पर चोट करना चाहते हैं. लेकिन बिहार शब्द का बार-बार इस्तेमाल राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है, क्योंकि बिहार इंडिया गठबंधन में कई दल बिहार की पृष्ठभूमि से हैं.



Source link