1 अरब वोल्ट के झटके के बावजूद कैसे बचे इंडिगो के यात्री? प्लेन पर बिजली का असर
Last Updated:
पटना से टेकऑफ करने वाली इंडिगो की फ्लाइट पर आसमान में उड़ान के दौरान ही बिजली गिर गई. उड़ान के दौरान ही 17 हजार फीट की ऊंचाई पर करीब एक अरब वोल्ट की इंटेसिंटी वाली लाइट स्ट्राइक हुई. आखिर प्लेन पर बिजली गिरने के दौरान होता क्या है? क्या पैसेंजर्स पर कोई असर पड़ता है?
विमान पर बिजली गिरी
Lightning Strikes on Flying Plane: आसमान में एक बड़ी घटना होते-होते बची. पटना से अहमदाबाद की तरफ जा रही इंडिगो की फ्लाइट पर बिजली का तगड़ा झटका लगा. फ्लाइट 6E925 हवा में करीब 17 हजार फीट की ऊंचाई पर थी, जब ये बिजली की चपेट में आ गई. इस शक्तिशाली बिजली के झटके की वजह से विमान के आगे की तरफ नोज वाला हिस्सा कोन या रेडोम बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया. हालांकि इसके बावजूद विमान ने लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षित ऐहतियातन लैंडिंग की. उसमें सवार सभी 110 लोग पूरी तरह सुरक्षित रहे. हालांकि सवाल अहम है कि एक अरब वोल्ट का झटका झेल लेने के बावजूद सबकुछ सुरक्षित कैसे रहा? जब प्लेन पर बिजली गिरती है तो ऐसे में क्या होता है?
विमान पर बिजली गिरने का असर
जब किसी विमान पर आसमान से बिजली गिरती है, तो उसकी इंटेन्सिटी एक अरब वोल्ट तक की हो सकती है. यह लाइट स्ट्राइक करने का पैमाना है. इस दुर्घटना में फ्लाइट के अगले हिस्से में रडार को सेफ रखने वाला रेडोम डैमैज हो गया, जिससे ऐसा लगा कि मानो विमान की नाक ही टूट गई हो. इसका नुकसान मुख्य रूप से विमान के अगले हिस्से तक ही लिमिटेड था लेकिन इस भीषण झटके के बावजूद विमान के इंटर्नल सिस्टम और यात्रियों को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा.
फैराडे केज तकनीक कैसे काम करती है?
यह सवाल लाजिमी है कि इतने शक्तिशाली बिजली के झटके के बावजूद भी विमान में बैठे यात्री कैसे सुरक्षित बच गए? इसका वैज्ञानिक जवाब है फैराडे केज का सिद्धांत. अब नए और मॉडर्न विमानों का बाहरी स्ट्रक्चर यानी Fuselage को मुख्य तौर पर एल्युमीनियम और कंडक्टिव मेटल्स से एक ढाल की तरह से बनाया जाता है.
बिजली गिरने का पैसेंजर्स पर क्या असर
जब विमान पर बिजली गिरती है, तो मेटल का ये पिंजरे जैसा स्ट्रक्चर Faraday Cage उस हाई वोल्टेज वाले इलेक्ट्रिकल चार्ज को अपने बाहरी हिस्से से होते हुए सुरक्षित रूप से जमीन या हवा में वापस डिस्चार्ज कर देता है. बिजली का यह करंट विमान के बाहरी हिस्से से ही गुजरता हुआ निकल जाता है. इसके अंदर मौजूद पैसेंजर्स और संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट्स तक नहीं पहुंच पाता है.
विमान की बाहरी बनावट ऐसी होती है कि बिजली को अंदर बैठे यात्रियों से दूर रखने का काम करती है. इसलिए विमान में बैठे पैसेंजर्स को बिजली का झटका नहीं लगता लेकिन तेज चमक और जोर की आवाज जरूर सुनाई देती है. अगर विमान के सिस्टम नॉर्मल हैं, तो वह अपनी उड़ान बनाए रख सकता है. लैंडिंग के बाद तकनीकी जांच जरूरी होती है और नुकसान पर विमान को आगे की उड़ान की इजाजत नहीं दी जाती है.
आसमानी बिजली विमान के नोज या विंगटिप जैसे अगले नुकीले हिस्से से टकराती है और बाहरी हिस्से से होकर गुजरते हुए टेल से बाहर निकल जाती है. आसमान में जो बिजली कड़कती हुई दिखती है, उसमें 100 करोड़ वोल्ट तक की एनर्जी रहती है. यह अरबों वॉट पावर के समान हो सकती है. बिजली गिरने पर आसपास की हवा का तापमान 20 से 30 हजार सेल्सियस तक गर्म हो सकता है.
एविएशन सिक्यॉरिटी और SOP
कॉमर्शियल फ्लाइट्स को इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि वो गंभीर मौसम और बिजली के झटको को सुरक्षित रूप से झेल सके. एविएशन एक्सपर्ट्स के अनुसार उड़ान के दौरान बिजली गिरना असामान्य घटना नहीं है, लेकिन मॉडर्न इंजिनियरिंग की वजह से ये सुरक्षित रहते हैं. सेफ लैंडिंग के बाद विमान को तुरंत ही टेक्निकल जांच के लिए ग्राउंड यानी सेवा से बाहर कर दिया गया.
सिविल एविएशन महानिदेशालय (DGCA) को स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के तहत घटना की सूचना दी गई. इंजीनियर की तरफ से गहन निरीक्षण और जरूरी मरम्मत के बाद तथा रेगुलेटर की मंजूरी मिलने के बाद ही विमान को फिर दोबारा सेवा में शामिल किया जाएगा.