नवरात्रि की विनायक चतुर्थी कब है? सवा दो घंटे मुहूर्त, जानें तारीख, चंद्रोदय
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Navratri Vinayaka Chaturthi 2026 Date: शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन विनायक चतुर्थी व्रत रखते हैं. इस बार विनायक चतुर्थी की पूजा के लिए सवा दो घंटे मुहूर्त है, वहीं 10 घंटे तक चंद्रमा का दर्शन नहीं करना है. इस बार विनायक चतुर्थी पर रवि योग समेत 4 शुभ योग बन रहे हैं.
नवरात्रि की विनायक चतुर्थी 2026 तारीख और मुहूर्त.
Navratri Vinayaka Chaturthi 2026 Date: शारदीय नवरात्रि की विनायक चतुर्थी आश्विन शुक्ल चतुर्थी तिथि को मनाते हैं. गणेश जी का यह व्रत नवरात्रि के तीसरे या चौथे दिन होता है. इसे कपर्दिश विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है. इस विनायक चतुर्थी के दिन गणेश जी की पूजा के लिए आपको सवा दो घंटे का शुभ मुहूर्त प्राप्त होगा, लेकिन इस दिन 10 घंटे तक चंद्रमा का दर्शन वर्जित रहेगा क्योंकि विनायक चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखने से झूठा कलंक लगता है. विनायक चतुर्थी पर भद्रा दोपहर में लग रही है, तब तक आप पूजा कर लेंगे. पंचांग से जानते हैं नवरात्रि की विनायक चतुर्थी की तारीख, मुहूर्त, चंद्रोदय और भद्रा समय के बारे में.
नवरात्रि की विनायक चतुर्थी 2026 तारीख
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल 13 अक्टूबर को रात 11 बजकर 27 मिनट पर आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का प्रारंभ होगा. यह तिथि 15 अक्टूबर को देर रात 1 बजकर 13 मिनट तक मान्य रहेगी. लेकिन उदयातिथि के आधार पर नवरात्रि की विनायक चतुर्थी 14 अक्टूबर बुधवार को है. उस दिन व्रत और गणेश पूजा की जाएगी.
विनायक चतुर्थी 2026 मुहूर्त
इस बार नवरात्रि में विनायक चतुर्थी की पूजा के लिए भक्तों को 2 घंटे 18 मिनट का शुभ मुहूर्त प्राप्त होगा. उस दिन आप सुबह में 10 बजकर 58 मिनट से पूजा कर सकते हैं. पूजन मुहूर्त दोपहर में 1 बजकर 16 मिनट पर खत्म हो जाएगा. इस दिन पूजा के समय आपको शुभ-उत्तम मुहूर्त 10 बजकर 40 मिनट से दोपहर 12 बजकर 7 मिनट तक रहेगा.
विनायक चतुर्थी पर भद्रा का समय
इस बार की विनायक चतुर्थी पर भद्रा का साया रहेगा लेकिन उसका वास स्वर्ग में होगा. भद्रा दोपहर में 12 बजकर 16 मिनट पर लगेगी और 15 अक्टूबर को देर रात 01 बजकर 13 ए एम तक रहेगी. ऐसी मान्यता है कि स्वर्ग की भद्रा का दुष्प्रभाव धरती पर नहीं होता है.
विनायक चतुर्थी पर 10 घंटे नहीं देखना चंद्रमा
विनायक चतुर्थी के अवसर पर चंद्रोदय सुबह में 09 बजकर 49 मिनट पर होगा और उसका समापन शाम को 07 बजकर 57 मिनट पर होना है. ऐसे में आप 10 घंटे तक चंद्रमा का दर्शन न करें. भगवान श्रीकृष्ण ने चतुर्थी का चांद देखा था तो उन पर मणि चोरी करने का झूठा कलंक लगा था.
4 शुभ योग में होगी पूजा
विनायक चतुर्थी के दिन पूरे समय रवि योग बना है. उस दिन रवि योग सुबह में 06:21 ए एम से बनेगा और अगले दिन 15 अक्टूबर को 04:03 ए एम तक रहेगा. इसके अलावा सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग भी रवि योग के साथ ही बनेंगे और खत्म होंगे. इनके अलावा आयुष्मान् योग प्रात:काल से लेकर रात 08:39 पी एम तक रहेगा. इन सभी शुभ योग में आप कोई भी नया काम कर सकते हैं.
विनायक चतुर्थी का महत्व
विनायक चतुर्थी का व्रत और गणेश पूजा करने से संकट और कष्ट मिटते हैं. गणेश जी की कृपा से रोग और दोष का नाश होता है. कार्यों में सफलता मिलती है और जीवन में सुख, समृद्धि, शुभता और शांति आती है.