Last Updated:
Houthi VS Saudi Arabia: सऊदी अरब और यमन के हूतियों के बीच शुरू हुई जंग लगातार बढ़ती दिख रही है. मक्का पैक्ट को एक्टिव कर दिया गया है. वहीं पाकिस्तान ने भी कबूल कर लिया है कि उसने अपनी सेना और एयर डिफेंस समेत एयरफोर्स को सऊदी में तैनात किया है. खास बात है कि सऊदी ने सीरिया से भी मदद मांगी है.
यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब में जंग चल रही है.
Pakistan Army In Saudi: यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच लड़ाई तेज हो गई है. सऊदी अरब के एयरपोर्ट और दूसरी जगहों पर मिसाइल और ड्रोन हमले हुए हैं, जो दिखाता है कि बात अब हद से ज्यादा बढ़ गई है. इसी बीच पाकिस्तान भी मैदान में उतर गया है. इस युद्ध के शुरू होने के बाद पाकिस्तानी सेना ने पहली बार कबूल किया है कि उसके सैनिक सऊदी अरब में तैनात हैं. वह अलग-अलग भूमिकाओं को निभा रहे हैं. इससे पहले खबर आई थी कि सऊदी, पाकिस्तान और तुर्की के बीच का मक्का में हुई डिफेंस डील एक्टिव हो गई है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कदम का स्वागत किया है. वहीं सीरिया भी सऊदी की सैन्य मदद करने के विकल्प पर विचार कर रहा है.
पाकिस्तान ने क्या कहा?
पाकिस्तान के सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने CNN से बातचीत में कहा कि पाकिस्तानी सेना के जवान सऊदी अरब में पहले से मौजूद हैं. उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी सैनिक कई दशकों से सऊदी सेना के साथ अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि मक्का डिफेंस पैक्ट अचानक नहीं बना है, बल्कि पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच लंबे समय से डिप्लोमैटिक, पॉलिटिकल और सैन्य संबंध हैं. पाकिस्तान के मुताबिक, पिछले साल सितंबर में हुए द्विपक्षीय समझौते के तहत करीब 8,000 पाकिस्तानी सैनिक, एयरफोर्स का एक लड़ाकू विमान स्क्वाड्रन और एयर डिफेंस सिस्टम सऊदी अरब भेजी गई थीं.
सऊदी में हूतियों के हमले तेज
पाकिस्तान का यह कबूलनामा ऐसे समय आया है जब यमन के हूतियों और सऊदी अरब के बीच युद्ध फिर तेज हो गया है. सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, दो अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर हुए हमलों में 3 लोगों की मौत और 36 लोग घायल हुए. हमले रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और अबहा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को टार्गेट कर किया गया. हूतियों के सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने दावा किया कि किंग खालिद एयरपोर्ट पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया गया. वहीं सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने दावा किया कि मिसाइल को रोक दिया गया और जहां से वह लॉन्च की गई थी, वहां हमला कर प्लेटफॉर्म को नष्ट कर दिया गया. इससे पहले हूतियों ने एयरलाइन कंपनियों को चेतावनी दी थी वह सऊदी एयरस्पेस में आने से बचें.
मक्का रक्षा समझौता अब क्यों अहम?
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने अगस्त में मक्का रक्षा समझौता किया था. इसके तहत एक देश पर हमला बाकी दोनों देशों पर भी अटैक की तरह माना जाएगा. 5 अक्टूबर को रियाद में इस समझौते की रणनीतिक, राजनीतिक और रक्षा समिति की मीटिंग हुई. इसमें सऊदी अरब के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन हमलों को लेकर चर्चा हुई. बैठक में तीनों देशों ने सऊदी अरब की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर हमलों को खारिज किया. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इस समझौते के तहत जरूरत पड़ने पर सेना को तेजी से सऊदी अरब में तैनात किया जा सकता है.
ट्रंप क्यों खुश हैं?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब की मदद के लिए पाकिस्तान और तुर्की की सैन्य भूमिका का स्वागत किया है. व्हाइट हाउस में पत्रकारों ने जब उनसे मक्का रक्षा समझौते के तहत सऊदी अरब को सैन्य मदद देने को लेकर सवाल पूछा, तो ट्रंप ने कहा कि अगर वे सऊदी अरब की मदद करना चाहते हैं तो यह अच्छी बात है. तुर्की सरकार जल्द ही इस रक्षा समझौते को संसद के सामने रखने की तैयारी कर रही है. इसके बाद ही तुर्की के सैनिकों की संभावित तैनाती का रास्ता भी खुल सकता है.
सऊदी अरब ने सीरिया से मांगी मदद?
सऊदी अरब की मदद के लिए अब सीरिया भी सोच रहा है. अमेरिकी और सीरियाई अधिकारियों के मुताबिक, सीरिया सऊदी अरब को रक्षात्मक मदद देने से लेकर हूतियों के खिलाफ सैनिक भेजने तक के विकल्पों पर विचार कर रहा है. एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, सऊदी अरब ने सीरिया से सैन्य बल भेजने का अनुरोध किया है. हालांकि सीरिया ने अभी कोई अंतिम फैसला घोषित नहीं किया है. सीरियाई राजनयिक ने कहा कि उनका देश हूती हमलों के सामने सऊदी अरब के साथ मजबूती से खड़ा है, लेकिन फिलहाल सीरिया का मुख्य ध्यान अपने घरेलू मुद्दों और गृहयुद्ध के बाद देश को संभालने पर है.