यह मंदिर नई गाड़ियों की पहली पूजा के लिए है फेमस, मां कालरात्रि हैं विराजमान
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पलामू के मेदिनीनगर स्थित दक्षिणेश्वर काली मंदिर में मां कालरात्रि की पूजा होती है. यह मंदिर नई गाड़ियों की पहली पूजा के लिए काफी प्रसिद्ध है. यहां झारखंड के अलावा बिहार और यूपी से भी श्रद्धालु आते हैं. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है.
पलामूः नवरात्रि का पावन अवसर आ रहा है. मंदिरों में आस्था केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह पौराणिक मान्यताओं, विश्वास और श्रद्धा का संगम होती है. नवरात्रि के दौरान मां शक्ति की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है. पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर के रेड़मा चौक के पास भगवती भवन परिसर में स्थित दक्षिणेश्वर काली मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होती है. नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होती है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.
मां कालरात्रि के रूप में होती है पूजा
मंदिर के पुजारी श्याम बाबा ने बताया कि यहां मां काली को मां कालरात्रि के स्वरूप में पूजा जाता है. नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में सातवें स्वरूप को कालरात्रि कहा जाता है, जिनका एक नाम शुभंकरी भी है. मान्यता है कि मां शुभंकरी के दर्शन और पूजा से भक्तों के कार्य शुभ होते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. यही वजह है कि नवरात्रि के अलावा वर्षभर श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं.
नई गाड़ियों की होती है पहली पूजा
आगे कहा कि इस मंदिर की सबसे खास परंपराओं में नई गाड़ियों की पूजा भी शामिल है. इलाके में नई गाड़ी खरीदने वाले लोग उसे लेकर मंदिर पहुंचते हैं और विधि-विधान से पूजा कराते हैं. पलामू के अलावा गढ़वा, लातेहार और आसपास के जिलों से भी लोग नई गाड़ियों के साथ यहां पहुंचते हैं. श्रद्धालु इसे नई शुरुआत से पहले मां का आशीर्वाद लेने की परंपरा मानते हैं.
61 साल पुराना है मंदिर
मंदिर के पुजारी शिबुल बाबा के अनुसार मां दक्षिणेश्वर काली की स्थापना वर्ष 1965 में हुई थी. इस लिहाज से मंदिर करीब 61 साल पुराना है. समय के साथ यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई और मंदिर परिसर का विस्तार होता गया. वर्ष 1978 में स्थानीय निवासी पप्पू सहानी ने मंदिर का विस्तार कराया. इसी दौरान परिसर में द्वादश ज्योतिर्लिंग, राधा-कृष्ण दरबार, शीतला माता, भगवान शंकर-पार्वती और हनुमान जी की प्रतिमाएं स्थापित की गईं.
दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु
मंदिर में केवल पलामू के लोग ही नहीं, बल्कि झारखंड के अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं. पुजारी के अनुसार रांची, पटना और दिल्ली समेत कई स्थानों से भक्त यहां आकर मां का आशीर्वाद लेते हैं. सावन और नवरात्रि के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है.
नवरात्रि में विशेष पूजा और भंडारा
नवरात्रि के दौरान मां की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का भी आयोजन किया जाता है. सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक और शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक मंदिर का पट खुला रहता है. मंदिर के बाहर पूजा सामग्री की दुकानें भी हैं, जहां श्रद्धालु आसानी से पूजा की सामग्री खरीद सकते हैं. मंदिर की वर्षों पुरानी परंपरा, मां कालरात्रि का स्वरूप और मनोकामना पूरी होने की मान्यता इसे पलामू के प्रमुख आस्था स्थलों में शामिल करती है.