पापा Pwd इंजीनियर, बेटे ने MBA कर रखा एक्टिंग में कदम, हीरो से बना विलेन, फिर 2,460 करोड़ी फिल्म ने मचाया गदर

पापा Pwd इंजीनियर, बेटे ने MBA कर रखा एक्टिंग में कदम, हीरो से बना विलेन, फिर 2,460 करोड़ी फिल्म ने मचाया गदर


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Actor: MBA की पढ़ाई की, लेकिन नौकरी करने के बजाय कैमरे के सामने किस्मत आजमाने निकल पड़े. टीवी पर हीरो बनकर छाए और फिर फिल्मों में खलनायक बनकर अपनी अलग पहचान बनाई. मगर इस एक्टर की आवाज ने जो कमाल किया, वो कहानी और भी दिलचस्प है. 2,460 करोड़ कमाने वाली एक ब्लॉकबस्टर में पर्दे पर चेहरा किसी और का था, लेकिन आवाज इनकी थी. जानते हैं ये कौन हैं?

नई दिल्ली. पिता सरकारी नौकरी में थे और बेटा पढ़ाई पूरी कर एमबीए की डिग्री लेकर कॉर्पोरेट दुनिया में जा सकता था. लेकिन दिल कॉर्पोरेट नौकरी में नहीं, कैमरे के सामने बसता था. एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा तो हीरो बनकर पहचान मिली. टीवी पर छाए तो अपनी पर्सनैलिटी और दमदार अभिनय से घर-घर में पहचान बना ली. हीरो से विलेन बने और ऐसे किरदार निभाए कि दर्शकों ने उन्हें एक नए अंदाज में पहचानना शुरू कर दिया. लेकिन उनकी असली ताकत सिर्फ चेहरा नहीं, आवाज भी थी. इतनी दमदार कि जब पर्दे पर किसी और का किरदार दिखा, तब भी उसकी आवाज ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ दी. करीब 2,460 करोड़ रुपये की कमाई करने वाली फिल्म में उनकी आवाज ने ऐसा जादू चलाया कि किरदार और आवाज एक-दूसरे की पहचान बन गए. आज 50वां जन्मदिन मना रहे हैं ये एक्टर हैं शरद केलकर. फोटो साभार-@sharadkelkar/Instagram

भारतीय मनोरंजन जगत में शरद केलकर एक ऐसा नाम है जो दमदार आवाज और बहुमुखी एक्टिंग के लिए जाने जाते हैं. 7 अक्टूबर 1976 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में जन्मे शरद ने धारावाहिक से अपने करियर की शुरुआत की थी. शरद केलकर का नाम एक्टिंग की दुनिया में तो है ही लेकिन उनकी आवाज आज देश की नंबर 1 फिल्म ‘बाहुबली 2’ के नाम है. आपको जानकर हैरानी होगी कि एक ऐसा भी समय था जब वो काफी हकलाते थे. फोटो साभार-@sharadkelkar/Instagram

शरद केलकर का जन्म एक मराठी परिवार में हुआ और उनका पालन-पोषण ग्वालियर में हुआ. उनके पिता मध्य प्रदेश सरकार में पीडब्ल्यूडी इंजीनियर थे. केलकर ने एमबीए के बाद शरद ने मुंबई की चकाचौंध वाली दुनिया में कदम रखा. 2004 में केलकर ने दूरदर्शन पर प्रसारित शो आक्रोश से टेलीविजन में पदार्पण किया, जिसमें उन्होंने इंस्पेक्टर सचिन कुलकर्णी की भूमिका निभाई. फोटो साभार-@sharadkelkar/Instagram

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हालांकि, केलकर को ‘सिंदूर तेरे नाम का’ और ‘सात फेरे’ जैसे धारावाहिक से असली पहचान मिली. 2009 में ‘बैरी पिया’ में ठाकुर दिग्विजय सिंह भदौरिया का किरदार निभाकर वह प्रसिद्ध हुए. इस किरदार के लिए केलकर को 2010 के गोल्ड अवॉर्ड्स में बेस्ट निगेटिव एक्टर का खिताब मिला. शरद केलकर ने ‘रॉक-एन-रोल फैमिली’ और ‘पति पत्नी और वो’ जैसे कई शो भी होस्ट कर चुके हैं. 2011 में ‘उतरन’ में सात्या का ग्रे शेड वाला रोल निभाकर उन्होंने साबित किया कि वह हर रोल में फिट हो सकते हैं. फोटो साभार-@sharadkelkar/Instagram

शरद केलकर की फिल्मी दुनिया में एंट्री 2013 में हुई. केलकर को संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘गोलियों की रासलीला रामलीला’ में एक भूमिका की पेशकश की गई, जहां उन्होंने एक अधिकार जताने वाले बड़े भाई का किरदार निभाया. इसके बाद 2014 की मराठी ब्लॉकबस्टर ‘लई भारी’ में खलनायक संगम के रोल निभाकर मराठी सिनेमा के चहेते बन गए. फोटो साभार-@sharadkelkar/Instagram

बॉलीवुड में ‘हाउसफुल 4’ के सूर्यभान माइकल भाई ने कॉमेडी का जलवा बिखेरा, तो ‘तान्हाजी: द अनसंग वॉरियर’ में छत्रपति शिवाजी महाराज का दमदार रोल निभाया. इसके अलावा, अक्षय कुमार की फिल्म ‘लक्ष्मी’ में लक्ष्मी के रोल में अद्भुत क्षमता दिखाई. केलकर ने हिंदी, मराठी के अलावा तमिल और तेलगु फिल्मों में भी अपने अभिनय की छाप छोड़ी है. कभी हकलाने वाले शरद केलकर एक बेहतरीन वॉयसओवर आर्टिस्ट भी हैं. उनके वॉयसओवर का मैजिक ‘बाहुबली’ सीरीज, हॉलीवुड और साउथ की कई फिल्मों में दिखाई देता है. फोटो साभार-@sharadkelkar/Instagram

एक इंटरव्यू में शरद केलकर ने बताया था कि बचपन में हकलाने की वजह से उन्हें बेरहमी से तंग किया जाता था. अब, मैं एक ऐसे पेशे में हूं जिसमें मुझे अपनी बोलने की कला का इस्तेमाल करना पड़ता है. मैं हकलाता था, इसलिए अभिनय मेरे लिए एक दूर की बात थी. मैं बहुत हकलाता था, इसलिए अस्वीकृतियां मुझे निराश करती थीं. हालांकि, इसने मुझे मजबूत बनाया, इसने मुझे अपनी कमियों को सुधारने की ताकत दी. हकलाना एक समस्या थी, इसलिए मैंने इससे छुटकारा पाया. हकलाने से छुटकारा पाने में मुझे दो साल लगे.’ फोटो साभार-@sharadkelkar/Instagram

एक अलग इंटरव्यू में केलकर ने बताया था कि एक आर्टिस्ट अपनी डबिंग से अपनी परफॉर्मेंस अच्छी भी कर सकता है और बुरी भी. जब मैं टीवी किया करता था, तब तो डबिंग करने का वक्त ही नहीं मिलता था. जब मैंने आवाज और डबिंग की अहमियत को जाना तो मुझे लगा कि ये मेरे लिए जरूरी है. इसके बाद मैंने बाकायदा डबिंग की ट्रेनिंग ली. दिलचस्प बात यह है कि ‘तान्हाजी: द अनसंग वॉरियर’ में छत्रपति शिवाजी महाराज के किरदार को पर्दे पर उतारने के लिए शरद केलकर को सिर्फ चार दिनों का समय मिला था. इतने कम समय में उन्होंने महाराज की गरिमा, शौर्य और शालीनता को आत्मसात किया, जो फिल्म में दिखाई दिया. फोटो साभार-@sharadkelkar/Instagram

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