एक वक्त था जब गांव में बैंक का काम हो तो पूरा दिन निकल जाता था. पक्के घर का सपना अलग था, पानी के लिए दूर जाना पड़ता था और अस्पताल का बड़ा बिल पूरे परिवार को कर्ज में डाल सकता था. अब तस्वीर के कई हिस्से बदले हैं. कहीं घर पहुंचा, कहीं नल, कहीं गैस, कहीं बैंक खाता और कहीं मोबाइल से चंद सेकंड में पैसा. 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद ये बदलाव कुछ ऐसे हैं, जिन्होंने आम लोगों की जिंदगी में बड़ा बदलाव लाया है. इनका असर जमीन पर दिखता है. हम आपको ऐसे ही 12 फैसलों के बारे में बताने जा रहे हैं.
डिजिटल इंडिया को सिर्फ इंटरनेट की योजना समझना भूल होगी. इसका असर बैंकिंग, सरकारी कागज, पैसे भेजने और सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे खाते में पहुंचने तक है. जून 2026 तक 2.21 लाख ग्राम पंचायतें भारतनेट से सर्विस-रेडी थीं. 5.01 लाख कॉमन सर्विस सेंटर चल रहे थे. यूपीआई ने वित्त वर्ष 2025-26 में 24,162 करोड़ ट्रांजैक्शन किए. यानी औसतन करीब 66 करोड़ भुगतान हर दिन.
जिस परिवार के लिए पक्का घर कभी सपना था, वहां सरकार की आवास योजना का सीधा असर दिखता है. 12 अगस्त 2026 तक प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में 3.91 करोड़ घर मंजूर हो चुके थे और 3.13 करोड़ पूरे हो चुके थे. शहरी योजना में भी 99.25 लाख घर पूरे हो चुके थे. यानी गांव और शहर मिलाकर करोड़ों परिवारों को घर की सुरक्षा मिली है.
गांव के घर में लकड़ी, उपले या दूसरे धुएं वाले ईंधन पर खाना बनाना खासकर महिलाओं के लिए रोज की परेशानी थी. प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने LPG कनेक्शन पहुंचाने पर जोर दिया. मई 2026 तक 10.6 करोड़ से ज्यादा नए LPG कनेक्शन दिए जा चुके थे. मतलब करोड़ों घरों में खाना बनाने का तरीका बदला. अब असली सवाल यह है कि कनेक्शन मिलने के बाद सिलेंडर भरवाना परिवार की जेब पर कितना भारी है.
गांव की जिंदगी में नल का पानी सिर्फ सुविधा नहीं, समय की बचत भी है. जल जीवन मिशन शुरू होने के समय ग्रामीण भारत में सिर्फ 3.23 करोड़ घरों में नल का कनेक्शन था. अगस्त 2026 तक यह संख्या करीब 15.91 करोड़ पहुंच गई. यानी करीब 12.7 करोड़ ग्रामीण घरों को नए नल कनेक्शन मिले. अब कई परिवारों में पानी के लिए रोज दूर जाने की जरूरत पहले के मुकाबले कम हुई है.
गांव के गरीब परिवार के लिए सबसे बड़ा खतरा अक्सर बीमारी का खर्च होता है. आयुष्मान भारत योजना में 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर दिया जाता है. 30 जून 2026 तक योजना के तहत 12.69 करोड़ अस्पताल में भर्ती के मामले अधिकृत हुए और इनका मूल्य करीब 1.92 लाख करोड़ रुपये रहा. 12 अगस्त तक 45.51 करोड़ से ज्यादा आयुष्मान कार्ड जारी हो चुके थे.
पहले गांव के गरीब परिवार के लिए बैंक खाता खुलवाना भी आसान काम नहीं था. जनधन योजना ने बिना बैंक खाते वाले लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने पर जोर दिया. 12 अगस्त 2026 तक करीब 58.90 करोड़ जनधन खाते थे. जुलाई में 58.63 करोड़ खातों में कुल जमा राशि 3.08 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा थी. इनमें 55.74% खाते महिलाओं के नाम थे और करीब 77.8% खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में थे.
किसान को साल में तीन बार 2,000-2,000 रुपये सीधे खाते में मिलते हैं. यानी पात्र किसान परिवार को साल में 6,000 रुपये की मदद. जून 2026 में 23वीं किस्त के तौर पर 9.44 करोड़ किसानों को 18,880 करोड़ रुपये से ज्यादा भेजे गए. योजना शुरू होने से अब तक 4.46 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा बांटे जा चुके थे. यह पैसा बीज, खाद, दवा या खेती के छोटे-मोटे खर्च में काम आ सकता है.
गांव-कस्बे में चाय की दुकान, सिलाई, मरम्मत, छोटी किराना दुकान या कोई दूसरा काम शुरू करना हो तो सबसे बड़ी दिक्कत पैसा जुटाने की होती है. प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत छोटे कारोबारियों को संस्थागत कर्ज देने की व्यवस्था की गई. जून 2026 तक 59.14 करोड़ मुद्रा लोन मंजूर किए जा चुके थे. इनकी कुल राशि 41.71 लाख करोड़ रुपये थी. योजना के तहत अब पात्र कारोबार के लिए कर्ज की सीमा 20 लाख रुपये तक है.
2014 में ग्रामीण स्वच्छता कवरेज 39% बताई गई थी. 2014 से 2019 के बीच 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 10.28 करोड़ से ज्यादा घरेलू शौचालय बनाए गए. 2019 में ग्रामीण भारत को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया गया. अब मिशन का अगला चरण सिर्फ शौचालय बनाने पर नहीं, बल्कि कचरा और गंदे पानी के प्रबंधन पर भी जोर देता है. यानी सफाई का मतलब अब सिर्फ घर का शौचालय नहीं रहा.
बिजली का कनेक्शन आज सामान्य बात लग सकता है, लेकिन करोड़ों घरों के लिए यह हमेशा उपलब्ध नहीं था. सौभाग्य योजना के दौरान देश में 2.86 करोड़ घरों का विद्युतीकरण किया गया. सरकार के मुताबिक मार्च 2019 तक सभी राज्यों ने पहले से चिन्हित इच्छुक बिना बिजली वाले घरों के 100% विद्युतीकरण की सूचना दी. उत्तर प्रदेश में ही योजना के दौरान 91.80 लाख घरों को बिजली कनेक्शन मिला.
घर का राशन बजट गरीब परिवार की सबसे बड़ी जरूरतों में है. प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 81.35 करोड़ से ज्यादा लाभार्थियों को मुफ्त खाद्यान्न दिया जा रहा है. जुलाई 2026 तक देश की 99.8% उचित मूल्य दुकानों को आधार आधारित वितरण के लिए ऑटोमेट किया जा चुका था और राशन कार्ड 100% डिजिटाइज हो चुके थे. वन नेशन वन राशन कार्ड के तहत 221 करोड़ से ज्यादा पोर्टेबिलिटी ट्रांजैक्शन दर्ज हो चुके थे.
रेहड़ी-पटरी वाला छोटा दुकानदार अक्सर बैंक के बजाय महाजन से पैसा लेता था. पीएम स्वनिधि ने शहरी स्ट्रीट वेंडर्स को बिना गारंटी कामकाजी पूंजी का कर्ज देने की व्यवस्था की. अगस्त 2026 तक 78.68 लाख विक्रेताओं को 1.18 करोड़ से ज्यादा लोन मिले, जिनकी रकम 19,171 करोड़ रुपये से अधिक थी. 57.09 लाख विक्रेताओं ने 908 करोड़ से ज्यादा डिजिटल लेन-देन भी किए. यानी कर्ज के साथ डिजिटल भुगतान की आदत भी बढ़ी.