Gold Price Prediction: अभी दबाव में सोना, 2027 में फिर दिखा सकता है दम, HSBC ने बताया बड़ा कारण

Gold Price Prediction: अभी दबाव में सोना, 2027 में फिर दिखा सकता है दम, HSBC ने बताया बड़ा कारण


सोने की कीमतों में इस साल तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद गोल्ड में बड़ी गिरावट आई और अब बाजार की नजर आगे की चाल पर है. HSBC का मानना है कि अगले साल सोने में फिर तेजी लौट सकती है. हालांकि, यह तेजी तुरंत आने की उम्मीद नहीं है. फिलहाल ऊंचे कच्चे तेल के दाम, मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की आशंका सोने के लिए मुश्किलें बढ़ा रही हैं. बैंक ने इसी वजह से अपने शॉर्ट टर्म गोल्ड प्राइस अनुमान में कटौती की है. लेकिन अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व बाजार की मौजूदा उम्मीद से कम दरें बढ़ाता है, तो सोने को फिर से मजबूती मिल सकती है.

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, HSBC के चीफ प्रेशियस मेटल्स एनालिस्ट जेम्स स्टील के मुताबिक, सोना पहले ही एक बेहद उतार-चढ़ाव वाले दौर से गुजर चुका है. 30 जनवरी को कीमत $5,450 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंची थी. इसके बाद 30 जून तक यह गिरकर $3,942 प्रति औंस रह गई. ईरान-यूएस टेंशन, बढ़ती तेल कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और मजबूत डॉलर ने निवेशकों को सोने में अपनी पोजिशन घटाने के लिए मजबूर किया. गर्मियों के बाद निवेशकों की वापसी से कीमतों में सुधार हुआ, लेकिन सितंबर में फेड की दर बढ़ोतरी के बाद यह तेजी टिक नहीं पाई. अब 2027 में सोने की दिशा काफी हद तक अमेरिकी ब्याज दरों पर निर्भर करेगी.

अभी सोने के लिए मुश्किल दौर

शॉर्ट टर्म में सोने पर कई तरफ से दबाव है. कच्चे तेल की कीमतें ऊंची हैं और अमेरिकी डॉलर भी मजबूत बना हुआ है. इसके अलावा बाजार को अमेरिका में आगे और ब्याज दर बढ़ने की आशंका है. आम तौर पर ऊंची ब्याज दरें सोने के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं, क्योंकि निवेशकों के पास ब्याज देने वाले ऑप्शन ज्यादा आकर्षक हो जाते हैं. इसी वजह से HSBC ने अपने नजदीकी समय के अनुमान कम किए हैं. यानी आने वाले महीनों में सोने में उतार-चढ़ाव और दबाव दोनों बने रह सकते हैं.

2027 में ब्याज दरें बन सकती हैं गेमचेंजर

HSBC का लंबी अवधि का नजरिया अभी भी पॉजिटिव है. बैंक का मानना है कि अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व उतनी तेजी से दरें नहीं बढ़ाता, जितनी बाजार उम्मीद कर रहा है, तो सोने में दोबारा तेजी आ सकती है. जेम्स स्टील के मुताबिक, अगर दरों में बढ़ोतरी बाजार की मौजूदा उम्मीद से कम रहती है, तो सोने की कीमतें फिर ऊपर की तरफ अपना संतुलन बना सकती हैं. ऐसे में 2027 में गोल्ड के लिए माहौल बेहतर हो सकता है.

सेंट्रल बैंक और भारत-चीन से मिल रहा सपोर्ट

सोने की कीमतों को एक बड़ा सहारा सेंट्रल बैंकों की खरीद से मिल रहा है. कई सेंट्रल बैंक अपने फॉरेन गोल्ड रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं. इसका मकसद निवेश को अलग-अलग जगह बांटना और जियो-पॉलिटिकल रिस्क से बचाव करना है. इसके अलावा भारत और चीन में वित्तीय संस्थानों के लिए सोना खरीदने के नियमों में बदलाव से बड़े बार की मांग को भी मदद मिल रही है. दोनों देशों में प्रॉपर्टी और शेयर बाजार की कमजोरी के बीच सोना निवेशकों के लिए एक ऑप्शन बन रहा है. गोल्ड ETF में पहले हुई भारी बिकवाली भी अब कुछ कम होती दिख रही है.

ज्वेलरी की मांग कमजोर

सोने की तस्वीर का कमजोर हिस्सा फिजिकल डिमांड है. ऊंची कीमतों के कारण ज्वेलरी की खरीद पर असर पड़ा है. महंगाई और घरेलू बजट पर दबाव के कारण आम ग्राहक बड़ी मात्रा में सोना खरीदने से बच रहे हैं. सिक्कों की मांग भी कमजोर है, हालांकि HSBC को लगता है कि इसमें गिरावट अब निचले स्तर के करीब पहुंच सकती है.

दूसरी तरफ, सोने की सप्लाई तेजी से बढ़ने की उम्मीद नहीं है. 2026 और 2027 में माइन प्रोडक्शन बढ़ सकता है, लेकिन यह बढ़ोतरी सीमित रहने की संभावना है. नई खदानों और प्रोजेक्ट्स को शुरू करना आसान नहीं है. ऊंची कीमतों के बावजूद रिसाइक्लिंग भी अभी उतनी तेजी से नहीं बढ़ी है, हालांकि आगे इसमें बढ़ोतरी हो सकती है. आने वाले महीनों में सोने के लिए डॉलर, तेल और अमेरिकी ब्याज दरें चुनौती बनी रह सकती हैं.



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