ISI की जासूसी का अड्डा कैसे बना विशाखापत्तनम… 7 साल में 9 को सजा.. अब फिर हनीट्रैप हुए नेवी जवान

ISI की जासूसी का अड्डा कैसे बना विशाखापत्तनम… 7 साल में 9 को सजा.. अब फिर हनीट्रैप हुए नेवी जवान


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ISI की जासूसी का अड्डा बना विशाखापत्तनम, 7 साल में 9 को सजा, अब फिर हनीट्रैप

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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी विशाखापत्तनम को जासूसी का अड्डा बनाने की कोशिश में है. दरअसल रणनीतिक तौर पर भारत के लिए बेहद अहम शहर है. यहीं पर भारत के ईस्टर्न नेवल कमांड का मुख्यालय है. भविष्य में यहीं पर परमाणु पनडुब्बी केंद्र भी बनाया जाना प्रस्तावित है. 2019 से लेकर अब तक यहां जासूसी के कई मामले सामने आ चुके हैं. एक बार फिर जांच एजेंसियों की रडार पर 18 लोग आए हैं, जिन पर जासूसी करने का शक है.

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विशाखापत्तम स्थित ईस्टर्न नेवल कमांड का मुख्यालय (फोटो: इंडियन नेवी)

पाकिस्तान की ISI अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही है. खुफिया एजेंसी के ऑपरेटिव लगातार भारत के नेवी जवानों को हनीट्रैप करने की कोशिश कर रहे हैं. खासतौर से विशाखापत्तनम को निशाना बनाया जा रहा है. पिछले 7 साल में यहां 9 लोगों को पाकिस्तान को गोपनीय सूचनाएं देने के आरोप में सजा भी हो चुकी है. अब एक बार फिर आंध्रप्रदेश की काउंटर इंटेलीजेंस यूनिट ने कथित जासूसी नेटवर्क की जांच शुरू की है. इस बार जांच के दायरे में 18 लोग हैं. इनमें से 12 नेवी जवान हैं. इसके अलावा भी 10 राज्यों में अलग से तलाशी अभियान चलाया जा रहा है. इसे ऑपरेशन फायरवॉल नाम दिया गया है.

विशाखापत्तनम भारत के ईस्टर्न नेवल कमांड का मुख्यालय है. यह रणनीतिक तौर भारतीय नौसेना का बेहद अहम सेंटर माना जाता है. यहां जासूसी का सबसे बड़ा मामला 2019 में सामने आया था जब नौसेना के जहाजों और पनडुब्बियों से जुड़ी संवेदनशील सूचनाओं के लीक होने की जानकारी सामने आई थी. तब से लेकर अब तक जासूसी के अलग-अलग मामलों में 9 लोगों को सजा दी जा चुकी है. अब फिर जांच एजेंसियां ये पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इस केंद्र से पाकिस्तान तक गोपनीय जानकारियां पहुंचाई गईं या नहीं. TOI की एक रिपोर्ट के मुताबिक यहां कुछ संदिग्धों से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए गए हैं जिनकी जांच की जा रही है. रिपोर्ट में दो के खिलाफ सबूत मिलने का भी दावा किया गया हैं.

क्या है ऑपरेशन फायरवॉल 2026?

ऑपरेशन फायरवॉल संदिग्ध जासूसों को पकड़ने के लिए चलाया गया अभियान है, जिसमें 12 टीमों को शामिल किया गया है. इसमें संदिग्धों और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों से जुड़े ऑपरेटिव के बीच कथित संबंधों की जांच की जा रही है. इसके अलावा आंध्र प्रदेश, केरल, महाराष्ट्र और कर्नाटक समेत अन्य राज्यों में भी छापेमारी की जा रही है. इस मामले में नौसेना के साथ कांट्रैक्ट पर काम करने वाले एक ड्राइवर को भी पकड़ा गया है, जिस पर पाकिस्तानी ऑपरेटिव को अहम जानकारी देने का आरोप है.

कोयंबटूर से एक नौसैनिक गिरफ्तार

कोयंबटूर से भी एक नौसैनिक प्रदीप मुखर्जी को पकड़ा गया है. 31 साल का यह जवान 2014 में जुड़ा था. कथित तौर पर वह हनीट्रैप का शिकार होने के बाद पाकिस्तानी ऑपरेटिव्स को गोपनीय समुद्री खुफिया जानकारी दे रहा था. उसकी गिरफ्तारी से पहले काउंटर इंटेलीजेंस इकाइयों ने कई माह तक संयुक्त अभियान चलाया था. ट्रांजिट रिमांड पर उसे आंध्रप्रदेश लाकर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.

विशाखापत्तनम को क्यों है अहम?

विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना के ईस्टर्न नेवल कमांड का मुख्यालय है. इसीलिए इसकी रणनीतिक अहमियत मानी जाती है. हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी की निगरानी के लिहाज से यहां सबसे ज्यादा युद्धपोत, पनडुब्बियां एक्टिव रहते हैं. यहां के ही रामबिल्ली क्षेत्र में प्रोजेक्ट वर्षा के तहत एक रणनीतिक पनडुब्बी बेस भी विकसित किया जा रहा है.

विशाखापत्तम में पहले भी सामने आए जासूसी के मामले

  • नौसैना की इंटेलीजेंस यूनिट और केंद्रीय एजेंसियों ने 2019 में ऑपरेशन डॉल्फिन्स नोज चलाकर विशाखापत्तनम में पाकिस्तान से जुड़े एक जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया था. इस मामले में 7 नौसेना कर्मियों और एक हवाला ऑपरेटर को पकड़ा गया था. इन पर जहाजों और पनडुब्बी से जुड़ी जानकारी पाकिस्तान को दिए जाने का आरोप था.
  • 2020 में इसी मामले की जांच NIA ने शुरू की और जांच का दायरा बढ़ा तो मामले में कुल 15 गिरफ्तारियां हुईं, इनमें 11 नौसैनिक कर्मी थी. इन पर पनडुब्बियों के लोकेशन और मूवमेंट की जानकारी पाक ऑपरेटिव को दिए जाने का आरोप था.
  • 2021 में एक और जासूसी केस सामने आया था. यह मामला भी NIA के पास आया तो कर्नाटक के दो और केरल के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया. पकड़े गए आरोपी सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तानी खुफिया ऑपरेटिव्स के संपर्क में थे और नौसेना के प्रतिष्ठानों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी पाक के पास भेज रहे थे.
  • 2024 में उसी मामले में गुजरात और महाराष्ट्र में संदिग्धों के ठिकानों पर तलाशी ली गई. यहां मिले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के आधार पर सामने आया कि पाकिस्तानी नागरिक और भारतीय आरोपी एक दूसरे के साथ लंबे समय से संपर्क में थे.
  • 2019 वाले मामले में पकड़े गए लोगों को विशाखापत्तनम की स्पेशल NIA अदालत ने जासूसी मामलों का दोषी पाया. 15 गिरफ्तार आरोपियों में से आठ को दोषी ठहराकर सजा सुनाई गई. जनवरी 2026 में एक अन्य आरेापी को 5.5 साल कैद की सजा दी गई.



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