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Pakistan UNHRC Water Resolution means for India: पाकिस्तान पिछले कई महीनों से सिंधु के पानी को लेकर रोना रो रहा है. इस बीच वो अलग-अलग मंचों पर भारत के खिलाफ लामबंदी में लगा है. अब वो संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार मंच पर एक प्रस्ताव में इस मुद्दे को शामिल कराने में कामयाब हुआ है, तो क्या अब भारत को पानी छोड़ना पड़ेगा? चलिए जानते हैं.
पाकिस्तान ने यूएनएचआरसी के प्रस्ताव में शामिल कराया जल विवाद का मुद्दा. (पीटीआई)
Pakistan UNHRC Water Resolution means for India: भारत-पाकिस्तान के बीच पिछले करीब डेढ़ साल से सिंधु जल का पानी बड़ा मुद्दा बना हुआ है. इसे लेकर पाकिस्तान किन-किन मंचों पर नहीं रोया. अब उसने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र में पाकिस्तान ने सिंधु जल विवाद को लेकर अपनी आवाज बुलंद की. जिनेवा में चल रहे इस सत्र के दौरान पाकिस्तान के प्रथम सचिव अदील मुमताज खोखर ने जब ये मुद्दा उठाया, तो यहां इस देश का नसीब काम आया और जर्मनी और स्पेन की ओर से पेश किए गए सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता के मानवाधिकार संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई.
खोखर ने कहा कि पानी को कभी भी राजनीतिक दबाव या युद्ध का हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए. उन्होंने भारत पर आरोप लगाया कि भारत, सिंधु जल संधि को स्थगित करके पानी का राजनीतिक इस्तेमाल कर रहा है. इस बैठक में जर्मनी और स्पेन की ओर से पेश किए गए सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता के मानवाधिकार संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई. पाकिस्तान ने दावा किया कि वह इस प्रस्ताव के लास्ट लेसन में सीमा-पार जल सहयोग का उल्लेख बनाए रखने में कामयाब रहा. उसके मुताबिक भारत इस हिस्से को हटाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन वह प्रयास सफल नहीं हो सका.
पाकिस्तान ने क्या-क्या कहा?
खोखर ने यहां पर कहा- ‘जब नदियां दो देशों के बीच साझा होती हैं तो जिम्मेदारियां भी दोनों की साझा होती हैं. पड़ोसियों के बीच जल सहयोग कोई एहसान नहीं, बल्कि आपसी दायित्व है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कोई भी ऊपरी धारा वाला देश पानी का इस्तेमाल राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने के लिए नहीं कर सकता.’ पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने सिंधु नदी प्रणाली का जिक्र करते हुए भारत की कार्रवाई को पानी को हथियार बनाने वाला कदम बताया. उनका कहना था कि पानी को जबरदस्ती, राजनीतिक फायदे या युद्ध का माध्यम कभी नहीं बनने देना चाहिए. पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी स्थिति मजबूत करने का मौका मान रहा है.
तो क्या भारत को छोड़ना पड़ेगा पानी?
पाकिस्तान ने UNHRC में सिंधु जल को लेकर कोई अलग स्वतंत्र प्रस्ताव नहीं रखा. जर्मनी और स्पेन की ओर से लाए गए प्रस्ताव में सीमा-पार जल सहयोग का जिक्र रखा गया. पाकिस्तान ने इस जिक्र को शामिल कराया और उसी मौके पर भारत पर आरोप लगाया कि वह पानी को राजनीतिक दबाव का हथियार बना रहा है. अब ये जान लेते हैं कि क्या इससे भारत को सिंधु का पानी छोड़ना पड़ेगा?
- UNHRC के प्रस्ताव गैर-बाध्यकारी होते हैं. ये कानूनी रूप से नहीं होते हैं, सिर्फ सिफारिश या नैतिक-राजनीतिक दबाव होते हैं. कानूनी रूप से किसी देश को इनकी बातें मानने की मजबूरी नहीं होती.
- सिंधु जल संधि द्विपक्षीय समझौता है. इसका विवाद मुख्य रूप से दोनों देशों और संधि की मध्यस्थता से जुड़ा है, UNHRC से नहीं. ऐसे में इसका सिर्फ दबाव बन सकता है लेकिन भारत को मानना जरूरी नहीं है.
- भारत ने साल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद संधि को स्थगित रखा है और कहा है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद का समर्थन बंद नहीं करता, स्थिति नहीं बदलेगी. कुल मिलाकर इसका तत्काल कोई कानूनी असर भारत पर नहीं पड़ेगा.