Last Updated:
Bastar gedi dev ritual: बस्तर अपनी अनूठी संस्कृति और परंपराओं के लिए जाना जाता है. नई फसल आने के बाद यहां नयाखानी पर्व मनाया जाता है, जिसके बाद बस्तर जिले के घाटकवाली में गेड़ी देव नामक एक विशेष रस्म निभाई जाती है. यह रस्म गांव की सुख-शांति, समृद्धि और लोगों को बीमारियों से दूर रखने के लिए मनाई जाती है.
Bastar gedi dev ritual: बस्तर अपनी अनूठी संस्कृति और परंपराओं के लिए जाना जाता है. नई फसल आने के बाद यहां नयाखानी पर्व मनाया जाता है, जिसमें ग्रामीण प्रकृति को धन्यवाद देते हैं. इस पर्व के बाद बस्तर जिले के घाटकवाली में गेड़ी देव नामक एक विशेष रस्म निभाई जाती है.
नयाखानी पर्व का महत्व
बस्तर में नई धान की बाली आने पर ग्रामीण नयाखानी पर्व मनाते हैं. इस दौरान वे प्रकृति को धन्यवाद देते हैं और अच्छे जीवन के लिए प्रार्थना करते हैं. नयाखानी से पहले घाट जात्रा का आयोजन किया जाता है, जिसके बाद नयाखानी पर्व मनाया जाता है.
गेड़ी देव रस्म का आयोजन
नयाखानी पर्व के बाद बस्तर जिले के घाटकवाली में गेड़ी देव नामक एक अनोखी रस्म अदा की जाती है. ग्रामीणों के अनुसार, यह रस्म गांव की सुख-शांति, समृद्धि और लोगों को बीमारियों से दूर रखने के लिए मनाई जाती है. इस सेवा-अर्जी में ग्रामीण प्रार्थना करते हैं कि गांव में कोई बीमारी न आए.
पूजा विधि और मान्यताएं
इस पूजा में गेड़ी को अच्छे से रखा जाता है. इसके बाद मक्का, अंडा और चावल चढ़ाकर सेवा-अर्जी की जाती है. ग्रामीण अपने घरों से गेड़ी लाकर पूजा करते हैं, जिसके बाद सभी मिलकर नृत्य करते हैं. सबसे पहले पुजारी द्वारा सेवा-अर्जी की जाती है. गांव के पटेल लच्छू कश्यप ने बताया कि यह रस्म गांव को खुजली और अन्य बीमारियों से बचाने के लिए की जाती है. इस सेवा-अर्जी में ग्रामीण गेड़ी देते हैं, और फिर गेड़ी रखकर चावल, पैसे, अंडा और मक्का चढ़ाया जाता है. गांव के स्वस्थ रहने की कामना की जाती है.
परंपरा का निर्वहन
श्याम सुंदर ने बताया कि गेड़ी देव रस्म की शुरुआत उनके पूर्वजों ने की थी और वे इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. वे पूरे विधि-विधान से पूजा करते हैं ताकि गांव को रोगों से दूर रखा जा सके.