Sri Vinayaka Mandir Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सार्वजनिक जीवन में अपने 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं इस मौके पर उन्होंने दिल्ली के सरोजिनी नगर स्थित श्री विनायक मंदिर में पूजा-अर्चना की. उनका सार्वजनिक पद का सफर 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शुरू हुआ था और आज 7 अक्टूबर 2026 को उनके 25 साल पूरे हो गए हैं. पीएम मोदी का मंदिर जाना इस वजह से भी चर्चा में है कि सरोजिनी नगर का यह मंदिर दिल्ली में दक्षिण भारतीय समुदाय की धार्मिक परंपराओं से जुड़ा एक पुराना केंद्र है.
इसकी कहानी किसी प्राचीन ऐतिहासिक मंदिर से ज्यादा दिलचस्प उस सामुदायिक प्रयास की है, जिसके जरिए राजधानी में दक्षिण भारतीय शैली की पूजा-पद्धति के लिए एक मंदिर खड़ा किया गया. मंदिर समिति के अनुसार इसकी शुरुआत की सोच 1950 के आसपास बनी और बाद में 1961 में यहां मुख्य विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा हुई.
1950 में महसूस हुई थी मंदिर की जरूरत
श्री विनायक मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, दिल्ली में रहने वाले दक्षिण भारतीय समुदाय को 1950 के आसपास ऐसे मंदिर की जरूरत महसूस हुई, जहां लोग अपनी पारंपरिक पूजा, अनुष्ठान और धार्मिक संस्कार कर सकें. इसके लिए कुछ समाजसेवियों और दिल्ली के नागरिकों ने मिलकर श्री विनायक मंदिर कमेटी बनाई. यह कमेटी 16 अप्रैल 1953 को रजिस्टर हुई. इसका प्रमुख उद्देश्य राजधानी में भगवान विनायक का मंदिर स्थापित करना था.
मंदिर के निर्माण में आम लोगों से मिले स्वैच्छिक योगदान की भी भूमिका रही. शुरुआत में यहां भगवान विनायक के लिए गर्भगृह और उसके आसपास प्रदक्षिणा पथ वाला छोटा मंदिर बनाया गया था. यानी आज जिस मंदिर परिसर को श्रद्धालु देखते हैं, उसकी नींव एक बड़े सामुदायिक प्रयास से पड़ी थी.
24 अगस्त 1961 को हुआ मुख्य विग्रह का अभिषेक
मंदिर की सबसे अहम तारीख 24 अगस्त 1961 मानी जाती है. इसी दिन तत्कालीन विनय नगर, जिसे अब सरोजिनी नगर के नाम से जाना जाता है, में श्री सिद्धि बुद्धि समेत कर्पगा विनायकर की प्रतिष्ठा की गई. मंदिर की वेबसाइट के अनुसार इस विग्रह को दक्षिण भारत के शिल्पकारों ने तैयार किया था. प्रतिष्ठा समारोह में कांची कामकोटि पीठ और श्रृंगेरी शारदा पीठ के आचार्यों का आशीर्वाद भी मिला था. मंदिर में दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुसार कुंभाभिषेक भी किया गया. इसके बाद समय के साथ मंदिर का विस्तार होता गया और परिसर में भगवान हनुमान तथा नवग्रहों के विग्रह भी स्थापित किए गए.
सिर्फ गणपति मंदिर नहीं है पूरा परिसर
इस मंदिर की एक खास बात यह है कि यहां धार्मिक गतिविधियां केवल भगवान गणेश की पूजा तक सीमित नहीं हैं. जून 1983 में परिसर में भगवान शिव के मंदिर की भी प्रतिष्ठा की गई. मंदिर समिति के अनुसार यहां नर्मदा नदी से लाए गए स्वयंभू माने जाने वाले लिंग को ओंकारेश्वर नाम से स्थापित किया गया. इसके साथ पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और नंदी की प्रतिमाएं भी हैं.
समय के साथ मंदिर में पूजा-अर्चना के अलावा वेद पाठ, विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित होने लगीं. मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर अक्टूबर 2026 के लिए महारुद्रम, होम, अभिषेक, नवरात्रि और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का कैलेंडर भी दिया गया है.
श्री विनायक मंदिर की अपनी पहचान भी इस अवसर को खास बनाती है. यह मंदिर दिल्ली में दक्षिण भारतीय समुदाय की धार्मिक जरूरत से शुरू हुआ और छह दशक से अधिक समय में एक ऐसे धार्मिक परिसर के रूप में विकसित हुआ, जहां पारंपरिक पूजा-पद्धति आज भी जारी है. मंदिर का वर्तमान पता सरोजिनी नगर के एबी ब्लॉक में श्री विनायक मंदिर मार्ग पर है.
मंदिर क्यों खास है?
धार्मिक दृष्टि से भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और शुभ कार्यों से पहले पूजे जाने वाले देवता के रूप में मानने की परंपरा है. इस मंदिर की विशेषता यह भी है कि यहां सिद्धि-बुद्धि समेत कर्पगा विनायकर की उपासना दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुरूप होती है. इसलिए दिल्ली में रहने वाले दक्षिण भारतीय समुदाय के लिए यह मंदिर लंबे समय से आस्था और सांस्कृतिक जुड़ाव का केंद्र रहा है.