ब्रह्मांड के जन्म और उसकी बनावट को लेकर वैज्ञानिकों के बीच बहस चलती रही है. अब अमेरिका के लेहमन कॉलेज के फिजिसिस्ट लुइस अनचोरडोकी की टीम ने एक चौंकाने वाला मॉडल पेश किया है. इस थ्योरी के मुताबिक हमारे स्पेस में चार नहीं बल्कि पांच डायमेंशन हो सकते हैं. इस पांचवें आयाम को डार्क डायमेंशन कहा जा रहा है. अगर यह मॉडल सही साबित होता है तो बिग बैंग के फौरन बाद बने प्राचीन ब्लैक होल इसी अदृश्य आयाम में मौजूद हो सकते हैं.
जर्नल फिजिकल रिव्यू डी में छपे इस पेपर ने दुनिया भर के वैज्ञानिकों का ध्यान खींचा है. थ्योरेटिकल मैथ और क्वांटम ग्रेविटी के नियमों के जरिए यह समझने की कोशिश की गई है कि ये छोटे ब्लैक होल स्पेस के इस छिपे हुए हिस्से में कैसे टिके रहते हैं.
क्या हमारा ब्रह्मांड चार नहीं बल्कि पांच डायमेंशन में काम करता है?
सामान्य तौर पर विज्ञान यही मानता है कि हमारा स्पेस चार आयामों में चलता है. इसमें लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई के तीन स्पेस डायमेंशन और एक समय का डायमेंशन शामिल होता है. नई थ्योरी में एक छिपा हुआ एक्स्ट्रा स्पेस डायमेंशन सामने लाया गया है. इसे डार्क डायमेंशन का नाम दिया गया है.
वैज्ञानिकों के मुताबिक यह पांचवां आयाम आकार में बेहद छोटा है. इसका दायरा करीब एक माइक्रोन के बराबर माना गया है. इसी वजह से यह हमारी आंखों और मौजूदा टेलीस्कोप से पूरी तरह ओझल रहता है. आम पदार्थ और ताकतें हमारे चार डायमेंशन वाले स्पेस में कैद रहती हैं. लेकिन ग्रेविटी इस पांचवें आयाम में भी फैल सकती है.
(वीडियो : एआई जेनेरेटेड)
क्या प्राचीन ब्लैक होल चार से पांचवें आयाम में छलांग लगा सकते हैं?
क्या पांचवें आयाम के जरिए सुलझ जाएगा डार्क मैटर का रहस्य?
डार्क मैटर आज भी आधुनिक फिजिक्स की सबसे बड़ी अनसुलझी पहेली बना हुआ है. ब्रह्मांड का एक बड़ा हिस्सा इसी अनदेखे पदार्थ से बना है. अगर ये छोटे ब्लैक होल सच में मौजूद हैं तो वे डार्क मैटर की मौजूदगी की वजह हो सकते हैं.
पांचवां आयाम इन छोटे ब्लैक होल के जीवनकाल को पूरी तरह बदल देता है. आम तौर पर बहुत छोटे ब्लैक होल हॉकिंग रेडिएशन की वजह से जल्दी खत्म हो जाते हैं. पांचवें आयाम में ग्रेविटी का फैलाव उनके टिके रहने का समय बढ़ा सकता है. इस वजह से वे आज भी ब्रह्मांड में डार्क मैटर के रूप में तैर रहे हो सकते हैं.
(वीडियो : एआई जेनेरेटेड)
क्या प्राचीन ब्लैक होल चार से पांचवें आयाम में छलांग लगा सकते हैं?
क्या पांचवें आयाम के जरिए सुलझ जाएगा डार्क मैटर का रहस्य?
डार्क मैटर आज भी आधुनिक फिजिक्स की सबसे बड़ी अनसुलझी पहेली बना हुआ है. ब्रह्मांड का एक बड़ा हिस्सा इसी अनदेखे पदार्थ से बना है. अगर ये छोटे ब्लैक होल सच में मौजूद हैं तो वे डार्क मैटर की मौजूदगी की वजह हो सकते हैं.
पांचवां आयाम इन छोटे ब्लैक होल के जीवनकाल को पूरी तरह बदल देता है. आम तौर पर बहुत छोटे ब्लैक होल हॉकिंग रेडिएशन की वजह से जल्दी खत्म हो जाते हैं. पांचवें आयाम में ग्रेविटी का फैलाव उनके टिके रहने का समय बढ़ा सकता है. इस वजह से वे आज भी ब्रह्मांड में डार्क मैटर के रूप में तैर रहे हो सकते हैं.
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कॉस्मिक स्ट्रिंग्स से बने ब्लैक होल इतने लंबे समय तक कैसे टिके रहते हैं?
इस मॉडल में कॉस्मिक स्ट्रिंग्स से पैदा होने वाले ब्लैक होल पर भी काम किया गया है. वैज्ञानिकों ने पाया कि ऐसे ब्लैक होल शुरुआत से ही पांच डायमेंशन वाले होते हैं. उनका अस्तित्व बहुत मजबूत और लंबे समय तक रहने वाला होता है.
रिसर्च टीम ने कहा, ‘कॉस्मिक स्ट्रिंग्स से बने प्रीमोर्डियल ब्लैक होल की उम्र हमारे पूरे ब्रह्मांड की उम्र के बराबर हो सकती है.’ हालांकि अभी तक किसी टेलीस्कोप ने इन्हें सीधे तौर पर नहीं देखा है. इसके बावजूद यह थ्योरी शुरुआती ब्रह्मांड की हाई-एनर्जी फिजिक्स को समझने के लिए एक नया रास्ता खोलती है.
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