Home Flooring Tips : होम फ्लोरिंग के लिए मार्बल अच्‍छा या टाइल? किसमें कम लगेगा पैसा, कौन सा चलेगा सालों-साल?

Home Flooring Tips : होम फ्लोरिंग के लिए मार्बल अच्‍छा या टाइल? किसमें कम लगेगा पैसा, कौन सा चलेगा सालों-साल?


नई दिल्‍ली. नया घर बनाते समय या पुराने मकान की मरम्‍मत कराते वक्त फ्लोरिंग के चुनाव को लेकर बड़ी उलझन होती है. हर कोई ऐसा फर्श बनाना चाहता है जो दिखने में शानदार हो,सालों-साल चले और बजट में भी हो. भारत में फ्लोरिंग के लिए मार्बल और टाइल्‍स का सबसे ज्‍यादा इस्‍तेमाल होता है. इन दोनों की अपनी खूबियां हैं और खामियां भी. मार्बल या टाइल में से किसी एक को चुनने से पहले आपको पता होना चाहिए कि इनमें से कौन सा सस्‍ता पड़ेगा और कौन सा ज्‍यादा टिकाऊ है. दोनों के खर्च, मजबूती और मेंटनेंस के बारे में जानने के बाद आपको पता चल जाएगा कि आपके बजट में मार्बल सही है या टाइल और आपकी जरूरत किससे पूरी होगी.

मार्बल कुदरती चूना पत्थर है जो ज़मीन के भीतर भारी दबाव और गर्मी से तैयार होता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका कभी पुराना न पड़ने वाला क्लासिक लुक है. हर स्लैब पर बनने वाली प्राकृतिक नसें घर को एक प्रीमियम लुक देती हैं. मजबूती के मामले में मार्बल का कोई सानी नहीं है. अइसे सही तरीके से लगाया जाए तो यह कई पीढ़ियों तक टिका रहता है. जिस इलाके में गर्मी ज्‍यादा होती होती है, वहां तो यह बहुत मुफीद है, क्योंकि इसकी सतह प्राकृतिक रूप से ठंडी रहती है. इससे घर में ठंडक बनी रहती है.

मार्बल लगाने में कितना होगा खर्च, क्‍या हैं इसकी खामियां

मार्बल जेब पर भारी पड़ता है. देश की प्रसिद्ध सीमेंट कंपनी, जेके सीमेंट की वेबसाइट के मुताबिक, 100 वर्ग मीटर में भारतीय मार्बल लगाने का कुल खर्च लगभग ₹26,000 से ₹57,000 तक पहुंच जाता है. अगर आप इंपोर्टेड इटैलियन मार्बल लगाएंगे तो यह खर्च और बढ़ जाएगा. इसके अलावा 10 से 15 फीसदी तक वेस्टेज, किनारों की घिसाई और लगाने की मजदूरी इसे काफी महंगा बना देती है.

मार्बल एक पोरस यानी छिद्रयुक्त पत्थर है. इस पर नींबू, सिरका या हल्दी का दाग पड़ते ही वह हमेशा के लिए निशान छोड़ सकता है. इसे हर दो-तीन साल में री-पॉलिश और सील कराने की जरूरत होती है. यानी खर्चा लगता ही रहता है.

टाइल्स: कम बजट में बेहतरीन डिजाइन

विट्रिफाइड और पोर्सिलेन टाइल्स अब खूब इस्‍तेमाल हो रही हैं. इसका कारण है इनका सस्‍ता होना और शानदार लुक. 100 वर्ग मीटर में टाइल्स लगाने का कुल खर्च ₹8,000 से ₹21,000 के आसपास बैठता है. यह मार्बल के मुकाबले एक-तिहाई से भी कम है. टाइल्‍स फैक्ट्री में बनती हैं. इसलिए इनमें मार्बल, लकड़ी और ग्रेनाइट जैसे हजारों आकर्षक डिजाइन मिल जाते हैं. इन्हें लगाना आसान है. लेबर खर्च कम लगता है. दाग-धब्बों को लेकर इनमें कोई झंझट नहीं होता, क्योंकि इनकी सतह पर एसिड या तेल का असर नहीं पड़ता और सामान्य पोछे से ही फर्श चमक उठता है.

टाइल्स भले ही पैसे बचाती हों, लेकिन उम्र के मामले में ये मार्बल की बराबरी नहीं कर सकतीं. अगर भारी सामान गिरने से टाइल चटक जाए या उसमें दरार आ जाए, तो उसकी मरम्मत नहीं की जा सकती. पूरी टाइल ही उखाड़नी पड़ती है. ठीक उसी डिजाइन और बैच की टाइल मिलना मुश्किल होता है. टाइल्स के बीच ग्राउटिंग भी कुछ सालों बाद उखड़ने लगती है. इन्‍हें पांच से आठ साल में दोबारा भरवाना पड़ता है.



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