Why Indonesia increasing Military Power। India Indonesia Brahmos deal। इंडोनेशिया भारत से सिर्फ ब्रह्मोस नहीं और भी चीजें ले रहा, कौन है उसका दुश्मन?

Why Indonesia increasing Military Power। India Indonesia Brahmos deal। इंडोनेशिया भारत से सिर्फ ब्रह्मोस नहीं और भी चीजें ले रहा, कौन है उसका दुश्मन?


आजकल साउथ-ईस्ट एशिया की जियो-पॉलिटिक्स में गजब का भूचाल आया हुआ है. इंडोनेशिया अब तक सिर्फ चीन के साथ इकोनॉमिक डील्स और बैलेंसिंग गेम खेलता था लेकिन अब उसने अपनी नेवी और एयरफोर्स को नेक्स्ट लेवल पर अपग्रेड करना शुरू कर दिया है. भारत और इंडोनेशिया के बीच डिफेंस पार्टनरशिप इस वक्त अपने पीक पर है, और जकार्ता सिर्फ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ही नहीं बल्कि इंडियन डिफेंस मार्केट से और भी खतरनाक चीजें उठा रहा है. इंडोनेशिया भारत की अस्त्र हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल में भी रुचि दिखा रहा है. इसके अलावा दुनिया का यह सबसे बड़ा मुस्लिम देश फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमान और पनडुब्बियां ले रहा है. तुर्की से 48 KAAN लड़ाकू विमानों का सौदा भी कर चुका है. अमेरिका से भी रक्षा उपकरण लेने के विकल्प इंडोनेशिया ने खुले रखे हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इंडोनेशिया इतनी तेजी से अपनी सैन्य क्षमता क्यों बढ़ा रहा है. आइए डिकोड करते हैं इस पूरे मामले को.

इंडोनेशिया की जिओ-पॉलिटिक्स: क्या है भाई इनका चक्कर?
इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप समूह वाला देश है. जकार्ता की फॉरेन पॉलिसी शुरू से फ्री एंड एक्टिव (स्वतंत्र और सक्रिय) वाली रही है. मतलब किसी बड़े देश की गोद में न बैठकर न्यूट्रल रहना. लेकिन भाई, थ्योरी और ग्राउंड रियलिटी में फर्क होता है. इंडोनेशिया का सबसे बड़ा सिरदर्द साउथ चाइना सी है. हालांकि इंडोनेशिया खुद को इस विवाद में डायरेक्ट नॉन-क्लेमेंट स्टेट (यानी जिसका कोई सीधा टेरिटोरियल क्लेम नहीं है) बताता है, लेकिन चीन की दादागिरी और उनकी तथाकथित नाइन-डैश लाइन इंडोनेशिया के नटूना आइलैंड्स के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन (EEZ) तक घुसपैठ कर जाती है. चीन की फिशिंग बोट्स और कोस्ट गार्ड अक्सर वहां नौटंकी करते हैं. इसलिए, इंडोनेशिया अंदर ही अंदर समझ चुका है कि न्यूट्रल रहने से काम नहीं चलेगा, मस्कुलर डिफेंस पावर दिखानी ही पड़ेगी.

इंडोनेशिया के दुश्मनों की लिस्ट में कौन-कौन है?

ड्रैगन यानी चीन: खुलेआम कोई देश चीन का नाम नहीं लेता लेकिन इंडोनेशिया की आर्मी का पूरा फोकस चीन की बढ़ती नेवल पावर और मैरीटाइम असर्टिवनेस (समुद्री धौंस) से निपटना है. नटूना सी के पास चीन की हरकतों ने जकार्ता को टेंशन में डाल रखा है.

नॉन-ट्रडिशनल थ्रेट्स (पाइरेसी और स्मगलिंग): समुद्री डकैती, इललीगल फिशिंग और ड्रग्स स्मगलिंग जैसे खतरे इंडो-पैसिफिक रीजन में हमेशा बने रहते हैं, जिनसे निपटने के लिए जकार्ता को ताबड़तोड़ हथियारों की जरूरत है.

चीन के साथ समुद्री क्षेत्र को लेकर तनाव
इंडोनेशिया ने किसी देश को अपना आधिकारिक दुश्मन घोषित नहीं किया है. हालांकि उसकी सुरक्षा चिंताओं में चीन सबसे महत्वपूर्ण देशों में शामिल है. दक्षिण चीन सागर में चीन के व्यापक समुद्री दावे इंडोनेशिया के नॉर्थ नटुना सी इलाके से टकराते हैं. इंडोनेशिया का कहना है कि नटुना क्षेत्र उसके अधिकार क्षेत्र में आता है. चीन और इंडोनेशिया के बीच इस इलाके में मछली पकड़ने और समुद्री गतिविधियों को लेकर कई बार तनाव की स्थिति बन चुकी है.

इंडोनेशिया चीन के साथ सीधे सैन्य टकराव से बचता रहा है. दोनों देशों के बीच आर्थिक और कूटनीतिक संबंध भी महत्वपूर्ण हैं. इसके बावजूद जकार्ता अपनी समुद्री सीमाओं और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए सैन्य क्षमता बढ़ा रहा है. इसी रणनीति के तहत इंडोनेशिया नौसेना, वायुसेना और लंबी दूरी के हथियारों को मजबूत करने पर काम कर रहा है.

चीन से भी हथियार लेने का विकल्प खुला
इंडोनेशिया की नीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि चीन के साथ समुद्री विवाद होने के बावजूद उसने बीजिंग से रक्षा खरीद का विकल्प बंद नहीं किया है. चीनी J-10 लड़ाकू विमानों को लेकर इंडोनेशिया की दिलचस्पी सामने आ चुकी है. इससे साफ है कि जकार्ता चीन के खिलाफ किसी सैन्य गठबंधन का हिस्सा बनने के बजाय अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को बनाए रखना चाहता है. इंडोनेशिया अमेरिका के साथ भी रक्षा सहयोग जारी रखे हुए है. अमेरिकी लड़ाकू विमानों और अन्य सैन्य तकनीक को लेकर वहां समय-समय पर बातचीत होती रही है. इस तरह जकार्ता भारत, फ्रांस, तुर्की, अमेरिका और चीन से अलग-अलग रक्षा जरूरतों के लिए विकल्प तलाश रहा है.

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है इंडोनेशिया?
भारत और इंडोनेशिया दोनों हिंद महासागर क्षेत्र में महत्वपूर्ण समुद्री ताकत हैं. भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की भौगोलिक स्थिति इंडोनेशिया के समुद्री क्षेत्र के करीब है. दोनों देशों के बीच नौसैनिक सहयोग और सैन्य अभ्यास भी होते रहे हैं. ऐसे में ब्रह्मोस सौदा केवल हथियारों की बिक्री नहीं है. इससे भारत को दक्षिण पूर्व एशिया में रक्षा निर्यात बढ़ाने के साथ एक महत्वपूर्ण समुद्री साझेदार के साथ संबंध मजबूत करने का अवसर मिलता है. इंडोनेशिया भी भारत के साथ सहयोग करके अपनी रक्षा जरूरतों के लिए एक अतिरिक्त और भरोसेमंद विकल्प तैयार कर रहा है.



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