Russia Taliban News : अफगानिस्तान को ‘भारत के दोस्त’ ने दिया ऐसा तोहफा, बिना मारे पाकिस्तान का काम-तमाम

Russia Taliban News : अफगानिस्तान को ‘भारत के दोस्त’ ने दिया ऐसा तोहफा, बिना मारे पाकिस्तान का काम-तमाम


एशिया की राजनीति में एक ऐसा कूटनीतिक दांव चला गया है, जिसने बिना एक भी गोली चलाए पाकिस्तान का काम-तमाम हो गया है. भारत के सबसे पुराने और भरोसेमंद दोस्त रूस ने अफगानिस्तान सरकार को एक ऐसा अनमोल तोहफा दिया है, जिसने इस्लामाबाद के होश उड़ा दिए हैं. रूस ने काबुल को अपना पूरा और खुला समर्थन देने का ऐलान कर दिया. रूस ने न केवल अफगानिस्तान के साथ अपने राजनीतिक और व्यापारिक रिश्ते मजबूत किए हैं, बल्कि डिफेंस और सिक्योरिटी के मोर्चे पर भी तालिबान को पूरी तरह बैक करने का वादा किया है. तालिबान के लिए रूस की ये ढाल एक बड़ा तोहफा है और पाकिस्तान की हैसियत घटाने का हथियार.

मॉस्को की वो मीटिंग, जिसने काबुल की किस्मत चमका दी

रूस की राजधानी मॉस्को में हुई ये खास बातचीत तालिबान सरकार के विदेश मंत्री मौलवी अमीर खान मुत्तकी और रूस के उप प्रधानमंत्री अलेक्सी ओवरचुक के बीच हुई. कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच ट्रेड, एनर्सी, ट्रांजिट रूट्स और आर्थिक सहयोग के बड़े विस्तार पर बेहद पॉजिटिव चर्चा हुई.

रूस अब अफगानिस्तान को अलग-थलग पड़ने से बचाने के लिए उसे अंतरराष्ट्रीय आर्थिक नेटवर्क से सीधे जोड़ने में मदद करेगा. लेकिन बात सिर्फ पैसों और व्यापार तक सीमित नहीं है, रूस ने काबुल को राजनीतिक, डिफेंस और सिक्योरिटी में भी सहयोग देने का वादा किया है.

रूस का बड़ा फैसला: तालिबान को वैध सरकार की मान्यता

रूस और अफगानिस्तान की ये नजदीकी अचानक नहीं बढ़ी है. इसके पीछे राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का एक बेहद सोचा-समझा रणनीतिक दांव है. रूस दुनिया का पहला ऐसा देश बना, जिसने तालिबान को अपने प्रतिबंधित आतंकी संगठनों की आधिकारिक सूची से बाहर निकाला और अफगानिस्तान के ‘इस्लामिक अमीरात’ को वहां की वैध सरकार के रूप में आधिकारिक मान्यता दी.

जनवरी 2026 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कूटनीतिक इतिहास रचते हुए तालिबान द्वारा नियुक्त राजदूत गुल हसन के कूटनीतिक दस्तावेजों को आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया था. इसके साथ ही मॉस्को में काबुल के दूतावास को पूर्ण औपचारिक राजनयिक दर्जा मिल गया. रूस का ये कदम तालिबान के लिए दुनिया के बाकी देशों के दरवाजे खोलने की सबसे बड़ी चाबी साबित हुआ है.

क्या होता है किसी देश को मान्यता मिलने का मतलब?

किसी देश या सरकार को ‘सबसे पहले आधिकारिक मान्यता’ देने का मतलब होता है कि दुनिया की किसी बड़ी ताकत ने उसे कानूनी तौर पर एक असली, वैध और स्वतंत्र देश मान लिया है. जिस देश को ये मान्यता मिलती है, उसके लिए ये बहुत बड़ी बात इसलिए होती है क्योंकि इसके बाद दुनिया के बाकी देशों के सामने उसका ‘अछूत’ या गैर-कानूनी होने का ठप्पा हट जाता है. मान्यता मिलते ही उस देश के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार के रास्ते खुल जाते हैं, विदेशों में उसके दूतावास खुलते हैं, और उसे दुनिया भर से आर्थिक मदद और हथियार मिलने आसान हो जाते हैं, यानी रातों-रात उसकी कूटनीतिक हैसियत और ताकत कई गुना बढ़ जाती है.

रूस में अफगानिस्तान डेलीगेशन (रॉयटर्स)

बिना गोली चलाए पाकिस्तान पर भारी पड़ा ये ‘तोहफा’

मॉस्को और काबुल के बीच मजबूत होते इस ‘एक्सिस’ ने पाकिस्तान को उस मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां उसकी वर्षों पुरानी अफगान-नीति पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है. इस समय इस्लामाबाद और काबुल के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण और बातचीत के बंद दौर में हैं.

पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता रहा है कि तालिबान प्रशासन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे विरोधी गुटों को अपनी सरजमीं पर पनाह दे रहा है. सीमा पार से होने वाली एयरस्ट्राइक्स और झड़पों ने दोनों देशों के संबंधों को पूरी तरह खत्म कर दिया है. ऐसे में, तालिबान ने रूस के साथ हुए इस नए सुरक्षा और आर्थिक गठजोड़ को पाकिस्तान के खिलाफ एक बड़े ‘लीवरेज’ की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है.

जो पाकिस्तान कभी खुद को अफगानिस्तान का ‘बॉस’ समझता था और ये सोचता था कि काबुल पर उसका दबदबा रहेगा, वो आज मॉस्को और काबुल की इस जुगलबंदी के सामने बेबस और अलग-थलग महसूस कर रहा है.

‘भारत के दोस्त’ का ये दांव नई दिल्ली के लिए क्या मायने रखता है?

ग्लोबल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि रूस का ये कदम भारत के हितों के हिसाब से एकदम सही हैं. भारत हमेशा से एक स्थिर, सुरक्षित और समृद्ध अफगानिस्तान का समर्थक रहा है. रूस द्वारा तालिबान को मुख्यधारा में लाने से अफगानिस्तान में स्थिरता आएगी, जिससे सेंट्रल एशिया के व्यापारिक रास्ते खुलेंगे.

सबसे बड़ी बात ये है कि पाकिस्तान जो हमेशा अफगानिस्तान की सरजमीं का इस्तेमाल भारत के खिलाफ ‘स्ट्रेटेजिक डेप्थ’ के रूप में करने का सपना देखता था, उसका वो सपना अब हमेशा के लिए टूट चुका है. भारत का पुराना दोस्त रूस अब काबुल का सबसे बड़ा संरक्षक बनकर उभरा है, जिससे इस पूरे रीजन में पाकिस्तान का प्रभाव लगभग शून्य हो गया है.

बदला हुआ जियोपॉलिटकल समीकरण

पश्चिमी देशों की पाबंदियों का सामना कर रहा रूस अब एशिया और मध्य एशिया में अपने नए व्यापारिक साझेदार मजबूत कर रहा है. ऐसे में अफगानिस्तान रूस के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है. तालिबान के लिए भी किसी महाशक्ति का खुलकर साथ मिलना अंतरराष्ट्रीय मंच पर खुद को साबित करने का सबसे सुनहरा मौका है.

इस पूरी बिसात पर पाकिस्तान बिना किसी युद्ध के रणनीतिक रूप से परास्त होता दिख रहा है क्योंकि उसके पड़ोस में अब एक ऐसा अफगानिस्तान खड़ा है, जिसके पीछे रूस की ढाल है. जिस अफगानिस्तान को वो तबाह करने के सपने देखता था वो अब रूस जैसे पावरफुल देश का सबसे भरोसेमंद पार्टनर बन चुका है.



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