Inox Clean Energy IPO पर सेबी ने लगाई रोक, जानें कहां फंस गई कंपनी

Inox Clean Energy IPO पर सेबी ने लगाई रोक, जानें कहां फंस गई कंपनी


शेयर बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने Inox Clean Energy के 10,000 करोड़ रुपये के आईपीओ को फिलहाल रोक दिया है. मनी कंट्रोल को सूत्रों के मुताबिक, इसकी वजह कंपनी या उसके प्रमोटर ग्रुप से जुड़ी कुछ जांच और लेन-देन पर सेबी की पूछताछ है. सेबी ने 1 अक्टूबर को आईपीओ को abeyance यानी फिलहाल रोकने की जानकारी दी थी, लेकिन इसकी वजह सार्वजनिक तौर पर नहीं बताई. सूत्रों के अनुसार, मामला खास तौर पर उस लेन-देन की जांच से जुड़ा है, जिसके जरिए लिस्टेड कंपनी आईनॉक्‍स ग्रीन एनर्जी सर्विसेस ने आईनॉक्‍स ग्रीन एनर्जी और उसकी तीन सहयोगी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेच दी थी.

दरअसल, आईनॉक्‍स क्‍लीन एनर्जी करीब 10,000 करोड़ रुपये का IPO लाने की तैयारी में है. इसमें 8,000 करोड़ रुपये का नया शेयर इश्यू होगा. 2,000 करोड़ रुपये के शेयर प्रमोटर देवांश जैन बेचेंगे. कंपनी नए इश्यू से मिलने वाले करीब 6,000 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कर्ज चुकाने में करना चाहती है. कंपनी को INOXGFL ग्रुप प्रमोट करता है. विवेक जैन इस ग्रुप के प्रमुख हैं और उनके बेटे देवांश जैन कंपनी में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं. INOXGFL और Inox Group अलग-अलग कारोबारी समूह हैं.

सेबी को सबसे बड़ा सवाल किस बात पर है?

मामला आईनॉक्‍स ग्रीन एनर्जी सर्विसेस और आईनॉक्‍स क्‍ल‍ीन एनर्जी के बीच हुए एक पुराने सौदे से जुड़ा है. Inox Green ने Inox Clean Energy को बेचने के लिए करीब 290 करोड़ रुपये की वैल्यू को मंजूरी दी थी. लेकिन कंपनी के FY25 के अलग-अलग खातों में सिर्फ 90 करोड़ रुपये मिलने की बात दर्ज थी. सेबी ने दिसंबर में इसी अंतर को लेकर Inox Green से सवाल पूछा.

कंपनी ने जवाब दिया कि 290 करोड़ रुपये कंपनी की पूरी एंटरप्राइज वैल्यू थी. इसमें करीब 200 करोड़ रुपये Inox क्‍लीन एनर्जी के पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन के कर्ज को चुकाने के लिए थे और बाकी 90 करोड़ रुपये इक्विटी के तौर पर मिले. यानी कंपनी का कहना था कि 290 करोड़ रुपये और 90 करोड़ रुपये में अंतर इसलिए है क्योंकि दोनों आंकड़े अलग-अलग चीजों को दिखाते हैं.

तीन कंपनियों को फेस वैल्यू पर बेचने पर भी सवाल

सेबी ने यह भी पूछा कि Inox न‍ियो एनर्जीज, Flurry व‍िंड एनर्जी और Flutter व‍िंड एनर्जी को Inox क्‍लीन एनर्जी को उनकी फेस वैल्यू पर क्यों बेचा गया. सेबी का सवाल इसलिए उठा क्योंकि बाद में Inox न‍ियो एनर्जी ने करीब 292 करोड़ रुपये जुटाए और इसके लिए प्रति शेयर 265 रुपये की कीमत तय की.

Inox Green ने जवाब दिया कि जब इन कंपनियों को बेचा गया था, तब उनके पास कोई कारोबार या कमाई करने वाली संपत्ति नहीं थी. इसलिए उनकी कीमत उनके बही-खाते में दर्ज वैल्यू के हिसाब से तय की गई थी. कंपनी का यह भी कहना था कि इन कंपनियों को बेचने से वह अपने मुख्य कारोबार यानी ऑपरेशन और मेंटेनेंस पर ज्यादा ध्यान दे सकी.

दो अलग-अलग वैल्यूएशन रिपोर्ट पर भी सवाल

सेबी ने 2026 में कंपनी से 20 अक्टूबर 2023 की दो वैल्यूएशन रिपोर्ट को लेकर भी सवाल किए. दोनों रिपोर्ट एक ही वैल्यूअर ने बनाई थीं, लेकिन दोनों में Inox Clean Energy की वैल्यू में काफी अंतर था. सेबी ने पूछा कि आखिर कंपनी के ऑडिट कमेटी और बोर्ड ने इनमें से कौन सी रिपोर्ट को आधार बनाया था और शेयरधारकों, ऑडिटर्स को कौन सी रिपोर्ट दी गई थी. कंपनी ने इसे अनजाने में हुई गलती बताया. उसका कहना था कि पहली रिपोर्ट में कर्ज को घटाने का हिसाब छूट गया था. बाद में सही रिपोर्ट बनाई गई और उसी का इस्तेमाल मंजूरी और ऑडिट के लिए किया गया.

क्या सेबी ने कंपनी को दोषी ठहरा दिया है?

अभी ऐसा नहीं कहा जा सकता. DRHP यानी IPO के ड्राफ्ट दस्तावेज के मुताबिक, दाखिल करने की तारीख तक Inox Green के खिलाफ सेबी ने कोई शो-कॉज नोटिस, अंतिम आदेश या एडजुकेशन कार्रवाई शुरू नहीं की थी. लेकिन कंपनी ने यह भी साफ किया है कि सेबी की जांच का नतीजा उसके पक्ष में ही आएगा, इसकी गारंटी नहीं दी जा सकती. यही वजह है कि IPO पर फिलहाल सेबी की तरफ से रोक अहम हो जाती है.

INOX ग्रुप की दूसरी कंपनियों पर भी सेबी की नजर

मामला सिर्फ Inox क्‍लीन एनर्जी तक सीमित नहीं है. Inox Wind को वित्तीय खुलासों और कुछ कारोबारी लेन-देन से जुड़े मामलों में सेबी से समन मिला था. कंपनी के अधिकारियों ने इस मामले में सुनवाई में हिस्सा लिया. Inox Wind के शेयरों में कुछ संस्थाओं द्वारा कथित इनसाइडर ट्रेडिंग को लेकर भी सेबी ने सवाल पूछे थे. इसके अलावा देवांश जैन को भी PVR Inox के शेयरों में ट्रेडिंग से जुड़े मामले में सेबी का समन मिला था. इसमें संभावित तौर पर सिक्योरिटीज कानूनों के उल्लंघन की जांच की जा रही थी. सबसे जरूरी बात यह है कि IPO रद्द नहीं हुआ है. सेबी ने इसे फिलहाल अबेयंस यानी रोक लगा रखी है.



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