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Gopi Krishna Pandey: क्या साल 2020 में कानपुर के विकास दुबे एनकाउंटर की काट है बीजेपी का गोपी कृष्ण पांडेय को राज्यसभा भेजना? क्या विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद कानपुर और उससे सटे इलाके में ब्राह्मण वोटर्स बीजेपी से नाराज हैं? जानिए गोपी कृष्ण पांडेय की राज्यसभा एंट्री के पीछे पीएम मोदी से दोस्ती या फिर कुछ और?
क्या गोपी कृष्ण पांडेय को राज्यसभा भेजने के पीछे ब्राह्मण वोट बैंक है?
लखनऊ. बीजेपी ने यूपी में राज्यसभा उम्मीदवारों की जो लिस्ट जारी की है, उसमें एक चेहरा ऐसा है जिसका पीएम मोदी से ढाई दशक पुराना संबंध बताया जाता है. बीजेपी सूत्रों की मानें तो साल 2001 में बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) रहते मोदी कानपुर आए थे तो तीन दिन पांडेय के जूही स्थित घर पर रुके थे. इस दौरान दोनों ने लाल पैलेस में गदर फिल्म भी साथ-साथ देखी थी. कहा जाता है कि पीएम मोदी तब पांडेय के घर पर अपन बाल भी कटवाए थे. ऐसे में सवाल यह है कि आखिर इतने साल बाद बीजेपी को गोपी कृष्ण पांडेय की याद क्यों आई? क्या यह कानुपर में विकास दुबे एनकांउर के बाद ब्राह्मणों में नाराजगी को दूर करने वाला कदम है? आखिर कानपुर क्लाइमेक्स से यूपी चुनाव 2027 के बाद उठेगा पर्दा?
गोपी कृष्ण पाण्डेय कानपुर देहात के रहने वाले हैं. खास बात यह है कि विकास दुबे भी कानपुर देहात एरिया से ही आता था. अगर बात गोपी कृष्ण पाण्डेय की करें तो वह साल 1997 में बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं. साल 2000 में किसान मोर्चा के उपाध्यक्ष बनाए गए. बाद में उन्होंने आंध्र प्रदेश और कर्नाटक विधानसभा चुनाव में पार्टी की तरफ से जिम्मेदारी निभाई. कई सालों तक भाजपा प्रदेश कार्य समिति के सदस्य भी रह चुके हैं. इतने सालों के बाद उन्हें राज्यसभा भेजना बीजेपी की पुरानी परंपरा रही है. क्योंकि बीते कुछ सालों से ब्राह्मणों के द्वारा अलग-अलग मंचों से विकास दुबे एनकाउंटर पर सवाल उठाए जा रहे थे. इसलिए गोपी कृष्ण पांडेय का राज्यसभा कैंडिडेट बनाना मायने रखता है.
पांडेय की पहचान लंबे समय से संगठन के लिए काम करने वाले नेता की है.
कानपुर, विकास दुबे एनकाउंटर और गोपी कृष्ण पांडेय
बता दें कि 10 जुलाई 2020 की सुबह कानपुर के बाहरी इलाके में हुई एक पुलिस मुठभेड़ में विकास दुबे की कहानी का अंत नहीं किया, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण प्रतिनिधित्व और बीजेपी के सामाजिक समीकरण पर भी लंबे समय तक बहस छेड़ दी. छह साल बाद 2027 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बीजेपी ने कानपुर से जुड़े संगठन के पुराने कार्यकर्ता और ब्राह्मण चेहरे गोपी कृष्ण पांडेय को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है, इसके राजनीतिक मायने से इंकार नहीं किया जा सकता.
विकास दुबे एनकाउंटर के बाद ब्राह्मण वोट बैंक लगाएंगे सेंध
विकास दुबे 2 और 3 जुलाई 2020 की रात को कानपुर के बिकरू गांव में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले का मुख्य आरोपी था. घटना के बाद वह फरार हो गया और आखिरकार मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर में पकड़ा गया. उज्जैन से उसे यूपी एसटीएफ कानपुर ला रही थी. 10 जुलाई 2020 की सुबह कानपुर के भौंती क्षेत्र के पास पुलिस वाहन दुर्घटनाग्रस्त हुआ. पुलिस के मुताबिक, दुर्घटना के बाद विकास दुबे ने एक पुलिसकर्मी की पिस्टल छीनकर भागने की कोशिश की और पुलिस पर फायरिंग की. जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके शरीर पर गोली लगने से हुई चोटों और अत्यधिक खून बहने की बात सामने आई थी.
बीजेपी यूपी राज्यसभा कैंडिडेट जाति वाइज लिस्ट.
पांडेय को राज्यसभा का टिकट, क्या पीएम मोदी ने दिया?
विकास दुबे खुद को इस इलाके में ब्राह्मणों के प्रतिनिधि के तौर पर पेश करता था. कानपुर और आसपास के कुछ इलाकों में उसकी सामाजिक-पॉलिटिकल पहुंच को लेकर रिपोर्टें सामने आती रही थीं. इसी वजह से उसके एनकाउंटर के बाद यह राजनीतिक नैरेटिव बना कि ब्राह्मण समाज का एक वर्ग योगी सरकार से नाराज है. 2020 में ही ऐसी खबरें सामने आईं जिनमें ब्राह्मण नेताओं और संगठनों की नाराजगी का उल्लेख किया गया था. हालांकि इसके बावजूद 2022 के चुनाव में बीजेपी की जीत हुई. जब यह घटना हुई थी तो तब बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने भी कहा था कि एनकाउंटर के बाद ब्राह्मण समाज में भय और असुरक्षा की भावना है.
कानपुर के बिकरू कांड को भूल जाएंगे ब्राह्मण?
यूपी चुनाव 2027 से पहले बीजेपी ने गोपी कृष्ण पांडेय को टिकट दिया है. गोपी कृष्ण पांडेय भी कानपुर के ही रहने वाले हैं. बेशक बीजीपी ने टिकट देने की आधिकारिक वजह विकास दुबे या बिकरू कांड को नहीं बताया है. लेकिन इससे एक व्यापक तस्वीर जरूर सामने आती है. कानपुर-बुंदेलखंड और पूर्वांचल इलाकों में ब्राह्मण सामाजिक प्रभाव रखते हैं. बीजेपी की नई राज्यसभा सूची में दो ब्राह्मण चेहरों को जगह मिलना ऐसे समय में हुआ है, जब पार्टी यूपी में ऊंची जातियों, खासकर ब्राह्मणों के बीच अपना संवाद बढ़ाने की बात कर रही है.
विकास दुबे खुद को कानपुर में ब्राह्मणों के प्रतिनिधि के तौर पर पेश करता था.
बीजेपी की राधाकांत ओझा के साथ गोपी कृष्ण पांडेय को भी राज्यसभा भेजने की तैयारी बताती है कि यूपी चुनाव में ब्राह्मण वोट बैंक पार्टी की चिंता है. पांडेय की पहचान लंबे समय से संगठन के लिए काम करने वाले नेता की है. बीजेपी ने इस बार कई ऐसे लोगों को राज्यसभा का टिकट दिया है जो लंबे समय से पार्टी संगठन में सक्रिय रहे हैं. पांडेय का बलिया से संबंध और कानपुर में संगठनात्मक सक्रियता बीजेपी के लिए दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ती है. साथ ही किसान मोर्चा में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाल चुके पांडेय गांव-देहात में बीजेपी के लिए तुरुप का एक्का साबित हो सकते हैं. इसलिए गोपी कृष्ण पांडेय को सिर्फ ब्राह्मण कार्ड कहना उनकी भूमिका को छोटा करके देखना होगा. क्योंकि वह संगठन, किसान मोर्चा और पुराने पार्टी नेटवर्क से जुड़े चेहरे भी हैं. इसलिए 2027 से पहले बीजेपी की रणनीति को सिर्फ विकास दुबे एनकाउंटर की प्रतिक्रिया के तौर पर देखना सही नहीं होगा.