स्पेन में 23 सितंबर को एक तस्वीर वायरल हुई. तस्वीर थी एक 87 साल की बूढ़ी औरत की, जिसे स्ट्रैचर पर डालकर उसके घर से बाहर निकाला गया. इस एक तस्वीर ने स्पेन की सत्ता में ऐसा भूचाल पैदा किया कि प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज को सोमवार को ही देश में समय से पहले चुनावों की घोषणा करनी पड़ी. स्पेन में अब 29 नवंबर को चुनाव होंगे. इन चुनावों के साथ ही मौजूदा संसदीय कार्यकाल 6 महीने पहले ही खत्म हो जाएगा. ये सब स्पेन की सत्तारूढ़ सोशलिस्ट वर्कर्स पार्टी ने तब किया है, जब एक हफ्ते पहले वो देश में घरों की कमी की समस्या से निपटने के लिए प्रस्तावित 2 कानूनों पर संसद में समर्थन पाने में नाकामयाब रहे. यही है स्पेन की वो सबसे बड़ी परेशानी जिसने लाखों लोगों को सड़कों पर उतरने को मजबूर कर दिया है. घरों की कमी और बेहद महंगे किराए.
क्या हुआ था 87 साल की मारिकार्मोन के साथ
87 साल की मारिया डेल कारमेन अबास्कल एक दिव्यांग हैं और स्पेन के मैड्रिड के रेटिरो इलाके में रहती थीं. मारिया को स्पेन में सिर्फ मारिकार्मेन के नाम से जाना जाता है. मारिया के पिता ने ये मकाल लीस पर लेकर 1956 में अपनी बेटी को दिया था और पिछले 70 सालों से वो इसी घर में रह रही थीं. सालों से इस घर का किराया काफी कम था लगभग 500 यूरो यानी 53,970 रुपए था. लेकिन 2018 में एक इनवेस्टमेंट कंपनी ने ये मकान खरीद लिया और अचानक किराया बढ़ाकर 1650 यूरो यानी 1.78 लाख रुपए कर दिया. जबकि मारिया एक पेंशनर हैं, जिनकी मासिक पेंशन ही 1350 यूरो थी. मारिया किराया नहीं दे पाईं तो 23 सितंबर को उन्हें स्ट्रेचर पर डालकर घर से निकाल दिया. मारिया की ये एक तस्वीर वायरल हुई और पूरे स्पेन में जैसे गुस्से का गुबार उबल गया.
87 साल की मारिया डेल कारमेन अबास्कल एक दिव्यांग हैं और स्पेन के मैड्रिड के रेटिरो इलाके में रहती थीं. (फोटो साभार रायटर्स)
एक औरत की परेशानी पर क्यों भड़का देश?
87 साल की पेंशनर मारिया अबास्कल अगर अपनी पूरी पेंशन देकर भी घर का किराया नहीं दे सकती तो ये मामला सिर्फ एक परिवार का नहीं है. इसी बात ने पहले मैड्रिड और फिर स्पेन के कई शहरों के लोगों को महंगे किराए और मकानों की लगातार बढ़ती देशव्यापी समस्या से जोड़ दिया. ये मामला धीरे-धीरे देश में आवास संकट का प्रतीक बन गया और विद्रोह का रूप विकराल होता चला गया. दरअसल स्पेन में पिछले 10 सालों में मकानों के किराए लगभग दोगुना हो गए हैं. किराए की इसी बढ़ती दर की वजह से कई लोगों को घर से निकाला जा रहा है.
सिर्फ किराया ही नहीं, घर खरीदना भी बेहद महंगा हो गया है. पिछले 10 साल में घरों के दाम 227.9 प्रतिशत बढ़ गए हैं. 2016 में एक घर प्रति वर्ग मीटर €2,839 (लगभग 3.06 लाख रुपये) में बिकता था. इस अगस्त में ये दाम बढ़कर €6,471 (लगभग 6.99 लाख रुपये) प्रति वर्ग मीटर हो गए हैं. सबसे बड़ी परेशानी ये है कि ये कीमतें आम आदमी की सालाना आय के मुकाबले बहुत ज्यादा हैं. बैंक ऑफ स्पेन के अनुसार, फिलहाल लगभग 7.5 लाख घरों की कमी है, जो 2028 तक बढ़कर 10 लाख से ज्यादा हो जाएगी. ये इटली की कमी से लगभग दोगुनी है. स्पेनिश पत्रकार जोर्ज डियोनी लोपेज़ ने वैनिटी फेयर में लिखा, “स्पेन ऐसा देश है, जहां लोगों के पास अपने घर हैं. दूसरे यूरोपीय देशों के मुकाबले यहाँ जो भी सरकारी आवास बने, उनमें से ज्यादातर निजी हाथों में चले गए. किराए पर रहने के मुकाबले अपना घर खरीदने की चाह हमेशा से ही लोगों में रही है. घर हमारी बचत का तरीका होते हैं और यही पीढ़ियों के बीच संपत्ति पहुंचाने का मुख्य साधन भी है.’
ये मामला धीरे-धीरे देश में आवास संकट का प्रतीक बन गया और विद्रोह का रूप विकराल होता चला गया. (फोटो साभार रायटर्स)
स्पेन में मचे विद्रोह के बीच सरकार ने अबास्कल को राहत देते हुए फिर से उसी घर में रहने की अनुमति दी है. लेकिन इस चिंगारी से जो आग लगी वो अब बुझ नहीं रही है. स्पेन के कई शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं. कुछ तो मैड्रिड के सरकारी दफ्तर के सामने टेंट लगाकर रहने लगे हैं. जबकि बार्सीलोना जैसे शहरों में लोग सड़कों पर प्रदर्शन निकाल रहे हैं.
विद्रोह बढ़ा तो प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ की सरकार ने 2 अक्टूबर को संसद में दो आपात कानून पेश किए.
1. कमजोर लोगों को बेदखल न करने का नियम.
2. किराये के अनुबंध अपने-आप रिन्यू होने का प्रावधान.
लेकिन बहुतम न मिल पाने के चलते पेड्रो सरकार संसद में इन दोनों ही कानूनों को पास नहीं करा पाई. इससे लोगों का गुस्सा और बढ़ गया और प्रदर्शन बढ़ने लगे. इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री ने लगभग 8 महीने पहले ही चुनावों की घोषणा कर दी. एक टेलीविज़न संबोधन में प्रधानमंत्री सांचेज ने कहा, ‘हमें लोगों का समर्थन दोबारा हासिल करने की जरूरत है. हमें लोगों को जुटाना होगा और संसद में बहुत बड़ा प्रगतिशील बहुमत जीतना होगा. ऐसा बहुमत जो हमें स्वार्थी हितों पर काबू पाने, नए सामाजिक सुधार लाने और स्पेन को बदलते रहने की ताकत दे.’ 2018 से सत्ता में बेटे प्रधानमंत्री सांचेज ने इस चुनावी घोषणा के साथ बड़ा दाव चला है. अब देखना है कि स्पेन की जनता उनके नसीब में फिर से बहुमत की सत्ता लिखती है या अबास्कल की तरह पेड्रो की सरकार को स्ट्रेचर पर डालकर सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाती है.