टीचिंग छोड़ टिफिन सेंटर से शुरू किया बिजनेस, लोगों ने कहा था मत खोलो रेस्टोरेंट, आज गाड़ी बंगला सब खरीद लिया

टीचिंग छोड़ टिफिन सेंटर से शुरू किया बिजनेस, लोगों ने कहा था मत खोलो रेस्टोरेंट, आज गाड़ी बंगला सब खरीद लिया


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Tiffin To Restaurant Business: कहते हैं कि सफलता चार दिन में नहीं मिलती. इसमें संघर्ष, त्याग, धैर्य और जुनून की आवश्यकता पड़ती है. ऐसी ही कुछ सागर के सिविल लाइन में राधे रेस्टोरेंट चलाने वाली अर्चना श्रीवास्तव की कहानी है. जिन्होंने 18 साल पहले 12 टिफिन से टिफिन सेंटर की शुरुआत की थी और 6 साल पहले रेस्टोरेंट शुरू किया. अब रोजाना उनके यहां 400 लोग आकर मनपसंद खाना खाते हैं और वह 12 लोगों को रोजगार दे रही हैं. शुरुआत में अर्चना को लोग रेस्टोरेंट खोलने के लिए मना करते थे लेकिन उन्हें अपने पति राजेश श्रीवास्तव का साथ मिला. दोनों ने मिलकर न सिर्फ इस रेस्टोरेंट की शुरुआत की बल्कि आज शहर की नई पहचान बन चुका है.

अर्चना श्रीवास्तव कहती हैं कि पहले उन्होंने प्राइवेट स्कूल में 3 साल तक टीचिंग का काम किया. इस दौरान सरकारी नौकरी की भी तैयारी करती रही लेकिन नौकरी नहीं लगी. धीरे-धीरे बच्चे बड़े हो रहे थे उन्हें अच्छी शिक्षा देनी थी इसके लिए हम लोग 2007 में बंडा से सागर आ गए. साल भर तो कुछ नहीं किया लेकिन इसके बाद 12 टिफिन से शुरुआत हुई.

एक महिला को काम पर लगाया. हम लोग भी साथ में काम करते थे लेकिन खाना की क्वालिटी अच्छी होने की वजह से लोगों को हमारे टिफिन पसंद आने लगे और फिर यूनिवर्सिटी पुलिस लाइन, कई सरकारी कार्यालय में टिफिन जाने लगे. काम चल गया तो 8 से 10 लोगों को हम लोग काम दे रहे थे तभी 2020 में अचानक से कोरोना आ गया तब सब कुछ बंद हो गया और हम लोगों को अपने गांव वापस लौटना पड़ा.

जब लॉकडाउन खत्म हुआ तो दोबारा से सागर आए, टिफिन की कमाई से जो जमा पूंजी रखी हुई थी उसमें करीब 8 लाख खर्च करके छोटा सा रेस्टोरेंट शुरू किया. धीरे-धीरे रेस्टोरेंट में हमारा खाना लोगों को पसंद आने लगा, ग्राहक बढ़ते गए. हम लोगों ने रेस्टोरेंट बढ़ा कर दिया. काम करने वाले कर्मचारी भी बढ़ा दिए. दिन भर में रोजाना लगभग 400 ग्राहक खाना खाने के लिए आते हैं. हम लोग क्वालिटी का पूरा ध्यान रखते हैं साफ सफाई रखते हैं और भी अन्य तरह से ग्राहक को परेशानी ना हो इस चीज का भी ध्यान देते हैं. कभी किसी के पास पैसे कम होते हैं तो कम पैसे भी ले लेते हैं, कहीं पार्टी होती है या कुछ और चीज तो खाना का ऑर्डर भी हम लोगों के लिए मिलता है.

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अर्चना अपने पति राजेश श्रीवास्तव के साथ मिलकर पिछले 6 साल से इस रेस्टोरेंट को संचालित कर रही हैं. अर्चना कहती हैं कि जब इसकी शुरुआत कर रहे थे तब लोग ताना देते थे कि रेस्टोरेंट मत खोलो पैसा खर्च हो जाएगा चल नहीं पाएगा. लेकिन हम लोगों ने किसी की नहीं सुनी आज हम लोगों के पास अच्छी-अच्छी टू व्हीलर गाड़ी है, फोर व्हीलर है, प्लॉट खरीद लिया है, मकान बनवा रहे हैं और आर्थिक स्थिति में काफी सुधार आ गया है.

अर्चना के पति राजेश कहते हैं कि हम लोग अपने कर्मचारियों से घर जैसा व्यवहार रखते हैं और जब कभी कोई कर्मचारी नहीं आता है तो हम लोग सारा काम कर लेते हैं, चाहे रोटी बनाने को हो किसी भी तरह की सब्जी हो या फिर कभी जरूरत पड़ती है तो बर्तन भी साफ कर लेते हैं. आज हमारे बच्चे इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ाई कर चुके हैं, एक प्राइवेट नौकरी करने लगा है दूसरा यूनिवर्सिटी में है.



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