मुंबई की सुबह, समंदर किनारे का सुख और गाड़ी ड्राइव करने का आनंद. पहले जब मुंबई से दक्षिण भारत की ओर गाड़ी बढ़ाने की चाहत होती थी तो लोग रास्ते और समय का सोचकर ठिठक जाते थे. कभी यही सफर लंबा और थकाने वाला हुआ करता था. रास्ते में शहर, पहाड़, समंदर किनारा, बारिश और ट्रैफिक सबका अनुभव अलग होता थे. लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. मुंबई से कन्याकुमारी तक करीब 1619 किलोमीटर का इकोनॉमिक कॉरिडोर पश्चिमी तट को नई रफ्तार देने की तैयारी में है. दावा है कि बेहतर सड़क संपर्क से मुंबई से कन्याकुमारी का सफर करीब 22 घंटे में पूरा किया जा सकेगा. यानी एक तरफ समुद्र और दूसरी तरफ सड़क. बीच में चार राज्य. महाराष्ट्र से शुरू होने वाली यह यात्रा कर्नाटक, केरल होते हुए तमिलनाडु के कन्याकुमारी तक पहुंचती है. रास्ता सिर्फ दूरी नहीं घटाएगा. इसका असर माल ढुलाई, कारोबार और पर्यटन पर भी पड़ सकता है.
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार पहले हर घंटे की देरी का मतलब अतिरिक्त ईंधन और ज्यादा खर्च था. अब सड़क बेहतर होगी तो वही ट्रक कम समय में दक्षिण तक पहुंच सकेगा. रास्ते में रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग आएंगे. फिर गोवा का टूरिस्ट क्षेत्र दिखेगा. आगे मंगलुरु का बंदरगाह मिलेगा. केरल में कोच्चि और विझिंजम जैसे बड़े बंदरगाह जुड़ेंगे. आखिर में तमिलनाडु का समुद्री इलाका और कन्याकुमारी आएगा. यही वजह है कि मुंबई-कन्याकुमारी आर्थिक गलियारे को केवल एक सड़क परियोजना की तरह नहीं देखा जा रहा. इसके पीछे तटीय इलाकों के कारोबार को जोड़ने और माल की आवाजाही आसान बनाने की बड़ी योजना है.
पहले हर घंटे की देरी का मतलब अतिरिक्त ईंधन और ज्यादा खर्च था. (सांकेतिक फोटो AI)
चार राज्यों को जोड़ता 1,619 KM का रास्ता
मुंबई-कन्याकुमारी इकोनॉमिक कॉरिडोर महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु को जोड़ने वाली बड़ी सड़क कड़ी है. इसका मुख्य आधार पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग-66 से जुड़ा मार्ग है. कई हिस्सों में सड़क को चौड़ा करने, बाइपास बनाने और यातायात व्यवस्था सुधारने का काम चल रहा है. भारतमाला परियोजना के तहत विकसित किए जा रहे इस नेटवर्क का मकसद तटीय इलाकों को बड़े शहरों, बंदरगाहों और औद्योगिक क्षेत्रों से बेहतर तरीके से जोड़ना है. मुंबई से शुरू होकर यह मार्ग पश्चिमी तट के लंबे हिस्से को कवर करता है. रास्ते में कई महत्वपूर्ण शहर और व्यापारिक केंद्र आते हैं. सड़क का विस्तार पूरा होने के बाद लंबी दूरी की यात्रा में समय बचने के साथ माल ढुलाई की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है.
महाराष्ट्र में फल, मछली और उद्योग को मिलेगी रफ्तार
महाराष्ट्र में मुंबई और पनवेल के बाद यह रास्ता रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जैसे कोंकण के इलाकों से जुड़ता है. यह क्षेत्र आम, काजू, मछली और दूसरे समुद्री उत्पादों के लिए जाना जाता है. लंबे समय तक यहां बारिश और घुमावदार सड़कों के कारण माल पहुंचाने में मुश्किल आती रही है. बेहतर सड़क संपर्क से इन उत्पादों को बड़े बाजारों तक तेजी से पहुंचाने में मदद मिल सकती है. मुंबई के बंदरगाहों के साथ सड़क की मजबूत कड़ी बनने से निर्यात और आयात से जुड़े कारोबार को भी फायदा हो सकता है. छोटे कारोबारी और किसान भी बड़े बाजारों तक अपनी पहुंच बढ़ा सकते हैं. यानी इस हिस्से में सड़क सिर्फ गाड़ियों को नहीं दौड़ाएगी, स्थानीय कारोबार को भी गति दे सकती है.
गोवा से मंगलुरु तक बदलेगी तटीय तस्वीर
महाराष्ट्र के बाद रास्ता गोवा की तरफ बढ़ता है. पणजी और मडगांव जैसे इलाके पर्यटन के लिए मशहूर हैं, लेकिन सड़क संपर्क का महत्व इससे कहीं ज्यादा है. बेहतर मार्ग से पर्यटकों के साथ मालवाहक वाहनों की आवाजाही भी आसान होती है. इसके बाद कर्नाटक का तटीय क्षेत्र आता है. मंगलुरु इस पूरे नेटवर्क का अहम पड़ाव है. यहां का बंदरगाह समुद्री कारोबार के लिए महत्वपूर्ण है. कॉफी, काजू, समुद्री उत्पाद और दूसरे सामान को देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने में सड़क संपर्क की भूमिका बढ़ सकती है. कर्नाटक के उडुपी, दक्षिण कन्नड़ और उत्तर कन्नड़ जैसे जिलों को भी बेहतर संपर्क से फायदा मिलने की उम्मीद है. इससे तटीय कारोबार और पर्यटन दोनों को नई गति मिल सकती है.
केरल में बंदरगाहों से जुड़ेंगे बाजार
केरल पहुंचते ही इस गलियारे की भूमिका और बड़ी हो जाती है. कोच्चि बंदरगाह और विझिंजम अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह समुद्री कारोबार के बड़े केंद्र हैं. विझिंजम की खासियत यह है कि यहां बड़े कंटेनर जहाजों से जुड़ा कारोबार विकसित हो रहा है. सड़क संपर्क मजबूत होने पर बंदरगाह से निकला सामान केरल के अलावा दूसरे राज्यों के बाजारों तक तेजी से पहुंचाया जा सकता है. कोझिकोड, कोच्चि, अलप्पुझा, कोल्लम और तिरुवनंतपुरम जैसे शहर इस तटीय संपर्क से जुड़े हैं. मछली और दूसरे जल्दी खराब होने वाले सामान के लिए समय बचना खास मायने रखता है. ठंडे वाहनों से सामान कम समय में बाजार तक पहुंच सके तो कारोबारियों का नुकसान घट सकता है.
तमिलनाडु में कन्याकुमारी बनेगा दक्षिणी सिरा
केरल के बाद सड़क तमिलनाडु की तरफ बढ़ती है और आखिर में कन्याकुमारी पहुंचती है. रास्ते में तिरुनेलवेली, तूतीकोरिन और दूसरे दक्षिणी जिले महत्वपूर्ण पड़ाव बनते हैं. तूतीकोरिन यानी थूथुकुडी का बंदरगाह समुद्री व्यापार के लिहाज से अहम है. यहां से समुद्री उत्पाद और औद्योगिक सामान की आवाजाही होती है. कन्याकुमारी पहुंचकर यह सड़क देश के दक्षिणी छोर से जुड़ती है. यहां अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर का संगम दिखाई देता है. यही जगह इस पूरे आर्थिक गलियारे को एक अलग पहचान देती है. पर्यटन के साथ स्थानीय कारोबार और समुद्री गतिविधियों को बेहतर सड़क संपर्क का लाभ मिल सकता है.
22 घंटे का सफर कितना बदलेगा?
अगर सड़क नेटवर्क पूरी तरह आधुनिक और सुगम हो जाता है, तो मुंबई से कन्याकुमारी के बीच यात्रा का समय काफी घट सकता है. करीब 22 घंटे में सफर पूरा होने की बात इसी बेहतर संपर्क की संभावित तस्वीर दिखाती है. लेकिन असली फायदा सिर्फ यात्री के समय की बचत नहीं है. ट्रक के लिए कम समय का मतलब कम ईंधन खर्च और कम परिचालन लागत भी हो सकता है. माल जल्दी पहुंचेगा तो कारोबारियों को भंडारण और देरी से होने वाले नुकसान में भी राहत मिल सकती है. इसी वजह से आर्थिक गलियारे का असर चार राज्यों के छोटे शहरों और जिलों तक जाने की उम्मीद है. हालांकि जमीन अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी, निर्माण में देरी और मानसून जैसी चुनौतियां अभी भी परियोजना की रफ्तार को प्रभावित कर सकती हैं.
सड़क से आगे की कहानी है ये कॉरिडोर
मुंबई-कन्याकुमारी आर्थिक कॉरिडोर की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह अलग-अलग अर्थव्यवस्थाओं को एक रास्ते पर लाता है. महाराष्ट्र का फल और समुद्री कारोबार, कर्नाटक की कॉफी और बंदरगाह गतिविधियां, केरल के मसाले और समुद्री उत्पाद तथा तमिलनाडु का उद्योग और समुद्री व्यापार एक ही तटीय नेटवर्क से जुड़ते हैं. जब सड़क, बंदरगाह और बाजार एक-दूसरे से बेहतर जुड़ते हैं तो माल की आवाजाही आसान होती है. पर्यटन को भी फायदा मिल सकता है. मुंबई से निकलने वाला यात्री पश्चिमी तट को पार करते हुए कन्याकुमारी तक पहुंच सकता है. यानी 1619 किलोमीटर की यह सड़क सिर्फ दो शहरों के बीच दूरी नहीं जोड़ती. यह चार राज्यों की आर्थिक गतिविधियों को एक लंबी तटीय कड़ी में पिरोने की कोशिश है.