Poultry Farming Tips: मुर्गी पालन में नहीं होगा नुकसान, बस इन 7 बातों का रखें ध्यान, बीमारी से बचेंगी मुर्गियां

Poultry Farming Tips: मुर्गी पालन में नहीं होगा नुकसान, बस इन 7 बातों का रखें ध्यान, बीमारी से बचेंगी मुर्गियां


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Poultry Farming Tips: मुर्गी पालन से अच्छा उत्पादन लेने के लिए सिर्फ दाना-पानी देना ही काफी नहीं है, बल्कि साफ-सफाई, मौसम और बीमारी से बचाव पर भी ध्यान देना जरूरी है. उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश कुमार तिवारी के मुताबिक, उम्र के हिसाब से संतुलित आहार, साफ पानी और पर्याप्त जगह मिलने से मुर्गियों को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है. उन्होंने मुर्गी पालन शुरू करने वाले किसानों के लिए कई जरूरी टिप्स बताए हैं.

Poultry Farming Tips: खेती के साथ मुर्गी पालन किसानों के लिए आमदनी बढ़ाने का अच्छा जरिया बन सकता है. लेकिन मुर्गियों से अच्छा उत्पादन लेने और नुकसान से बचने के लिए उनकी सही देखभाल करना बहुत जरूरी है. दाना-पानी से लेकर साफ-सफाई, मौसम और बीमारी तक, छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर मुर्गियों को स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है.

उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश कुमार तिवारी ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि मुर्गी पालन में सही प्रबंधन का सीधा असर मुर्गियों की सेहत और उत्पादन पर पड़ता है. अगर मुर्गियों को उम्र के हिसाब से सही आहार मिले, साफ पानी मिले और रहने की जगह साफ रहे तो बीमारी का खतरा भी कम होता है. मुर्गियों की अच्छी बढ़त और अंडा उत्पादन के लिए पौष्टिक और संतुलित दाना देना जरूरी है. चूजों और बड़ी मुर्गियों की आहार जरूरत अलग होती है, इसलिए उम्र के अनुसार ही दाना देना चाहिए. अंडा देने वाली मुर्गियों के आहार में कैल्शियम के साथ जरूरी पोषक तत्व भी पर्याप्त मात्रा में होने चाहिए. दाने को हमेशा सूखी और साफ जगह पर रखना चाहिए. नमी वाली जगह पर रखा दाना खराब हो सकता है, जिससे मुर्गियों की सेहत पर असर पड़ सकता है.

मुर्गियों को हर समय साफ और ताजा पानी मिलना चाहिए. खासकर गर्मी के मौसम में उन्हें ज्यादा पानी की जरूरत पड़ती है, इसलिए पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए. पानी रखने वाले बर्तनों की भी नियमित सफाई जरूरी है. गंदा पानी पीने से मुर्गियों में बीमारी फैलने का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए पानी के बर्तन में गंदगी जमा न होने दें और समय-समय पर उसे साफ करते रहें. मुर्गियों के रहने की जगह साफ और सूखी होनी चाहिए. फर्श पर गंदगी, पानी या नमी जमा नहीं होने दें. अगर बिछावन गीली हो जाए तो उसे समय-समय पर बदलते रहें. मुर्गी घर में हवा आने-जाने की अच्छी व्यवस्था भी होनी चाहिए. हालांकि, ठंडी हवा का सीधा झोंका मुर्गियों पर नहीं पड़ना चाहिए. साफ-सफाई और सही हवा की व्यवस्था से मुर्गियों को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है.

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गर्मी के मौसम में मुर्गियों को हवादार और अपेक्षाकृत ठंडी जगह में रखना चाहिए. बरसात में मुर्गी घर के आसपास पानी जमा न होने दें और नमी से बचाने पर ध्यान दें. वहीं सर्दी में खासकर छोटे चूजों को ठंड से बचाने की उचित व्यवस्था करनी चाहिए. मौसम के हिसाब से मुर्गी घर और देखभाल में बदलाव करने से मुर्गियों पर मौसम का असर कम होता है और उन्हें स्वस्थ रखने में मदद मिलती है. अगर कोई मुर्गी सुस्त दिखाई दे, दाना-पानी कम करे या उसके व्यवहार में बदलाव नजर आए तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. जरूरत पड़ने पर बीमार मुर्गी को बाकी मुर्गियों से अलग रखें और पशु चिकित्सक से सलाह लें. मुर्गियों का टीकाकरण भी विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार समय पर कराना चाहिए. समय पर टीकाकरण और बीमारी के शुरुआती लक्षणों पर ध्यान देने से बड़े नुकसान से बचने में मदद मिलती है.

मुर्गी घर में जरूरत से ज्यादा मुर्गियां रखने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है. ज्यादा भीड़ होने पर मुर्गियों को पर्याप्त जगह नहीं मिलती और दाना-पानी के साथ हवा की व्यवस्था भी प्रभावित होती है. इसलिए मुर्गियों की संख्या के हिसाब से पर्याप्त जगह रखना जरूरी है. इससे मुर्गियों को आराम से रहने की जगह मिलती है और बीमारी फैलने का खतरा भी कम होता है.

मुर्गी पालन शुरू करने से पहले चूजों, दाने, दवा, बिजली और दूसरे जरूरी खर्चों का अनुमान लगा लेना चाहिए. इसके साथ ही अंडे और मुर्गियों की बिक्री कहां और किस बाजार में करनी है, इसकी जानकारी भी पहले से रखना फायदेमंद रहता है. रोजाना होने वाले खर्च और मुर्गियों से मिलने वाले उत्पादन का रिकॉर्ड रखना चाहिए. इससे किसान को अपनी लागत और आमदनी का सही हिसाब रखने में आसानी होगी और मुर्गी पालन को बेहतर तरीके से चलाया जा सकेगा.

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