ये भारतीय राज्य कभी था डायनासोर का ठिकाना… करोड़ों साल पुराने राज आज भी जिंदा
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क्या आपने कभी सोचा है कि जिस तेलंगाना की जमीन पर आज हम घूमते हैं, वहां कभी खूंखार डायनासोर राज करते थे? मनचेरियल जिले का वेमनापल्ली इलाका आज भले ही अपनी हरियाली और प्राणहिता नदी के लिए जाना जाता हो, लेकिन इसका पास्ट किसी ब्लॉकबस्टर ‘जुरासिक पार्क’ मूवी से कम नहीं है. यहां करोड़ों साल पुराने डायनासोर के अवशेषों से लेकर 12वीं शताब्दी के काकतीय काल के इतिहास तक का ऐसा खतरनाक तड़का है, जो आपके होश उड़ा देगा.
वेमनापल्ली का जुरासिक पार्क वाला सीन: क्या आपको पता है कि कभी अपने देश के तेलंगाना में भी खूंखार डायनासोर खुलेआम घूमा करते थे? मनचेरियल जिले का वेमनापल्ली इलाका आज भले ही अपनी हरियाली के लिए जाना जाता हो, लेकिन इसका पास्ट एकदम ‘जुरासिक पार्क’ मूवी जैसा खतरनाक और रोमांचक है. यहां की प्राचीन घाटियों में करोड़ों साल पुराने जीवों के ऐसे सबूत दबे हैं, जो किसी के भी होश उड़ा सकते हैं. (Pic: national history museum)
1984 में हुई थी डायनासोर की तगड़ी खोज: लोकल रिपोर्ट्स की मानें तो साल 1984 में जियोलॉजी और ऑर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने मंगेनापल्ली के जंगलों में डायनासोर के अवशेष खोज निकाले थे. उस दौर में करीब 14 मीटर लंबे और 5.5 मीटर ऊंचे इन विशालकाय अवशेषों का मिलना पूरे देश में सनसनी फैला गया था. यह इस बात का सबूत है कि इस धरती पर कभी असली मॉन्स्टर्स राज किया करते थे.
प्राणहिता नदी किनारे छिपा है खजाना: महाराष्ट्र बॉर्डर के पास बहने वाली प्राणहिता नदी के आसपास का एरिया सिर्फ खूबसूरत ही नहीं बल्कि रहस्यों का खजाना है. डायनासोर के ये प्राचीन अवशेष सिर्फ एक जगह नहीं बल्कि सुम्पुटाम, ओड्डूगुडेम और मंगेनापल्ली जैसे इलाकों में फैले हुए हैं. नदी बेसिन का यह पूरा बेल्ट किसी टाइम-ट्रैवल मशीन की तरह है, जो सीधे आपको प्रागैतिहासिक युग की सैर करा देता है. (Reuters)
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पत्थर बन चुके पेड़ों का अजब गजब खेल: यहां सिर्फ डायनासोर की हड्डियां ही नहीं मिलीं बल्कि पेड़ों के फोजिल्स यानी जीवाश्म भी अजीबोगरीब आकृतियों में मिले हैं. ओड्डूगुडेम और सुम्पुटाम की धाराओं के पास मिलने वाले इन जीवाश्मों के शेप इतने अजीब हैं कि देखने में बिल्कुल मछली, स्टारफिश और कछुओं जैसे लगते हैं. नेचर का यह गजब का आर्ट देखकर हर कोई हैरान रह जाता है कि आखिर ये सब कैसे हुआ.
प्रलयकारी बाढ़ और दबे हुए पेड़ों का राज: लोकल लोगों का मानना है कि सदियों पहले जब भयंकर बारिश और तगड़ी बाढ़ आई होगी, तब विशालकाय पेड़ पानी और रेत की परतों के नीचे दब गए होंगे. सदियों बीतने के बाद जमीन के अंदर हुए केमिकल लोच और प्रेशर की वजह से ये जिंदा पेड़ धीरे-धीरे पक्के पत्थरों और फॉसिल्स में बदल गए. नेचर का यह ट्रांसफॉर्मेशन किसी जादू से बिल्कुल कम नहीं है.
डायनासोर से लेकर काकतीय राजवंश का वाइब: वेमनापल्ली सिर्फ डायनासोर तक लिमिटेड नहीं है, यहाँ इंसानी इतिहास का भी भौकाल है. राजाराम गांव में मिलने वाली 12वीं शताब्दी यानी काकतीय काल की दशावतार मूर्तियां इस जगह की ऐतिहासिक वैल्यू को और बढ़ा देती हैं. मतलब यहाँ करोड़ों साल पुराने जीवों के अवशेष और सदियों पुराना ह्यूमन कल्चर एक ही जगह पर तगड़ा कॉम्बिनेशन बनाते हैं. (Reuters)