नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हवाएं नए-नए मुद्दों से गरमाने लगी हैं. हाल ही में दुबई से इजराइल जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में को-पायलट के हमले के बावजूद अपनी सूझबूझ से 180 यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर (Captain Smit Machchhar) अब भारत के राजनीतिक पारे के केंद्र में आ गए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू तक पूरी दुनिया कैप्टन स्मित की बहादुरी का लोहा मान रही है. लेकिन भारत में बीजेपी ने राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की इस मुद्दे पर ‘खामोशी’ को बड़ा हथियार बनाते हुए यूपी चुनाव 2027 के सियासी अखाड़े में पटकनी देने की बिसात बिछा दी है.
कैप्टन स्मित मुच्छर के मुद्दे पर बीजेपी ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के निशाने पर लिया है. बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने 4 अक्टूबर को कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधते हुए पूछा कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और सोनिया गांधी की ओर से कैप्टन स्मित की बहादुरी को लेकर सार्वजनिक बयान क्यों नहीं आया? बीजेपी नेता बोल रहे हैं, ‘राहुल गांधी और प्रियंका गांधी गाजा के मुद्दे पर और बाटला हाउस जैसे मामलों पर तो लगातार सोशल मीडिया पोस्ट और बयान जारी करते हैं, लेकिन 180 लोगों की जान बचाने वाले भारतीय कैप्टन स्मित के लिए उनके पास एक शब्द या ट्वीट तक नहीं है.’
बीजेपी ने इसे राष्ट्रवाद बनाम तुष्टीकरण की जंग करार दिया है.
बीजेपी ने गांधी परिवार से क्यों पूछा सवाल?
बीजेपी ने इसे राष्ट्रवाद बनाम तुष्टीकरण की जंग करार दिया है. बीजेपी का कहना है कि एक तरफ वो ताकतें हैं जो जान जोखिम में डालकर देश का नाम रोशन करती हैं और दूसरी तरफ कांग्रेस का ‘वोट बैंक का डर’ है, जो उन्हें एक भारतीय जांबाज का स्वागत करने से रोक रहा है. बीजेपी ने इस सवाल को सिर्फ संवेदना तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे कांग्रेस की कथित ‘चुनिंदा संवेदना’ और वोट बैंक की राजनीति से जोड़ने की कोशिश की. सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल और प्रियंका गांधी के फलस्तीन तथा गाजा से जुड़े बयानों का हवाला देते हुए पूछा कि कैप्टन स्मित के मामले में कांग्रेस नेतृत्व ने वैसी प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी?
कांग्रेस को क्या वोट खिसकने का डर?
हालांकि कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने 2 अक्टूबर को कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की सार्वजनिक तौर पर प्रशंसा की थी. उन्होंने कहा था कि स्मित की बहादुरी, त्वरित सूझबूझ और दृढ़ कार्रवाई हमेशा प्रेरणादायी रहेगी. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि कांग्रेस की ओर से बिल्कुल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई. बीजेपी का सवाल मुख्य रूप से गांधी परिवार के शीर्ष नेताओं की व्यक्तिगत प्रतिक्रिया को लेकर है. यानी विवाद अब इस बात पर है कि किसने क्या कहा और किस स्तर पर कहा.
इमरान मसूद क्यों आए चर्चा में?
बीजेपी के हमले के बीच कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कैप्टन स्मित की बहादुरी की तारीफ की. उन्होंने कहा कि पायलट ने गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद अपनी और विमान में सवार लोगों की जान बचाने की कोशिश की. लेकिन इसके साथ ही मसूद ने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि पार्टी हर मुद्दे को राजनीतिक आयोजन के रूप में पेश करने की कोशिश करती है. उन्होंने कैप्टन स्मित के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की. यही बयान यूपी की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण हो गया है. क्योंकि इमरान मसूद सिर्फ कांग्रेस सांसद नहीं हैं, बल्कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं. इसलिए उनके बयान को बीजेपी यूपी में कांग्रेस की राजनीतिक लाइन के उदाहरण के तौर पर पेश कर सकती है.
क्या बीजेपी 2027 में ‘मच्छार मॉडल’ को मुद्दा बनाएगी?
अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि बीजेपी 2027 के यूपी चुनाव में कैप्टन स्मित मच्छार के मामले को औपचारिक चुनावी मुद्दा बनाएगी. पार्टी ने फिलहाल इस मामले को कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की प्रतिक्रिया और ‘चुनिंदा संवेदना’ के सवाल से जोड़ा है. लेकिन यूपी की राजनीति में ऐसे मुद्दों का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि यहां चुनावी बहस अक्सर राष्ट्रवाद, सुरक्षा, आतंकवाद, तुष्टीकरण, हिंदुत्व और वोट बैंक जैसे बड़े नैरेटिव से जुड़ती रही है. बीजेपी अगर आने वाले महीनों में इस मुद्दे को बार-बार उठाती है तो उसका फोकस कैप्टन स्मित की बहादुरी से ज्यादा कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रियाओं के अंतर पर हो सकता है.
यूपी चुनाव 2027 से पहले एमएलसी चुनाव में सपा-बीजेपी का महामुकाबला.
यूपी चुनाव में बन सकता है ‘नैरेटिव वॉर’ का हिस्सा
2027 का यूपी चुनाव सिर्फ सीटों और उम्मीदवारों का मुकाबला नहीं होगा, बल्कि अलग-अलग दलों के बीच नैरेटिव की लड़ाई भी होगी. बीजेपी के लिए कैप्टन स्मित मच्छार की कहानी एक भारतीय पायलट की बहादुरी, यात्रियों की सुरक्षा और संकट में लिए गए फैसलों की कहानी है. कांग्रेस की तरफ से इसका जवाब यह है कि कैप्टन स्मित की बहादुरी की पार्टी ने सार्वजनिक रूप से प्रशंसा की है और इस घटना को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए. यहीं से दोनों पार्टियों की राजनीतिक भाषा अलग होती दिखाई दे रही है.
कुलमिलाकर बीजेपी आने वाले दिनों में अगर इस मुद्दे को आगे बढ़ाती है तो उसके सामने यह सवाल रहेगा कि इसे सिर्फ तत्काल राजनीतिक बयानबाजी तक रखा जाए या इसे व्यापक राष्ट्रवाद और सुरक्षा के नैरेटिव से जोड़ा जाए. कांग्रेस के लिए चुनौती यह होगी कि बीजेपी के ‘चुप्पी’ वाले आरोप का जवाब किस तरह दिया जाए, ताकि पार्टी की ओर से कैप्टन स्मित की बहादुरी की प्रशंसा स्पष्ट रूप से सामने आए और मुद्दा अनावश्यक राजनीतिक विवाद में न बदले.