UP Chunav 2027; 200 मदरसे सील, 18 पर चला बुलडोजर… तब कहां थे अखिलेश?, ओवैसी के रडार पर PDA

UP Chunav 2027; 200 मदरसे सील, 18 पर चला बुलडोजर… तब कहां थे अखिलेश?, ओवैसी के रडार पर PDA


लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर जोरदार हमला बोला है. ओवैसी ने यूपी चुनाव में ताल ठोक रहे कथित धर्मनिरपेक्ष दलों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. रविवार 4 अक्टूबर 2026 को श्रावस्ती में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और बीजेपी दोनों पर जमकर भड़ास निकाली. ओवैसी ने आरोप लगाया कि आजादी के बाद बीते 70-75 सालों से उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समुदाय को सिर्फ ‘वोटर’ बनाकर रखने की योजनाबद्ध कोशिश की गई है. हालांकि ये बातें वह पहले भी कहते रहे हैं, लेकिन इस बार उन्होंने मुस्लिमों के साथ-साथ दलितों को भी एआईएमआईएम को वोट करने की सलाह दी है. ऐसे में सवाल यह है कि ओवैसी अचानक मुस्लिमों के साथ-साथ दलितों की पॉलिटिक्स यूपी में क्यों करने लगे हैं? क्या है इसके राजनीतिक मयने?

श्रावस्ती की जनसभा में गरजते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में हाल ही में मदरसों पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई का मुद्दा जोर-शोर से उठाया. ओवैसी ने कहा, ‘आपकी आंखों के सामने 200 से ज्यादा मदरसों को सील कर दिया गया और 18 से ज्यादा मदरसों को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया गया. लेकिन न तो समाजवादी पार्टी, न बीजेपी और न ही किसी तथाकथित सेक्युलर पार्टी ने आगे आकर हमारी मदद की. उस वक्त सपा के लोग कहां छिपकर बैठे थे?’

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि इस बार का यूपी चुनाव किसी के लिए आसान नहीं होगा.

मुसलमानों के वोटों से प्यार, न्याय से नहीं- ओवैसी

सपा के कोर वोटर्स मुस्लिम-यादव समीकरण पर सीधा प्रहार करते हुए ओवैसी ने कहा कि अब समय आ गया है कि प्रदेश का मुस्लिम समाज इन दलों की असलियत को समझे. मैं सपा से साफ कहना चाहता हूं, आपको मुसलमानों से प्यार नहीं है, आपको सिर्फ उनके वोटों से प्यार है. आप मुसलमानों को इंसाफ नहीं देना चाहते, बल्कि उन्हें राजनीतिक रूप से कमजोर बनाए रखना चाहते हैं.’

ओवैसी ने दावा किया कि सपा केवल सत्ता हासिल करने के लिए मुसलमानों का इस्तेमाल करती है, जबकि एआईएमआईएम मुसलमानों के साथ-साथ दलित भाइयों के लिए भी बराबरी के हक और न्याय की आवाज उठाती है. इसलिए मुस्लिम और दलित एक साथ मिल गए तो फिर यूपी में बाबा का बुलडोजर चलाकर कोई दिखा दे.

यूपी में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) को कमजोर करने में जुटी कांग्रेस और सपा.

ओवैसी का मुस्लिम के साथ-साथ दलित प्रेम के मायने

उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी के कमजोर पड़ने और कांग्रेस-सपा के नए गठजोड़ के बीच ओवैसी पूर्वांचल और पश्चिमांचल में मुस्लिम और दलित गठजोड़ बनाने की फिराक में हैं. ओनेसी मदरसों की सीलिंग, वक्फ संपत्तियां, लिंचिंग और कानूनी मदद के नाम पर सपा के पीडीए यानी पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक एजेंडा को टारगेट कर रहे हैं. श्रावस्ती, बलरामपुर, बहराइच में मुस्लिम समाज सपा का पारंपरिक कोर वोटर्स रहा है. ऐसे में सपा के इस वोट बैंक पर अगर सेंध लगाते हैं तो बीजेपी को इससे सीधा फायदा पहुंचेगा.

यूपी चुनाव 2027 पर क्या होगा असर?

ओवैसी पश्चिम यूपी के साथ-साथ तराई के जिलों श्रावस्ती, बहराइच, गोंडा में भी आक्रामक रैलियां करने जा रहे हैं. यह आने वाले चुनावों में समाजवादी पार्टी के लिए सिरदर्द पैदा कर सकती हैं. यदि ओवैसी मुस्लिम मतदाताओं को यह समझाने में कामयाब रहते हैं कि मदरसों और प्रशासनिक कार्यवाहियों के वक्त सपा उनके साथ खड़ी नहीं हुई, तो 2027 के विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है, जिसका सीधा नुकसान विपक्ष के वोट बैंक को और फायदा सत्तारूढ़ बीजेपी को पहुंच सकता है.

कुलमिलाकर असदुद्दीन ओवैसी जहां पहले सपा और कांग्रेस को सीट शेयरिंग को लेकर ऑफर दे रहे थे. वहीं अब ओवैसी ने खुले मंच से अखिलेश यादव पर हमला बोलना शुरू कर दिया है. ओवैसी इस बार के यूपी चुनाव में मुस्लिम ही नहीं दलितों पर भी फोकस कर रहे हैं. इससे अखिलेश यादव का पीडीए का पूरा समीकरण बिगड़ सकता है. यूपी चुनाव में 2027 में अगर ओवैसी किसी फ्रंट के साथ गठबंधन में आ जाते हैं, तो फिर मामला काफी कड़ा हो सकता है.



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