Last Updated:
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवेः उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक के लिए खास एक्सप्रेसवे बनने वाला है. इस एक्सप्रेसवे पर 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से 8 घंटे में गोरखपुर से सिलीगुड़ी पहुंचा जा सकता है. इस एक्सप्रेसवे के निर्माण में करीब 32000 करोड़ रुपये की लागत आ सकती है.
सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे जल्द होगा तैयार.
गोरखपुरः उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से शुरू होकर पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक बनने वाले एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है. सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे गोरखपुर के जगदीशपुर से शुरू होकर बिहार होते हुए पश्चिम बंगाल जाएगा. इस एक्सप्रेसवे की लंबाई 520 किलोमीटर है. भारत माला परियोजना के दूसरे फेज में सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे का निर्माण होगा. यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश को पूर्वोत्तर से जोड़ेगा. इसके शुरू होने से लोगों की यात्रा सुगम होगी. साथ ही आर्थिक विकास भी तेजी से बढ़ेगा. इस एक्सप्रेसवे की राह में 132 केवी क्षमता की चार पारेषण लाइन आ रही हैं. इनमें एक लाइन गोरखपुर और तीन लाइन कुशीनगर जिले में है. इन लाइन को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
इन जिलों से होकर गुजरेगा सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे
बता दें कि सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे बिहार के सीतामढ़ी और मधुबनी जैसे मिथिला क्षेत्र से होकर सीमांचल की तरफ बढ़ेगा. पहले से पास गोरखपुर-सिलीगुड़ी कॉरिडोर उत्तर भारत और पूर्वोत्तर के बीच सड़क संपर्क को मजबूत करेगी. बता दें कि यह एक्सप्रेसवे गोरखपुर, कुशीनगर, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, उत्तर दिनाजपुर होते हुए दार्जलिंग पहुंचेगा.
32000 करोड़ रुपये में तैयार होगा सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे
सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे 6 लेन का बनेगा. इस पर वाहनों की अधिकतम गति सीमा 120 किलोमीटर प्रटि घंटे होगी. इस एक्सप्रेसवे के निर्माण में 32000 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं. वैसे गोरखपुर से सिलीगुड़ी जाने में 15 घंटे लग जाते हैं. लेकिन इस एक्सप्रेसवे के बन जाने से गोरखपुर से सिलीगुड़ी जाने में महज 6 से 8 घंटे लगेंगे.
क्यों अहम है भारत के लिए सिलीगुड़ी
बता दें कि सिलीगुड़ी का इलाका पूर्वोत्तर भारत के लिए बहुत जरूरी है. यही वजह है कि इसे रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. भारत का चिकन नेक पश्चिम बंगाल में स्थिति सिलीगुड़ी कॉरिडोर को कहते हैं. यह देश की मुख्य भूमि को उत्तर-पूर्वी राज्यों से जोड़ता है. पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी शहर के पास जमीन की एक बहुत पतली पट्टी है. यह पूर्वोत्तर के 8 राज्यों के लिए एकमात्र रास्ता है.