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UP Election 2027: AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी को रोकने के लिए विपक्षी दलों से गठबंधन का प्रस्ताव रखा था. उन्होंने इसके लिए 2 अक्टूबर की डेडलाइन भी तय की थी. लेकिन सपा, कांग्रेस और बीएसपी समेत किसी बड़े दल से बात आगे नहीं बढ़ी. अब डेडलाइन खत्म होने के बाद AIMIM अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी में है. जानिए ओवैसी के अब अगले 5 बड़े ‘ब्रह्मास्त्र’ क्या हैं.
ओवैसी की पांच चालों से यूपी में बदलेगा मुस्लिम वोट का गणित? 2027 से पहले AIMIM ने शुरू की बड़ी तैयारी.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी के बीच असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने अपनी चुनावी गतिविधियां तेज कर दी हैं. ओवैसी ने सितंबर में कहा था कि अगर कोई पार्टी बीजेपी को रोकना चाहती है तो AIMIM के साथ आए. उन्होंने गठबंधन पर फैसला 2 अक्टूबर तक करने की बात भा कही थी. लेकिन 2 अक्टूबर को अखिलेश यादव ने साफ कर दिया कि सपा 2027 में अपने मौजूदा गठबंधन के साथ आगे बढ़ेगी. जिसके बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह था कि अब ओवैसी के अगले 5 बड़े ‘ब्रह्मास्त्र’ क्या हैं. जानते हैं पूरी बात.
200 सीटों पर उतरने की तैयारी
मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, ओवैसी का पहला बड़ा कदम बड़े स्तर पर चुनाव लड़ने की तैयारी है. AIMIM ने करीब 200 विधानसभा सीटों पर संगठन खड़ा करने का लक्ष्य रखा है. जून में AIMIM ने करीब 200 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बताई थी और साथ ही गठबंधन का विकल्प खुला रखा था. पार्टी ने यूपी को चार जोन में बांटकर संगठन मजबूत करने की बात भी कही थी. पश्चिमी यूपी और अवध के कई जिलों को खास फोकस में रखा गया है. यानी गठबंधन नहीं होने की स्थिति में AIMIM के पास अपना चुनावी ढांचा तैयार रखने की योजना पहले से है.
मुस्लिम बहुल सीटों पर सीधा फोकस
ओवैसी का दूसरा बड़ा हथियार मुस्लिम आबादी वाली सीटों पर संगठन मजबूत करना है. AIMIM ने सहारनपुर, मुरादाबाद, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, रामपुर और अमरोहा जैसे इलाकों में अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं. इन इलाकों में पार्टी बूथ स्तर तक संगठन खड़ा करने पर जोर दे रही है. ओवैसी का राजनीतिक संदेश भी इसी रणनीति से जुड़ा है. 4 अक्टूबर को बहराइच की सभा में उन्होंने कहा कि मुसलमान केवल वोट बैंक नहीं हैं और उन्हें राजनीतिक हिस्सेदारी मिलनी चाहिए. इस तरह AIMIM मुस्लिम मतदाताओं के बीच अलग राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठा रही है.
सपा से अलग राजनीतिक जगह बनाना
AIMIM का तीसरा फोकस सपा से अलग अपनी राजनीतिक जगह बनाना है. ओवैसी लगातार यह सवाल उठा रहे हैं कि मुस्लिम समाज को सिर्फ वोट के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. पार्टी का कहना है कि मुस्लिमों की अपनी राजनीतिक आवाज और हिस्सेदारी होनी चाहिए. 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में AIMIM ने 95 सीटों पर चुनाव लड़ा था. पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी और उसका वोट शेयर करीब 0.49 फीसदी रहा. इसके बावजूद कई सीटों पर AIMIM को मिले वोट चुनावी मुकाबले में चर्चा का विषय बने थे.
छोटे दलों को साथ लाने की कोशिश
चौथा बड़ा कदम छोटे और क्षेत्रीय दलों के साथ राजनीतिक समीकरण बनाने का है. AIMIM ने पहले बीएसपी के साथ गठबंधन की संभावना खुली रखी थी. पार्टी की रणनीति में दलित-मुस्लिम समीकरण की चर्चा भी सामने आई थी. हालांकि बीएसपी के साथ कोई अंतिम गठबंधन नहीं हुआ है. AIMIM की गतिविधियों में आजाद समाज पार्टी और पश्चिमी यूपी की दूसरी सामाजिक-राजनीतिक ताकतों के साथ संपर्क का पहलू भी सामने आया है. इसलिए ओवैसी का प्लान सिर्फ अकेले चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं दिखता. पार्टी एक तरफ अपना संगठन तैयार कर रही है, दूसरी तरफ संभावित साझेदारों के विकल्प भी खुले रख रही है.
गठबंधन का दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं
ओवैसी का पांचवां बड़ा कदम गठबंधन की संभावना को पूरी तरह खत्म नहीं करना है. 2 अक्टूबर की डेडलाइन के बावजूद 5 अक्टूबर को उन्होंने फिर कहा कि गठबंधन होने पर इसकी जानकारी दी जाएगी. यानी AIMIM अपना चुनावी अभियान चलाते हुए भी बातचीत की गुंजाइश बनाए हुए है. दूसरी तरफ अखिलेश यादव ने 2 अक्टूबर को AIMIM के साथ गठबंधन की संभावना को खारिज करते हुए कहा था कि सपा 2027 में उस गठबंधन के साथ आगे बढ़ेगी, जिसने 2024 में बीजेपी को यूपी में हराया था.