चार बच्चों की मौत सरकारी रिकॉर्ड से गायब, राहुल गांधी के दौरे में खुलासा, सोता हुआ स्वास्थ्य विभाग जागा

चार बच्चों की मौत सरकारी रिकॉर्ड से गायब, राहुल गांधी के दौरे में खुलासा, सोता हुआ स्वास्थ्य विभाग जागा


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बालाघाट के बैहर विधानसभा क्षेत्र के दक्षिण बैहर अंचल में पिछले तीन महीनों से मलेरिया, मीजल्स और अन्य गंभीर बीमारियों का प्रकोप है. नह्वी पंचायत के जगला गांव में बीमारी के चलते चार बच्चों की मौत हुई, लेकिन ये मौतें सरकारी आंकड़ों में दर्ज नहीं हैं. 1 अक्टूबर को राहुल गांधी के गांव पहुंचने के बाद यह मामला सामने आया. स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक अब तक 32 मौतों की पुष्टि हुई है, जबकि कांग्रेस का दावा है कि मृतकों की संख्या 43 हो चुकी है.

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बालाघाट में चार बच्चों की मौत सरकारी रिकॉर्ड से गायब

बालाघाट. बालाघाट जिले के नह्वी पंचायत के अंतर्गत आने वाला जगला गांव में बीमारी के चलते चार बच्चों की मौत हुई है लेकिन बड़ी विडंबना यह कि इन बच्चों की मौत सरकारी आंकड़ों में दर्ज ही नहीं है और इस बात का खुलासा तब हुआ जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 01 अक्टूबर को इस गांव में पहुंचे. बैहर विधानसभा के दक्षिण बैहर अंचल में पिछले तीन महीनों से मलेरिया, मीजल्स और अन्य गंभीर बीमारियों का प्रकोप जारी है. इस इलाके में मुख्य रूप से विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा और गोंड समुदाय के लोग निवास करते हैं. बीमारियों की इस लहर में सबसे ज्यादा मासूम बच्चे प्रभावित हुए हैं.

इस त्रासदी पर सरकारी आंकड़ों और स्थानीय दावों के बीच बड़ा अंतर सामने आया है जहां स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की ओर से अब तक 32 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की गई है. वहीं कांग्रेस का दावा है कि मौतों का आंकड़ा 43 तक पहुंच चुका है. क्षेत्रीय कांग्रेस विधायक संजय उइके ने बताया कि पिछले पांच महीनों में हुई 43 मौतों में से सरकार ने केवल 32 पीड़ित परिवारों को ही आर्थिक सहायता प्रदान की है. उन्होंने मांग की है कि सुदूर और आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्र होने के कारण शेष प्रभावित परिवारों को भी तत्काल राहत राशि दी जाए.

राहुल गांधी के जाने से सामने आया मौत का मामला
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौकाने वाला खुलासा 01 अक्टूबर को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के दौरे के दौरान हुआ. राहुल गांधी जब प्रभावित जगला गांव पहुंचे, तब वहां 4 बच्चों की मौत का मामला उजागर हुआ. चौंकाने वाली बात यह है कि इन बच्चों की मौत का कोई जिक्र सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं था. विपक्ष ने आरोप लगाया है कि यह मामला स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है. विभाग द्वारा घर-घर जाकर स्क्रीनिंग और बीमार बच्चों की पहचान करने के दावों के बावजूद, जगला गांव का छूट जाना व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या स्वास्थ्य अमला केवल कागजों में ही कार्यवाही दर्ज कर रहा था? राहुल गांधी के दौरे के बाद ही सोता हुआ स्वास्थ्य महकमा जागा है.



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