UP Chunav: यूपी के भाईजान कितने ताकतवर? जिनके दम पर उछल रहे मुसलमानों के ‘मसीहा’, कितनी सीटों पर मुस्लिम वोटर का दबदबा

UP Chunav: यूपी के भाईजान कितने ताकतवर? जिनके दम पर उछल रहे मुसलमानों के ‘मसीहा’, कितनी सीटों पर मुस्लिम वोटर का दबदबा


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UP Assembly Election: कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में 19 से 20 फीसदी मुसलमान हैं. ऐसे में कई राजनीतिक दलों का मुसलमान मतदाताओं पर खास नजर रहती हैं. यहां तक की उनकी घोषणापत्रों में मुसलमानों पर खास फोकस रहता है. लेकिन सवाल यह है कि पिछले तीन बार के हुए विधानसभा चुनाव में मुसलमानों ने किसका साथ दिया.

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यूपी के मुस्लिम मतदाताओं पर राजनीतिक दलों का खास फोकस.

लखनऊः उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाला है. ऐसे में राजनीतिक दल अपना-अपना समीकरण साध रहे हैं. कोई अलग से ब्राह्मणों के लिए सम्मेलन का आयोजन कर रहा है तो कोई सरकार और संगठन में अलग-अलग जातियों के नेताओं को मौका देकर अपनी सियासी गोटी सेट कर रहे हैं. इस बीच कांग्रेस पार्टी ने मुसलमान नेता को पार्टी का प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर सीधे 19 से 20 फीसदी मुस्लिम मतदाताओं को साधने की कोशिश की है. वहीं एआईएमआईएम प्रमुख असदद्दुीन ओवैसी भी लगातार मुसलमानों की बात कर रहे हैं और मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में जाकर मुसलमानों से अपील कर रहे हैं कि अभी तक जितनी पार्टियों ने तुम्हारी वजह से सरकार बनाई है, उनसे सवाल करो कि अभी तक एक भी मुस्लिम मुख्यमंत्री क्यों नहीं बनाया. अब सवाल यह है कि यूपी में क्या मुसलमान इतने ताकतवर हैं कि वह अकेले दम पर सरकार बनवा सकते हैं. कितनी सीटों पर मुस्लिम मतदाता अकेले तय करते हैं हार-जीत?

पिछले तीन चुनावों में मुसलमान बाहुल्य सीटों पर किसकी सबसे ज्यादा दिखी ताकत

चुनाव मुस्लिम बहुल/प्रभाव वाली सीटों पर प्रमुख तस्वीर
2012 सपा का दबदबा; मुस्लिम बहुल 57 सीटों के विश्लेषण में सपा ने करीब आधी सीटें जीती थीं
2017 भाजपा का बड़ा उलटफेर; 57 मुस्लिम बहुल सीटों में भाजपा ने 37 सीटें जीती थीं.
2022 सपा गठबंधन की वापसी; 57 मुस्लिम बहुल सीटों में सपा ने 34 और RLD ने 2 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा 20 पर रही

अब सवाल है कि यूपी में कितनी विधानसभा सीटों पर मुसलमान तय करते हैं हार-जीत

विधानसभा सीट मुस्लिम वोट/आबादी का अनुमान क्षेत्र
कैराना 60%+ शामली
नगीना 60%+ बिजनौर
रामपुर 50%+ रामपुर
बेहट 50% सहारनपुर
देवबंद 45-48% सहारनपुर
संभल 50%+ संभल
कुंदरकी 50%+ मुरादाबाद
मुरादाबाद ग्रामीण 50%+ मुरादाबाद
अमरोहा 50% के आसपास अमरोहा
धौलाना 50% के आसपास हापुड़
सहारनपुर ग्रामीण 50% सहारनपुर
रामपुर मनिहारान 38% सहारनपुर
धामपुर 43% बिजनौर
बिजनौर 35% बिजनौर
मुजफ्फरनगर 32% मुजफ्फरनगर
मेरठ 34% मेरठ

क्षेत्र के आधार पर मुसलमानों की कितनी प्रतिभागी

क्षेत्र मुस्लिम प्रभाव प्रमुख सीटें
सहारनपुर मंडल बहुत ज्यादा बेहट, देवबंद, सहारनपुर, नकुड़, कैराना
मुरादाबाद मंडल बहुत ज्यादा कुंदरकी, मुरादाबाद ग्रामीण, संभल, अमरोहा
बिजनौर बेल्ट बहुत ज्यादा नगीना, धामपुर, बिजनौर, नजीबाबाद
मेरठ-हापुड़ ज्यादा मेरठ, सिवालखास, किठौर, धौलाना
रामपुर बेहद ज्यादा रामपुर, स्वार, चमरौआ
मुजफ्फरनगर-शामली ज्यादा कैराना, थाना भवन, मुजफ्फरनगर
बरेली-रोहिलखंड ज्यादा बरेली, मीरगंज, भोजीपुरा आदि
तराई/पूर्वी यूपी कई सीटों पर प्रभाव बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती, उतरौला

पिछले तीन विधानसभा चुनाव में मुसलमानों ने किसका दिया साथ
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में अधिकांश पार्टियों की नजर मुसलमान मतदाताओं पर रहती है. यहां तक की घोषणापत्रों में उनके लिए अलग से घोषणाएं की जाती हैं. वैसे यूपी का चुनावी इतिहास देखे तो मुसलमान मतदाता कांग्रेस, सपा और बसपा के बीच ही शिफ्ट होते रहे हैं. 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की सरकार बनवाने में मुसलमानों का अहम योगदान रहा. यहां मुस्लिम और यादव का गठजोड़ देखने को मिला.

पिछले चुनाव में कैसा रहा मुस्लिम बाहुल सीटों पर पार्टियों का प्रदर्शन
वहीं 2017 के विधानसभा चुनाव में वोटों का ध्रुवीकरण होने से मुसलमान वोट कई पार्टियों में ट्रांसफर हो गए. 2022 के विधानसभा चुनाव में हिंदु मतदाताओं का एकीकरण हुआ तो मुसलमानों ने भी एकतरफा समाजवादी पार्टी को वोट दिया. 2022 के विधानसभा चुनाव में सर्वे के मुताबिक 83 फीसदी मुस्लिम वोट सपा के पक्ष में गया और मुस्लिम विधायकों की संख्या 23 से बढ़कर 34 हो गई थी. वहीं 2017 के चुनाव में एक तिहाई से ज्यादा मुस्लिम वोटरों वाली 82 सीटों में भाजपा ने 62 सीटें जीती थीं.

(डिस्क्लेमर- खबर में दिए गए आंकड़ों में अंतर हो सकते हैं. ये अलग-अलग रिपोर्ट से लिए गए हैं)



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