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उज्जैन सिंहस्थ कुंभ 2028 की तैयारी जोरों पर चल रही हैं. इसके लिए मध्यप्रदेश सरकार ने 13851 करोड़ रुपए का बजट बनाया है.इसके तहत सड़कों के चौड़ीकरण समेत 128 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है. इसमें इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड फोर-लेन कॉरिडोर भी शामिल है. होटल, घाट और सिविक नेटवर्क को भी बढ़ाना है. खूबसूरत दिखाना है. हम आपको उज्जैन के होने वाले कायाकल्प के बारे में विस्तार से बता रहे हैं.
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं.
उज्जैन. उज्जैन का मिज़ाज हमेशा से समय के साथ बहने के बजाय अपनी ही पुरानी लय में थम जाना रहा है. इसकी पहचान इसके पौराणिक घाटों, पुरानी संकरी गलियों, पारंपरिक बाज़ारों और ब्रिटिश दौर की इमारतों से रही है. लेकिन 2028 के ‘सिंहस्थ कुंभ’ की आहट ने इस शांत और प्राचीन मंदिर-शहर की पूरी तस्वीर बदल दी है. आज उज्जैन की गलियों में बदलाव के नक्शे खींचे जा रहे हैं, बुलडोज़र चल रहे हैं, सड़कें चौड़ी की जा रही हैं और कंक्रीट के सहारे शहर को तेज़ी से एक आधुनिक स्वरूप दिया जा रहा है. अगस्त के आखिरी में खड़े हनुमान जी मंदिर को लेकर विवाद हुआ. मंदिर तोड़ने और हनुमानजी की प्रतिमा विस्थापन को लेकर चर्चाए रहीं. इसके बाद पिछले महीने के आखिरी शाही मस्जिद के कुछ हिस्से को तोड़ने को विवाद हुआ. यह विवाद तो इतना बढ़ा कि लोगों पुलिस बल का इस्तेमाल करना पड़ा. पुलिस पर पथराव हुए. पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े. लेकिन अब हालात काबू में हैं. उज्जैन में पुलिस की टुकड़िया मार्च कर रही हैं.
उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के प्रोजेक्ट्स को लेकर शहर में एक तरफ विरोध की सुगबुगाहट है, तो दूसरी तरफ प्रशासन की रफ्तार हैरान कर देने वाली है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद अपने पैतृक घर के उन हिस्सों पर कुल्हाड़ी चलाई जो सड़क चौड़ीकरण के दायरे में आ रहे थे. यह पूरी तोड़-फोड़ और भाग-दौड़ 2028 के सिंहस्थ मेले की भव्य तैयारियों का हिस्सा है. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, मध्य प्रदेश सरकार ने 10 अलग-अलग विभागों के लगभग 13851 करोड़ रुपए की लागत वाले 128 बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दी है. मुख्यमंत्री के लिए सिंहस्थ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उनकी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता बन चुका है. लाखों-करोड़ों तीर्थयात्रियों के आने से पहले इस प्राचीन शहर की कायापलट करने के लिए पूरा प्रशासनिक तंत्र दिन-रात बस इसी एक मिशन में जुटा है. .
उज्जैन के आधुनिक इतिहास में शायद ऐसा व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पहली बार हो रहा है:
- कनेक्टिविटी: शहर को जोड़ने वाले नए हाईवे, रेलवे लाइनें और बाईपास बनाए जा रहे हैं.
- फ्लाईओवर और सड़कें: पुरानी सड़कों और पुलों को चौड़ा किया जा रहा है ताकि ट्रैफिक सुगम रहे.
- घाट और सिविक नेटवर्क: शिप्रा नदी के किनारे किलोमीटर लंबे नए घाट तैयार हो रहे हैं और ज़मीन के नीचे पानी व सीवरेज की नई लाइनें बिछाई जा रही हैं.
यह सिर्फ एक मेला क्षेत्र तैयार करने की बात नहीं है, बल्कि सदियों पुराने धार्मिक शहर का कायाकल्प कर उसे एक वर्ल्ड-क्लास ‘पिलग्रिमेज हब’ में तब्दील किया जा रहा है. कोठी रोड स्थित हरा-भरा सिंहस्थ मेला अथॉरिटी (SMA) का दफ़्तर आजकल किसी आम सरकारी ऑफिस जैसा नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर कंट्रोल रूम जैसा दिखता है. यहाँ हर पल प्रोजेक्ट अफ़सरों के अपडेट्स, साधु-संतों के साथ बैठकें और उच्चस्तरीय समीक्षाएं चलती रहती हैं. डायरेक्टर जगदीश अग्रवाल हर गुरुवार कलेक्टर और अधिकारियों के साथ तैयारियों का जायजा लेते हैं.
सिंहस्थ कुंभ की आधिकारिक घोषणा काफी पहले ही हो चुकी है.
सिंहस्थ मेला अथॉरिटी के डायरेक्टर जगदीश अग्रवाल ने कहा, “हम इस संभावना को मानकर काम कर रहे हैं कि सिंहस्थ 2028 के दौरान उज्जैन में लगभग 40 करोड़ श्रद्धालु आ सकते हैं. इसीलिए ये बड़े प्रोजेक्ट्स एक साथ और इतनी तेज़ी से चलाए जा रहे हैं.” लेकिन इतने बड़े बदलाव के साथ स्थानीय आबादी पर एक अलग ही दबाव महसूस हो रहा है. प्रशासन जिस तेज़ी से कार्रवाई कर रहा है, उससे आम लोगों में संवादहीनता की भावना बढ़ रही है. उज्जैन में दशकों बाद या शायद पहली बार इस तरह का विवाद हो रहा है.
बदलता उज्जैन: इंफ्रास्ट्रक्चर के बड़े प्रोजेक्ट्स
- मेगा रोड कॉरिडोर्स:
1692 करोड़ रुपए का उज्जैन-इंदौर सिक्स-लेन प्रोजेक्ट.
2935 करोड़ रुपए का इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड फोर-लेन कॉरिडोर.
5017 करोड़ रुपए का उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोर-लेन कॉरिडोर (98.73 किमी), जिसमें 7 फ्लाईओवर, 3 आरओबी, 8 बड़े पुल और 36 अंडरपास होंगे. इसे दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है. - होटल और कनेक्टिविटी: सड़कों का 80% काम शुरू हो चुका है और 70% लगभग पूरा है. श्रद्धालुओं के ठहराव के लिए 10 से ज्यादा फाइव-स्टार होटलों की योजना पर काम जारी है.
- शिप्रा नदी के घाट: शनि मंदिर से नागदा बाईपास तक ₹778 करोड़ की लागत से लगभग 29.2 किलोमीटर लंबे नए घाट विकसित किए जा रहे हैं. 1930 के दशक में ब्रिटिश जल कार्य विभाग (वॉटर वर्क्स) के पास बने पुराने गौघाट का पुनर्निर्माण भी दिन-रात काम करके पूरा किया जा रहा है.
- कान्ह क्लोज्ड-डक्ट डायवर्जन स्कीम: 919.94 करोड़ रुपए की इस परियोजना के तहत 30 किलोमीटर लंबा सिस्टम (जिसमें 12 किमी सुरंग शामिल है) बनाई जा रही है ताकि कान्ह नदी के दूषित पानी को शिप्रा में मिलने से रोका जा सके.
समय से होड़ और भविष्य का विजन
शहर के अंदर महाकाल क्षेत्र और पुराने बाज़ारों में सड़कों के चौड़ीकरण का काम जारी है. खजूरवाली मस्जिद से गणेश चौक और छत्री चौक के बाज़ारों तक लोग अपनी दुकानों और मकानों के हिस्सों को खुद हटा रहे हैं. मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग (PWD) के सिंहस्थ डिवीज़न के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर प्रफुल्ल जैन के मुताबिक, विभाग के पास 20 बड़े काम हैं. इनमें महाकाल लोक तक आसान पहुंच बनाने के लिए 629 मीटर लंबा हरि फाटक अंडरपास शामिल है. निर्माण में लगने वाले समय को घटाने के लिए ‘प्रीकास्ट टेक्नोलॉजी’ (बीम, कॉलम और गर्डर पहले से तैयार कर साइट पर असेंबल करना) का इस्तेमाल किया जा रहा है.