मध्य प्रदेश में कैंसर मरीजों का चौंकाने वाला आंकड़ा, इलाज के लिए प्राइवेट अस्पताल जाना मजबूरी

मध्य प्रदेश में कैंसर मरीजों का चौंकाने वाला आंकड़ा, इलाज के लिए प्राइवेट अस्पताल जाना मजबूरी


Last Updated:

Bhopal News: भोपाल में वर्तमान में लीनियर एक्सेलरेटर मशीन सिर्फ AIIMS और 4-5 प्राइवेट अस्पतालों के पास है. साल 2022 में एम्स भोपाल को छोड़कर किसी भी सरकारी अस्पताल के पास लिनेक मशीन नहीं थी. तब राज्य सरकार ने प्रदेश में नई मशीनें लगाने की योजना पर काम करना शुरू किया था.

Zoom

एक लीनियर एक्सेलरेटर मशीन की कीमत करीब 47 करोड़ रुपये है.

भोपाल. मध्य प्रदेश में कैंसर मरीजों को लेकर चौंकाने वाली खबर सामने आई है. प्रदेश में हर साल लगभग 80000 नए कैंसर मरीज बढ़ रहे हैं. वे इलाज के लिए सरकारी नहीं बल्कि महंगे प्राइवेट अस्पतालों पर निर्भर हैं. मार्च 2022 में राज्य के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लीनियर एक्सेलरेटर मशीन (लिनेक) लगाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी. इसके लिए टेंडर निकाला गया. चार साल बाद जबलपुर, इंदौर, ग्वालियर और रीवा में मशीनें पहुंच गईं लेकिन जीएमसी भोपाल को मशीन नहीं मिल सकी. फंड उपलब्ध न होना इसका कारण बताया गया जबकि अस्पताल में लीनियर एक्सेलरेटर मशीन के लिए बंकर तैयार हो चुके हैं.

दैनिक भास्कर की खबर के मुताबिक, एक लीनियर एक्सेलरेटर मशीन की कीमत करीब 47 करोड़ रुपये है. अस्पतालों में मशीन पहुंचने का मतलब यह हरगिज नहीं है कि इलाज तुरंत शुरू होने लगेगा. इसे असेंबल करने, तकनीकी जांच, कैलिब्रेशन और अनिवार्य सुरक्षा मंजूरी के बाद ही इस्तेमाल किया जा सकेगा. उदाहरण के लिए जबलपुर को मशीन तो मिल गई लेकिन इसके पूरी तरह चालू होने में और 6 महीने लगने का अनुमान जताया गया है.

भोपाल में कुछ ही अस्पतालों के पास मशीन
भोपाल में इस समय लीनियर एक्सेलरेटर मशीन सिर्फ AIIMS और 4-5 प्राइवेट अस्पतालों के पास है. साल 2022 में AIIMS भोपाल को छोड़कर किसी भी सरकारी अस्पताल में लिनेक मशीन उपलब्ध नहीं थी. तब सरकार ने राज्य में नई मशीनें लगाने की योजना पर काम करना शुरू किया था. अप्रैल 2026 तक स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल कॉलेजों को मशीन खरीद के आदेश जारी नहीं किए थे जबकि ICMR-NCRP के आंकड़ों को देखें, तो राज्य में 2020 में नए कैंसर मरीजों की संख्या 77888 थी, जो साल 2026 में करीब 85000 तक पहुंच गई है.

प्राइवेट अस्पतालों में कितना है खर्च?
प्राइवेट अस्पतालों में इस मशीन से एक बार के ट्रीटमेंट का खर्च 20000 से 25000 रुपये आता है. सरकारी अस्पताल में यह खर्च 5000 से 6000 रुपये हो जाता है. बाहर से इलाज कराने वाले मरीजों को यात्रा व्यय, कमरा, खानपान और तीमारदार का खर्च भी उठाना पड़ता है. AIIMS पर मरीजों का बहुत दबाव है. जीएमसी भोपाल में सुविधा शुरू होने से मरीजों को राहत मिलेगी. जीएमसी की डीन डॉ कविता एन सिंह ने इस बारे में कहा कि लिनेक मशीन को लेकर सरकार से बातचीत की जा रही है. बजट को लेकर सीनियर अफसरों से चर्चा कर रहे हैं. जल्द ही फैसला लिया जाएगा.

क्या है लीनियर एक्सेलरेटर मशीन?
लीनियर एक्सेलरेटर मशीन हाई-एनर्जी एक्स-रे या इलेक्ट्रॉन बीम के जरिए ट्यूमर को ज्यादा सटीकता से निशाना बनाने में मदद करती है. इसके इस्तेमाल से आसपास के स्वस्थ ऊतकों पर विकिरण का असर कम होता है.



Source link