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उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पार्टी के बीच सीट शेयरिंग को लेकर बात बन नहीं पा रही है. एक तरफ जहां कांग्रेस के नेता 150 से अधिक सीटों की मांग कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी का कहना है कि इस बार के चुनाव में जीत जरूरी है, सीट नहीं. कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने हाल ही में कहा था कि वह यूपी में सहयोगी दल हैं, भिखारी नहीं हैं.
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस में सीट शेयरिंग को लेकर बात नहीं बन पा रही है.
लखनऊः उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाला है. एक तरफ जहां एनडीए हैट्रिक लगाने की तैयारी में है. वहीं विपक्ष सत्ता की कुर्सी पर काबिज होना चाहता है. ऐसे में हर कोई अपना-अपना समीकरण साधने में लगा हुआ है. साथ ही गठबंधन को भी मजबूत कर रहा है ताकि अधिक से अधिक सीट जीती जा सके. इसी कड़ी में इंडिया गठबंधन के तहत समाजवादी पार्टी और कांग्रेस एक साथ चुनाव लड़ने वाली है. लेकिन सीट शेयरिंग पर बात नहीं बन पा रही है. कांग्रेस जहां 150 से अधिक सीटों की मांग कर रही है तो वहीं समाजवादी पार्टी का कहना है कि इस बार जीत जरूरी है. मीडिया रिपोर्टों में लगातार यह कहा जा रहा है कि समाजवादी पार्टी कांग्रेस की डिमांड पूरा करने को तैयार नहीं है. क्योंकि उसे डर है कि जितनी ज्यादा सीटें कांग्रेस को दी जाएंगी, उससे उतना ही हार का रिस्क बढ़ जाएगा. लेकिन सवाल यह है कि क्या कांग्रेस की मांग वाजिब है. क्योंकि जब हम सूबे के पिछले कुछ विधानसभा और लोकसभा चुनाव पर नजर डालते हैं तो जो आंकड़े सामने आते हैं, उससे कांग्रेस की मांग को कमजोर हो जाती है और सपा को डराने वाली है.
2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का कैसा प्रदर्शन
2024 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों को बड़ा झटका लगा था. आलम यह था कि जो पार्टी पिछले दो बार के लोकसभा चुनाव में जबरदस्त प्रदर्शन कर रही थी, वह महज 33 सीटों पर सिमटकर रह गई. वहीं समाजवादी पार्टी ने पीडीए के फॉर्मूले के तहत शानदार प्रदर्शन किया था, जिसका फायदा कांग्रेस को भी मिला था. 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने 17 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से 6 सीटों पर जीत हासिल की थी. यानी कि जीत का स्ट्राइक रेट 35 फीसदी था. अमेठी, रायबरेली, बाराबंकी, सीतापुर, सहारनपुर और इलाहाबाद लोकसभा सीट पर जीत हासिल हुई थी.
2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का अकेले दम पर प्रदर्शन
2022 के विधानसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर बात नहीं बनी और कांग्रेस पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया. कांग्रेस पार्टी सूबे के 403 विधानसभा सीटों में से 399 सीटों पर चुनाव लड़ा था. इस चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत ही खराब रहा था. कांग्रेस को महज 2 सीटों पर ही जीत मिली. एक सीट प्रतापगढ़ के रामपुर खास विधानसभा सीट पर और दूसरी जीत फरेंदा विधानसभा सीट पर मिली थी. 2022 के चुनाव में कांग्रेस का कुल वोट प्रतिशत 2.33 फीसदी रहा. यानी कि 21 लाख 51 हजार 234 वोट मिले थे. 2022 में कांग्रेस को करीब 10 सीटों पर नोटा से भी कम वोट मिले थे.
2019 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस के लिए निराशजनक
2019 के लोकसभा चुनाव में भी सूबे में मोदी लहर थी. हर तरफ भाजपा का कब्जा रहा. ऐसे में कांग्रेस के लिए चुनाव लड़ना चुनौतीपूर्ण रहा था. 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने केवल 1 सीट पर जीत हासिल की थी. उस वक्त कांग्रेस का कुल वोट प्रतिशत 6.31 से 6.36 फीसदी रहा.
2017 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस का हाल रहा खस्ता
2017 का विधानसभा चुनाव में नई सियासी परिभाषा गढ़ी जा रही थी. यहां तक की एक नारा दिया गया कि यूपी के लड़के पसंद हैं. यूपी के ये दो लड़के थे राहुल गांधी और अखिलेश यादव. लेकिन जब चुनावी नतीजे आए तो कांग्रेस को बड़ा झटका लगा और सपा को भी करारी हार मिली थी. 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी केवल 7 सीटों पर जीत हासिल की थी. कांग्रेस का इस चुनाव में कुल वोट प्रतिशत 6.25 फीसदी रहा. इस चुनाव में कांग्रेस समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ी थी. कांग्रेस 114 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ी थी.