ईरान के डर से अमेरिका ने छोड़ा फारस की खाड़ी, ब्रिटेन से हटाए B-1 बॉम्‍बर – iran missile range to 1000 KM america left persian gulf B-1 Bomber

ईरान के डर से अमेरिका ने छोड़ा फारस की खाड़ी, ब्रिटेन से हटाए B-1 बॉम्‍बर – iran missile range to 1000 KM america left persian gulf B-1 Bomber


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Iran-America War: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग खतरनाक मोड़ तक पहुंच गई है. रिपोर्ट की मानें तो अमेरिका वेस्‍ट एशिया में सैनिकों की तादाद लगातार बढ़ा रहा है. वहीं, इजरायल भी पूरी तैयारी कर रहा है. इन सबके बावजूद तेहरान के नए ऐलान से अमेरिका की हालत खराब है. यूएसए की सेना ईरान के तट से 1000 किलोमीटर दूर से ऑपरेट कर रही है, ताकि ईरानी मिसाइल की जद में आ सके. वहीं, ब्रिटेन के RAF Fairford एयर बेस से सभी 12 B-1 बॉम्‍बर भी हटा लिए हैं.

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अमेरिकी सेना ईरान के तट से 1000 किलोमीटर दूर से ऑपरेट कर रही है. इसे देखते हुए तेहरान ने अपनी मिसाइल का रेंज 1000 किलोमीटर करने के साथ ही उसकी रफ्तार बढ़ाने की भी बात कही है.

Iran-America War: अमेरिका और इजरायल ने सपने में भी नहीं सोचा था कि ईरान पर किए गए हमले का अंजाम इतना खतरनाक होगा. अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने ईरान पर हमले के तुरंत बाद कहा था कि यह मिशन कुछ ही द‍िनों में पूरा हो जाएगा. हालांकि, कई महीने बीतने के बाद भी न तो युद्ध समाप्‍त हुआ है और न ही ईरान ने घुटने टेके हैं. इसके उलट ईरान के पलटवार से अमेरिका को अपने कदम पीछे खींचने पड़े हैं. रिपोर्ट की मानें तो हाल के दिनों में यह पहला मौका है, जब अमेरिकी सेना फारस की खाड़ी से गायब है. फारस की खाड़ी को होर्मुज स्‍ट्रेट का एंट्री गेट माना जाता है. रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना मौजूदा समय में ईरान के तट से तकरीबन 1000 किलोमीटर दूर से ऑपरेट कर रही है, ताकि उसके मिसाइल की जद से बचा जा सके. इसे देखते हुए ईरान ने अपनी मिसाइल का रेंज 1000 किलोमीटर या उससे ज्‍यादा तक बढ़ाने की बात कही है. तेहरान के इस ऐलान का असर व्‍यापक असर देखने को मिल रहा है. अमेरिका ने ब्रिटेन के RAF Fairford एयर बेस से अपने सभी 12 B-1 बॉम्‍बर जेट को हटा लिया है. वहीं, इजरायल में अतिरिक्‍त जवानों को भी लैंड कराया गया है.

पहले बात करते हैं ईरान के नए मिसाइल प्रोग्राम की. तेहरान ने हालिया युद्ध से सबक लेते हुए अपनी मिसाइलों की मारक क्षमता बढ़ाकर 1,000 किलोमीटर तक करने की योजना बनाई है. ईरानी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमिनिया ने कहा है कि मिसाइलों की रेंज बढ़ाने पर काम शुरू कर दिया गया है. इसके साथ ही मिसाइलों की रफ्तार और निशाना साधने की सटीकता में भी सुधार किया जाएगा. अकरमिनिया के मुताबिक, हालिया युद्ध के अनुभवों से मिसाइलों की क्षमता बढ़ाने की जरूरत सामने आई है. उन्होंने कहा कि विरोधी सेनाएं अब ईरान के तट से काफी दूर, लगभग 1,000 किलोमीटर तक की दूरी पर सक्रिय हैं, ऐसे में ईरान अपनी मिसाइलों को अधिक दूरी तक मार करने में सक्षम बनाना चाहता है. इससे यह स्‍पष्‍ट हो गया है कि ईरानी सेना ने 1,000 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली एडवांस मिसाइलें अभी तक तैनात नहीं की हैं. फिलहाल ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की एयरोस्पेस फोर्स के पास लगभग 2,000 किलोमीटर तक मार करने वाली लंबी दूरी की मिसाइलें हैं. वहीं, ईरानी सेना मुख्य रूप से अपेक्षाकृत कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का संचालन करती है, जो खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम हैं.



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