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बिहार की गंडक नदी में तटबंध टूटने और लापरवाही बरतने पर बड़ा एक्शन हुआ है. जल संसाधन विभाग ने 7 इंजीनियरों को तुरंत सस्पेंड कर दिया है. वहीं, 1 मुख्य अभियंता के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है. आपदा के समय कर्तव्यों में ढिलाई बरतने के कारण यह कार्रवाई की गई है.
गंडक नदी में उफान की तस्वीर
पटना: बिहार में गंडक नदी का जलस्तर घटने से स्थिति अब सामान्य हो रही है. लेकिन बाढ़ के दौरान तटबंधों की सुरक्षा और राहत कार्य में भारी लापरवाही बरतने पर जल संसाधन विभाग ने सख्त कदम उठाया है. तटबंध टूटने और ढिलाई बरतने के आरोप में विभाग के 7 अभियंताओं (इंजीनियरों) को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. इसके अलावा मुजफ्फरपुर के मुख्य अभियंता और एक अधीक्षण अभियंता के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है.
इन कमियों के कारण हुई कार्रवाई
नेपाल और उत्तर प्रदेश में हुई मूसलाधार बारिश की वजह से गंडक नदी में ऐतिहासिक जलस्राव हुआ था. नेपाल के देवघाट समेत बिहार के बगहा, डुमरियाघाट, रेवाघाट और लालगंज में नदी ने जलस्तर के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए. इससे कई स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त हो गए और बाढ़ का खतरा बढ़ गया.
जांच में सामने आया कि स्थानीय अभियंताओं ने आपातकालीन कार्ययोजना को लागू करने में भारी ढिलाई दिखाई. संकट के समय मौके पर मौजूद रहकर स्थिति संभालने के बजाय कई इंजीनियर अपने दायित्व से पीछे हट गए. स्थानीय संसाधनों, मैनपावर के सही इस्तेमाल और जनप्रतिनिधियों से तालमेल बैठाने में भी भारी कमी देखी गई.
इन अधिकारियों पर गिरी गाज
निलंबित होने वालों में छपरा के कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार प्रभाकर, गोपालगंज के मो. साजिद इकबाल, सहायक अभियंता सुनील कुमार, विनोद कुमार, मो. जावेद अंसारी और कनीय अभियंता चंद्रशेखर कुमार व विकास कुमार शामिल हैं. मुजफ्फरपुर के मुख्य अभियंता कुमार मनोज गुप्ता के खिलाफ भी विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं. विभाग ने साफ किया है कि आपदा के समय ऐसी लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
अब सामान्य हो रहा है गंडक का जलस्तर
राहत की बात यह है कि सारण के रेवाघाट में नदी का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर से 177 सेंटीमीटर नीचे गिर चुका है और अब खतरे के निशान से 50 सेंटीमीटर नीचे बह रहा है. वहीं वैशाली के लालगंज में भी जलस्तर 130 सेंटीमीटर घटा है. अगले 24 घंटे में वहां भी पानी खतरे के निशान से नीचे आने की उम्मीद है.