चुनाव आयोग पर बृजभूषण शरण सिंह ने क्यों दिया यह बयान? जानें इसके मायने
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Brij Bhushan Sharan Statement CEC: बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने चुनाव आयोग को लेकर बड़ा बयान दिया है. बृजभूषण शरण सिंह का चुनाव आयोग की स्वायत्तता और नियुक्ति प्रक्रिया पर दिया बयान बीजेपी को फायदा पहुंचाएगा या नुकसान? 5 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से ठीक पहले दिए गए इस बयान के क्या मायने हैं?
बृजभूषण शरण सिंह ने चुनाव आयोग पर दिया बड़ा बयान
नई दिल्ली. अपने बयानों से लगातार चर्चा में रहने वाले बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने एक बार फिर बड़ा बयान दिया है. सिंह ने चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया और ईवीएम पर उठ रहे सवालों को लेकर विपक्ष पर करारा हमला बोला है. उन्होंने दावा किया कि 2023 से पहले जब तक संसद ने कानून नहीं बनाया था, तब तक चुनाव आयोग में नियुक्ति की कोई स्पष्ट प्रक्रिया नहीं थी और वह समय ‘हिटलरशाही तानाशाही’ जैसा था. सिंह के इस बयान का समय बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि सोमवार यानी 5 अक्टूबर 2026 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर दायर याचिकाओं पर एक महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है. आइए जानते हैं कि गोंडा से तुलना कर बृजभूषण शरण सिंह ने कैसे एसआईआर पर विपक्ष को चारों खाने चित कर दिया.
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि 2023 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद संसद ने संवैधानिक रूप से कानून बनाया. इस कानून के तहत तीन सदस्यीय समिति में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय मंत्री को शामिल किया गया. उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों नवीन चावला और एमएस गिल की नियुक्तियों का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि अतीत में कांग्रेस सरकारों के दौरान चुनाव आयुक्तों का चयन किस प्रक्रिया के तहत किया जाता था? उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से विपक्षी दलों के राजनीतिक किले एक-एक करके ढह रहे हैं, इसलिए वे EVM और चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं.
#WATCH | Gonda, Uttar Pradesh | On the ECI controversy, BJP leader Brij Bhushan Sharan Singh says, “There was a Hitler-like dictatorship in this country regarding the Election Commission when there was no law at all. Around 2023, a case went to the Supreme Court, and at that… pic.twitter.com/sXrb4tSzAq