Junior Hockey Asia Cup: शहर से कोसों दूर जशपुर जिले के कांसाबेल क्षेत्र के छोटे से गांव चिड़ोरा से निकलकर 17 वर्षीय मधु सिदार ने अपनी मेहनत और लगन से बड़ी उपलब्धि हासिल की है. किसान परिवार से आने वाली मधु ने खेलो इंडिया एक्सीलेंस सेंटर, बहतराई में प्रशिक्षण लेकर जूनियर महिला हॉकी एशिया कप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया और चीन में आयोजित प्रतियोगिता में भारत को चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई. गुरुवार को जब मधु बिलासपुर पहुंचीं तो जिला खेल परिसर से लेकर बहतराई हॉकी स्टेडियम तक उनका भव्य स्वागत किया गया. अधिकारियों, कोच और हॉकी संघ से जुड़े पदाधिकारियों ने उन्हें सम्मानित किया. इसके बाद लोकल 18 ने मधु से खास बातचीत कर उनके गांव से लेकर टीम इंडिया तक पहुंचने के संघर्ष और सफलता की कहानी जानी.
किसान परिवार से निकलीं मधु, माता-पिता ने हर कदम पर दिया साथ
मधु सिदार बताती हैं कि उनके पिता खेती-किसानी करते हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य रही है. इसके बावजूद माता-पिता ने बेटी के खेल के सपने को पूरा करने में कोई कमी नहीं छोड़ी. खेती से होने वाली आमदनी के बीच कई बार धान-चावल बेचकर भी मधु के खेल और जरूरतों के लिए पैसे जुटाए गए. मधु के मुताबिक, उनके परिवार का सपोर्ट ही उनकी सफलता की सबसे बड़ी ताकत रहा.
स्कूल के खेल से शुरू हुआ हॉकी का सफर
मधु का हॉकी सफर जशपुर के क्रीड़ा परिसर से शुरू हुआ. बचपन में स्कूल के दौरान उनकी खेल के प्रति रुचि देखकर पिता ने उनका दाखिला खेल परिसर के हॉस्टल में कराया. यहां प्रशिक्षकों ने उन्हें हॉकी खेलने के लिए प्रेरित किया. इसके बाद वर्ष 2022 में बहतराई में हॉकी एक्सीलेंस सेंटर शुरू होने की जानकारी मिली. मधु ने ट्रायल दिया और उनका चयन खेलो इंडिया एक्सीलेंस सेंटर, बिलासपुर में हो गया.
कोच ने लड़कों के साथ कराई प्रैक्टिस, खेल में आया बड़ा सुधार
मधु ने बताया कि बहतराई एक्सीलेंस सेंटर में उन्हें कोचों का लगातार मार्गदर्शन मिला. कोच उन्हें अतिरिक्त अभ्यास के लिए प्रेरित करते थे और उनकी कमजोरियों पर काम करवाते थे. बेहतर बनाने के लिए उन्हें कई बार लड़कों के साथ भी प्रैक्टिस कराई गई. इससे उनकी खेल क्षमता और आत्मविश्वास में काफी सुधार आया. मधु के मुताबिक, सेंटर में उन्हें नियमित अभ्यास के साथ जरूरी इक्विपमेंट और अच्छी डाइट जैसी सुविधाएं भी मिलीं.
2026 में असेसमेंट कैंप, छह महीने बाद जूनियर एशिया कप में चयन
मधु वर्ष 2022 से 2025 तक बिलासपुर एक्सीलेंस सेंटर में रहीं. वर्ष 2026 में उनका चयन असेसमेंट कैंप के लिए हुआ. करीब छह महीने तक कैंप में मेहनत करने के बाद उन्होंने खुद को साबित किया और जूनियर महिला एशिया कप के लिए भारतीय टीम में जगह बनाई. मधु बताती हैं कि कैंप में उन्होंने अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर चयनकर्ताओं के सामने खुद को साबित किया.
पहली बार विदेश गईं, चीन में भारत के लिए खेला
जूनियर एशिया कप मधु का पहला अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट था और पहली बार वह किसी प्रतियोगिता के लिए देश से बाहर गईं. पासपोर्ट और वीजा बनने में देरी के कारण वह टूर्नामेंट शुरू होने से ठीक एक दिन पहले चीन पहुंचीं. शुरुआत के कुछ मुकाबलों में वह नर्वस रहीं, लेकिन इसके बाद उनके प्रदर्शन में सुधार आया.
साउथ कोरिया के खिलाफ दागा पहला गोल, सेमीफाइनल बना यादगार
मधु के लिए टूर्नामेंट का सबसे यादगार पल साउथ कोरिया के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबला रहा. मजबूत टीम के खिलाफ मधु ने भारत की ओर से पहला गोल दागा. भारतीय टीम ने यह मुकाबला 5-1 से अपने नाम किया. इसके बाद टीम ने जूनियर महिला हॉकी एशिया कप का खिताब अपने नाम किया.
पाकिस्तान के खिलाफ 19-0 की जीत ने रचा इतिहास
पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले को लेकर भी मधु ने अपनी याद साझा की. उन्होंने बताया कि मैच से एक दिन पहले टीम में सभी खिलाड़ी एक ही बात कर रहे थे कि इस मुकाबले में इतिहास रचना है. भारतीय टीम ने पाकिस्तान को 19-0 से हराया. मधु के लिए यह मुकाबला भी बेहद खास रहा.
अब 2027 वर्ल्ड कप की तैयारी पर फोकस
जूनियर महिला एशिया कप जीतने के बाद भारतीय टीम ने 2027 में होने वाले जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई किया है. अब मधु का लक्ष्य वर्ल्ड कप में भारत के लिए खेलना है. वह कहती हैं कि इसके लिए एशिया कप की तैयारी से भी ज्यादा मेहनत करनी होगी और लगातार अभ्यास करके टीम में अपनी जगह पक्की करनी होगी. इसके बाद उनका सपना सीनियर भारतीय टीम में जगह बनाकर ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करना है.
युवा खिलाड़ियों को मधु की सलाह- कोच की बात सुनें और मेहनत करें
मधु ने युवा खिलाड़ियों से कहा कि कोच जो भी सलाह देते हैं, उसे ध्यान से सुनना चाहिए और उसी के अनुसार अभ्यास करना चाहिए. उन्होंने कहा कि लगातार मेहनत, अनुशासन और कोच के मार्गदर्शन पर काम करने से खेल में सुधार आता है. मधु चाहती हैं कि उनसे आगे आने वाली खिलाड़ी भी मेहनत करें और उनसे भी बड़ी उपलब्धियां हासिल करें. जशपुर के छोटे से गांव से शुरू हुआ मधु का सफर अब अंतरराष्ट्रीय हॉकी के मैदान तक पहुंच चुका है. किसान परिवार की इस बेटी ने दिखाया है कि सही मार्गदर्शन, परिवार का सहयोग और लगातार मेहनत के दम पर गांव से निकलकर भी बड़े सपनों को हासिल किया जा सकता है.