‘अमेरिका ने खुद को अकेला कर लिया’, जयशंकर ने डोनाल्ड ट्रंप को दिखाया आईना
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S Jaishankar News: जयशंकर ने बेहद गहरा और सधा हुआ कूटनीतिक विश्लेषण साझा किया है. नई दिल्ली में ‘म्यूनिख लीडर्स मीटिंग’ को संबोधित करते हुए जयशंकर ने साफ किया कि आज की दुनिया दो बड़े भू-राजनीतिक ध्रुवों से संचालित हो रही है. पहला, अमेरिका की प्राथमिकताओं में आया नाटकीय बदलाव और दूसरा, महाशक्ति के रूप में चीन का निरंतर उभार.
जयशंकर ने अमेरिकी विदेश नीति को लेकर हमला बोला. (रॉयटर्स)
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने तेजी से बदलती वैश्विक व्यवस्था पर बेहद सटीक और दो-टूक कूटनीतिक विश्लेषण पेश किया है. दिल्ली में आयोजित ‘म्यूनिख लीडर्स मीटिंग’ के मंच से अंतरराष्ट्रीय ताकतों के समीकरण पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज का वैश्विक परिदृश्य काफी हद तक अमेरिका के अपने रुख में आए बुनियादी बदलाव से तय हो रहा है. जयशंकर ने साफ किया कि यह किसी मजबूरी में नहीं हुआ, बल्कि यह अमेरिका की सोची-समझी रणनीति और उसकी ‘पसंद की मुद्रा’ है.
विदेश मंत्री ने अमेरिकी विदेश नीति के मौजूदा रुख को रेखांकित करते हुए कहा कि वॉशिंगटन ने जानबूझकर खुद को एक ऐसी वैश्विक महाशक्ति बना लिया है जो पहले की तुलना में कहीं अधिक अकेली है. उन्होंने रेखांकित किया कि सुपरपावर द्वारा अपनी प्राथमिकताओं को नए सिरे से तय करने के इस फैसले ने दुनिया भर के भू-राजनीतिक समीकरणों को हिलाकर रख दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर शक्ति संतुलन के नए आयाम उभर रहे हैं.
अमेरिका के रुख पर जयशंकर
जयशंकर ने कहा, “इस कमरे में मौजूद कोई भी इस बात से असहमत नहीं होगा कि आज का माहौल मुख्य रूप से अमेरिका की स्थिति में आए बड़े बदलाव से तय हो रहा है. यह स्थिति में बदलाव उसकी अपनी पसंद का नतीजा है और एक तरह से, वह जान-बूझकर एक अकेली पड़ती हुई ताकत बन गया है.”
‘चीन खुद को अनोखा देश मानता है’
जयशंकर ने बदलते ग्लोबल ऑर्डर की एक और अहम बात के तौर पर चीन के बढ़ते असर का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि चीन खुद को एक “अनोखा देश” मानता है और कई मामलों में दुनिया में उसकी स्थिति की सच्चाई भी इस सोच को सही ठहराती है. उन्होंने कहा, “इस परिदृश्य की दूसरी अहम बात निश्चित रूप से चीन का उदय है. चीन खुद को एक अनोखा देश मानता है; यह एक तरह से उसकी अपनी सोच भी है और कई मामलों में सच्चाई भी.”
पावर रेस अब सिर्फ अमेरिका और चीन में नहीं
विदेश मंत्री जयशंकर ने यह भी कहा कि बड़ी ताकतों के बीच बढ़ता मुकाबला अब सिर्फ़ अमेरिका और चीन तक ही सीमित नहीं है. उनके अनुसार, देश वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए अपनी हर तरह की ताकत या प्रभाव का इस्तेमाल कर रहे हैं. उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि देशों के बीच गहरे आर्थिक और राजनीतिक आपसी जुड़ाव के बावजूद उनके बीच रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता भी बढ़ रही है.