इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्लाईदुबई के हीरो स्मित मच्छर को न्योता दिया है. ये आमंत्रण इजराइल के स्वतंत्रता दिवस और सेलेब्रिटी लाइटिंग ऑफ फ्लेम में शामिल होने का है. इसमें शामिल होना किसी भी व्यक्ति के लिए बेहद सम्मान की बात होती है. इजराइल का राष्ट्रीय पर्व सिर्फ एक उत्सव नहीं बल्कि दो हजार साल का इतिहास है, जिसे बहुत ही उत्सह के साथ मनाया जाता है.
इजराइल की स्थापना 14 मई 1948 को हुई थी. ये वही दिन है जब पूर्व पीएम डेविड बेन गुरियन ने तेल अवीव में आजादी का ऐलान किया था. इसके कुछ घंटों बाद ही ब्रिटिश शासन समाप्त हो गया था. हालांकि इजराइल आजादी का यह पर्व अंग्रेजी कलैंडर से नहीं बल्कि हिब्रू पंचांग की 5 इयार तिथि को मनाता है. इसी वजह से हर साल इसकी तारीख बदल जाती है. इस साल ये पर्व 21 अप्रैल को मनाया गया था, जबकि अगले साल यानी 2027 में यह 11 मई को मनाया जाएगा, जबकि 2028 में यह 1 मई को होगा.
इजराइल की स्थापना क्यों हुई?
आधुनिक इजराइल की स्थापना से पहले यह इलाका ब्रिटिश मैंटेड फॉर फिलिस्तीन के नाम से जाना जाता था. इस पर ब्रिटिशर्स की सत्ता थी. 19वीं सदी के अंत और 20 वीं सदी की शुरुआत में यहूदियों के खिलाफ बढ़ते उत्पीड़न और भेदभाव के बीच जायोनिस्ट आंदोलन शुरू हुआ. इस आंदोलन का उद्देश्य यहूदियों के लिए एक अलग राष्ट्र की स्थापना करना था.
द्वितीय विश्वयुद्ध और नाजी होलोकॉस्ट के बाद इस मांग ने और तेजी पकड़ ली. जब हालात बिगड़ने लगते तो संयुक्त राष्ट्र ने फिलिस्तीन को अरब और यहूदी राज्य में बांटने की पेशकश की. यहूदी इससे सहमत थे, लेकिन अरब देशों ने इसका कड़ा विरोध किया. इसीलिए जब इजराइल की स्थापना का ऐलान हुआ तो अरब ने हमला किया और अरब-इजराइल युद्ध हुआ.
सेलेब्रिटी लाइटिंग ऑफ फ्लेम क्या है?
इजराइल के स्वतंत्रा दिवस का आगाज सेलेब्रिटी लाइटिंग ऑफ फ्लेम से ही होता है. इसमें प्रतीकात्मक तौर पर 12 मशालें जलाई जाती हैं. येरुशलम के माउंट हर्जल पर होने वाला यह आयोजन अब तक अवपने 76 साल पूरे कर चुका है. पहली बार इसका आयोजन 1950 में किया गया था. जो एक तरह से येाम हाजिकारोन की समाप्ति और आजादी के पर्व की शुरुआत का प्रतीक है. योम हाजिकारोन इजराइल का मेमोरियल डे है, जिसमें शहीद सैनिकों और आतंकवाद के शिकार नागरिकों को याद किया जाता है.
12 मशालें ही क्यों जलाई जाती हैं?
सेलेब्रिटी लाइटिंग ऑफ फ्लेम में जलने वाली 12 मशालों का संबंध इजराइल की 12 जनजातियों से है. इस आयोजन में हर साल सोशल, एजुकेशन, कल्चर समेत अन्य क्षेत्रों में असाधारण योगदान देने वाले लोगों को इन्हें जलाने का सम्मान दिया जाता है. मशाल जलाने वाले व्यक्ति मंच पर आकर स्वतंत्रता दिवस के सम्मान में सदेश देते हैं और फिर मशाल प्रज्जवलित करते हैं. इसे इजराइल के राष्ट्रीय सम्मान के तौर पर देखा जाता है.
पीएम मोदी और स्मित को क्यों दिया गया न्योता?
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाई दुबई की उड़ान को हाल ही में को पायलट ने गिराने की कोशिश की. विमान को भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर उड़ा रहे थे, जिन्होंने असाधारण साहस दिखाया. प्लेन में ज्यादातर यात्री इजराइल के थे. पूरी दुनिया ने स्मित के इस साहस की सराहना की. इजराइल के पीएम ने भी स्मित को भारत-इजराइल और पूरी दुनिया का नायक बताया. उन्होंने स्वतंत्रता दिवस पर स्मित को सेलेब्रिटी लाइटिंग ऑफ फ्लेम में मशाल जलाने का न्योता दिया. उन्होंने पीएम मोदी को भी आमंत्रित किया. नेतन्याहू ने कहा कि यह इजराइल के सम्मान की बात होगी.
क्यों खास होता है ये समारोह?
इजराइल में मशाल को जलाना एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं है. उन लोगों को राष्ट्रीय सम्मान देने का तरीका होता है. उन लोगों के लिए, जिन्होंने देश, समाज या मानवता के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया हो. इसलिए किसी विदेशी नागरिक या विदेशी नेता को इस समारोह में शामिल होने का न्योता देना बेहद सम्मान की बात मानी जाती है.