‘हेलो! हम बोल रहे हैं’, बिहार की मिट्टी से निकली कहानी, प्यार से शुरू होकर सियासत तक पहुंचती है…

‘हेलो! हम बोल रहे हैं’, बिहार की मिट्टी से निकली कहानी, प्यार से शुरू होकर सियासत तक पहुंचती है…


ओटीटी प्लेटफॉर्म Waves पर 24 जुलाई 2026 को रिलीज हुई सीरीज ‘हेलो! हम बोल रहे हैं’ का सीजन 1 बिहार की पृष्ठभूमि पर बनी एक अलग तरह की कहानी पेश करता है. यह सीरीज सिर्फ राजनीति और अपराध की घिसी-पिटी कहानी नहीं दिखाती, बल्कि प्यार, दोस्ती और परिवार के जरिए सियासत तक पहुंचती है. सीरीज की बड़ी खासियत इसका स्थानीय परिवेश है. बिहार यहां सिर्फ शूटिंग लोकेशन या बोली तक सीमित नहीं है. छोटे शहर की सोच, परिवार, दोस्ती, रिश्ते और स्थानीय राजनीति कहानी के हिस्से बनते हैं.

सीरीज की शूटिंग बिहार के मुजफ्फरपुर, वैशाली और संधा गांव में हुई है. यही वजह है कि इसके कई दृश्य और किरदार बिहार के दर्शकों के लिए ज्यादा पहचाने हुए लग सकते हैं. कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, पप्पू की निजी जिंदगी राजनीतिक घटनाओं से जुड़ती जाती है. 8 एपिसोड की इस सीरीज का निर्देशन अभ्यांक-आनंद ने किया है. लीड में निलय मिताश और प्रतिभा तिवारी हैं, साथ में इश्तियाक खान, यशपाल शर्मा, सुष्मिता मुखर्जी और पंकज बेरी जैसे अनुभवी कलाकार हैं.

कहानी पप्पू, पवन और पिंटू की दोस्ती से शुरू होती है. तीनों दोस्तों की दुनिया चाय की दुकान, दोस्तों की बातचीत और रोजमर्रा की छोटी-छोटी परेशानियों के आसपास घूमती है. पप्पू की जिंदगी में प्यार की तलाश शुरू होती है और एक फोन कॉल उसे ऐसे घटनाक्रम में पहुंचा देता है, जिसका रिश्ता आगे चलकर स्थानीय राजनीति से जुड़ता है.

निलय मिताश की कहानी में बिहार, प्यार और राजनीति का कनेक्शन

क्या है कहानी, फोन कॉल से शुरू होती है सियासत

कहानी की शुरुआत तीन दोस्तों पप्पू, पवन और पिंटू की बेफिक्र जिंदगी से होती है. पप्पू का किरदार निलय मिताश ने निभाया है. वह प्यार की तलाश में एक फोन कॉल करता है. यहीं से कहानी नया मोड़ लेती है. यह फोन कॉल पहले प्यार और फिर धीरे-धीरे स्थानीय राजनीति से जुड़ जाता है. चाय की दुकान पर बैठने वाले तीन दोस्तों की दुनिया अचानक बड़े सियासी खेल का हिस्सा बन जाती है. सीरीज की यही खूबी है कि यह प्रेम कहानी से शुरू होकर पॉलिटिकल ड्रामा तक जाती है.

बिहार सिर्फ बैकड्रॉप नहीं, कहानी का हिस्सा है

इस सीरीज की सबसे बड़ी ताकत इसका परिवेश है. बिहार को यहां सिर्फ दिखाने के लिए नहीं रखा गया है. छोटे शहर की सोच, परिवार के रिश्ते, दोस्तों की मस्ती और स्थानीय नेताओं की चालें, सब कहानी में घुले-मिले हैं. डीओपी कविश अग्रवाल ने इसे चमकदार बनाने की बजाय देसी और असली लुक दिया है. यही वजह है कि दर्शक पात्रों से जल्दी जुड़ जाते हैं. हालांकि कई किरदार और कई ट्रैक एक साथ चलने से कुछ जगह कहानी की रफ्तार धीमी लगती है.

बिहार बेस्ड सीरीज हेलो हम बोल रहे हैं. कॉमेडी से शुरू होकर पॉलिटिकल ड्रामा तक जाती है कहानी, मीठी बोलियां गाना बना खास.

निलय मिताश और प्रतिभा तिवारी को जानिए

निलय मिताश ने पप्पू की भूमिका निभाई है और यह उनकी पहली लीड वेब सीरीज है. इससे पहले वह इंजीनियरिंग और कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर अभिनय की दुनिया में आए और थिएटर तथा शॉर्ट फिल्म के जरिए अपनी पहचान बनाई. पप्पू के किरदार में निलय सहज दिखाई देते हैं. शुरुआत में उनका किरदार हल्का-फुल्का और बेफिक्र नजर आता है, लेकिन कहानी गंभीर होने के साथ उसके भीतर का बदलाव भी दिखाई देता है. प्रतिभा तिवारी कहानी के रोमांटिक और रहस्य वाले हिस्से को संभालती हैं. पप्पू और उनके किरदार के बीच की केमिस्ट्री कहानी को आगे बढ़ाती है. दोनों के बीच के दृश्य बहुत ज्यादा बनावटी नहीं लगते.

निलय मिताश, प्रतिभा तिवारी और इश्तियाक का असरदार अभिनय

निलय मिताश ने पप्पू के किरदार में अच्छा काम किया है और उन्होंने पप्पू को सिर्फ कॉमेडी कैरेक्टर नहीं बनने दिया. कहानी गंभीर होती है तो उनके अभिनय में भी बदलाव दिखता है. प्रतिभा तिवारी कहानी के रोमांटिक और सस्पेंस वाले हिस्से को संभालती हैं. दोनों की केमिस्ट्री सहज लगती है. इश्तियाक खान अपनी कॉमिक टाइमिंग से हंसाते भी हैं और पप्पू के दोस्त व गाइड की तरह कहानी को संभालते भी हैं. यशपाल शर्मा, सुष्मिता मुखर्जी और पंकज बेरी राजनीतिक हिस्से को वजन देते हैं. मुहम्मद आसिफ इकबाल पिंटू के रोल में प्यारे लगे हैं.

‘हेलो! हम बोल रहे हैं’: बिहार की कहानी, देसी अंदाज और राजनीति का तड़का

निर्देशन और संगीत, मीठी बोलियां गाना बना खास

अभ्यांक-आनंद का निर्देशन कहानी को बहुत ज्यादा ड्रामेटिक नहीं बनाता. वह किरदारों को समय देते हैं. शुरुआती एपिसोड में दोस्ती और प्यार को जगह दी गई है, ताकि बाद में जब सियासत एंट्री ले तो वह असरदार लगे. संगीत के मामले में सीरीज मजबूत है. ईश्वर कुमार का बैकग्राउंड स्कोर कहानी पर हावी नहीं होता, बल्कि उसे सपोर्ट करता है. सीरीज में दो गाने हैं, जिनमें ‘मीठी बोलियां’ गाना खास है. इसे ईश्वर कुमार ने कंपोज किया है, अल्ताफ सैयद ने गाया है और बोल आनंद सिंह ने लिखे हैं.

देखें या नहीं, हमारा फैसला

‘हेलो! हम बोल रहे हैं’ कोई हार्डकोर पॉलिटिकल थ्रिलर नहीं है. यह एक छोटे शहर के लड़के की कहानी है, जिसकी निजी जिंदगी में धीरे-धीरे राजनीति घुस जाती है. अगर आपको बिहार की पृष्ठभूमि वाली, रिश्तों और हल्की-फुल्की कॉमेडी के साथ सियासत वाली कहानी पसंद है तो यह सीरीज आपको पसंद आएगी. कई जॉनर को एक साथ लाने की कोशिश में कहीं-कहीं कसावट की कमी जरूर है, लेकिन लोकल टच और कलाकारों का अभिनय इसे देखने लायक बनाता है.



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